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Bareilly News: तस्कर हों या धंधेबाज...प्यादे ही आ रहे पुलिस के हाथ
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बरेली। स्मैक तस्करी के आरोपियों की गिरफ्तारी का मामला हो या फिर फर्जी फर्म बनाकर करोड़ों की जीएसटी चोरी का, हर बार प्यादे ही पुलिस के हाथ आ रहे हैं। सरगना पर कार्रवाई को लेकर शोर तो खूब मचता है, लेकिन पुलिस रसूखदारों के दरवाजे तक नहीं पहुंच पाती। ऐसे कई मामले फिलहाल लोगों के जेहन में हैं, जहां बड़ों और रसूखदारों पर कार्रवाई नहीं हो सकी।
कोतवाली पुलिस ने कल्लू डॉन को दिया अभयदान
फरवरी में कोतवाली पुलिस ने 27.79 ग्राम स्मैक समेत बिथरी चैनपुर के आरोपी को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह फतेहगंज पश्चिमी मस्जिद वाली गली निवासी शाहिद से स्मैक लेकर आया है। इस आधार पर पुलिस ने पहले फतेहगंज पश्चिमी नगर पंचायत की अध्यक्ष इमराना बेगम के पति चर्चित तस्कर शाहिद उर्फ कल्लू डॉन को आरोपी मान लिया। कोतवाली पुलिस ने कल्लू के घर दबिश भी दी, लेकिन सूचना लीक होने से वह घर से हट गया। कुछ दिन बाद ही कोतवाली पुलिस ने आश्चर्यजनक तरीके से अपनी गलती सुधारी और कस्बे के एक मामूली तस्कर शाहिद को बतौर आरोपी अपने केस में शामिल व वांछित कर लिया। कुछ लोग इसे मोटी डील तो कुछ इसे इलाके के कद्दावर नेता का आशीर्वाद मान रहे हैं। हालांकि, कोतवाल राजीव कुमार का कहना है कि शुरू में गलती से दबिश दी गई थी। असली आरोपी का बाद में पता लगा।
सोबती के नाम का शोर, लेकिन नाम नहीं खोला
पुलिस की एसआईटी ने किला थाने में दर्ज जीएसटी चोरी के दो साल पुराने मामले में नई गिरफ्तारी करके आरोपियों फरजान हाशमी व सागर अग्रवाल को रिमांड पर भी लिया है। एक करोड़ की जीएसटी चोरी मामले में पुलिस को सोबती नाम से दो फर्में भी मिली हैं, जिन्होंने इस हेराफेरी का लाभ लिया है। पुलिस सोबती बिल्डर व संबंधित ग्रुप के इस फर्जीवाड़े में लिप्त होने का इशारा दे रही है, लेकिन अब तक संबंधित फर्मों के मालिकों व उनके जुड़ाव का जिक्र कार्रवाई में शामिल नहीं हो सका है।
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गुलाटी मिला न मौर्य बंधु, खुले घूम रहे विप्रा के साथी
कैनविज ग्रुप के सीएमडी कन्हैया लाल गुलाटी, भाजपा का पूर्व जिला महामंत्री रहा सूर्यकांत मौर्य व उसके दो भाई निवेशकों के करोड़ों रुपये हड़पकर भाग चुके हैं। इन्हें एसएसपी फरार व इनामी घोषित कर चुके हैं। गुलाटी के खिलाफ तो लुट आउट नोटिस भी जारी है। बावजूद वह आज तक पुलिस की पकड़ में नहीं आ सका है। ठगी का एक और आरोपी रूपकिशोर गोला को पकड़कर निवेशकों ने ही पुलिस को सौंप दिया था जो अब जमानत पर छूट गया है। गोला के भाई व अन्य आरोपी आज तक नहीं पकड़े जा सके हैं।
तस्करों की आपसी गैंगवार का भी नहीं मिल रहा फायदा
फतेहगंज पश्चिमी, मीरगंज, फतेहगंज पूर्वी और फरीदपुर स्मैक तस्करों के गढ़ है। बेहरा के कई तस्कर दूसरे राज्यों में माल सप्लाई करते हैं। एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में कुछ तस्करों में काफी समय से शह-मात का खेल चल रहा है। एक-दूसरे के प्यादों को पकड़वाना और मुकदमों में नामजद कराने की भी होड़ है, लेकिन बड़े और नामचीन तस्कर हाथ नहीं आ रहे हैं। इस मामले में बेहरा का तस्कर सबसे आगे है, क्योंकि सबसे बड़ा गैंग भी उसका ही है। इस तस्कर की सेटिंग दिल्ली तक है। हाल के दिनों में उस पर कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हो सकी है।
वर्जन
अपराधियों पर कार्रवाई में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आरोपी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे घेरने व कानूनी शिकंजा तैयार करने के लिए पुलिस को पूरी छूट दी गई है। नामी व चर्चित आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम गठित कर बाहर प्रांतों में भी भेजी जाती है। जो अपराधी गिरफ्तार नहीं हो सके हैं, उनकी धरपकड़ के प्रयास किए जा रहे हैं। - अनुराग आर्य, एसएसपी
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कोतवाली पुलिस ने कल्लू डॉन को दिया अभयदान
फरवरी में कोतवाली पुलिस ने 27.79 ग्राम स्मैक समेत बिथरी चैनपुर के आरोपी को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह फतेहगंज पश्चिमी मस्जिद वाली गली निवासी शाहिद से स्मैक लेकर आया है। इस आधार पर पुलिस ने पहले फतेहगंज पश्चिमी नगर पंचायत की अध्यक्ष इमराना बेगम के पति चर्चित तस्कर शाहिद उर्फ कल्लू डॉन को आरोपी मान लिया। कोतवाली पुलिस ने कल्लू के घर दबिश भी दी, लेकिन सूचना लीक होने से वह घर से हट गया। कुछ दिन बाद ही कोतवाली पुलिस ने आश्चर्यजनक तरीके से अपनी गलती सुधारी और कस्बे के एक मामूली तस्कर शाहिद को बतौर आरोपी अपने केस में शामिल व वांछित कर लिया। कुछ लोग इसे मोटी डील तो कुछ इसे इलाके के कद्दावर नेता का आशीर्वाद मान रहे हैं। हालांकि, कोतवाल राजीव कुमार का कहना है कि शुरू में गलती से दबिश दी गई थी। असली आरोपी का बाद में पता लगा।
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सोबती के नाम का शोर, लेकिन नाम नहीं खोला
पुलिस की एसआईटी ने किला थाने में दर्ज जीएसटी चोरी के दो साल पुराने मामले में नई गिरफ्तारी करके आरोपियों फरजान हाशमी व सागर अग्रवाल को रिमांड पर भी लिया है। एक करोड़ की जीएसटी चोरी मामले में पुलिस को सोबती नाम से दो फर्में भी मिली हैं, जिन्होंने इस हेराफेरी का लाभ लिया है। पुलिस सोबती बिल्डर व संबंधित ग्रुप के इस फर्जीवाड़े में लिप्त होने का इशारा दे रही है, लेकिन अब तक संबंधित फर्मों के मालिकों व उनके जुड़ाव का जिक्र कार्रवाई में शामिल नहीं हो सका है।
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गुलाटी मिला न मौर्य बंधु, खुले घूम रहे विप्रा के साथी
कैनविज ग्रुप के सीएमडी कन्हैया लाल गुलाटी, भाजपा का पूर्व जिला महामंत्री रहा सूर्यकांत मौर्य व उसके दो भाई निवेशकों के करोड़ों रुपये हड़पकर भाग चुके हैं। इन्हें एसएसपी फरार व इनामी घोषित कर चुके हैं। गुलाटी के खिलाफ तो लुट आउट नोटिस भी जारी है। बावजूद वह आज तक पुलिस की पकड़ में नहीं आ सका है। ठगी का एक और आरोपी रूपकिशोर गोला को पकड़कर निवेशकों ने ही पुलिस को सौंप दिया था जो अब जमानत पर छूट गया है। गोला के भाई व अन्य आरोपी आज तक नहीं पकड़े जा सके हैं।
तस्करों की आपसी गैंगवार का भी नहीं मिल रहा फायदा
फतेहगंज पश्चिमी, मीरगंज, फतेहगंज पूर्वी और फरीदपुर स्मैक तस्करों के गढ़ है। बेहरा के कई तस्कर दूसरे राज्यों में माल सप्लाई करते हैं। एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में कुछ तस्करों में काफी समय से शह-मात का खेल चल रहा है। एक-दूसरे के प्यादों को पकड़वाना और मुकदमों में नामजद कराने की भी होड़ है, लेकिन बड़े और नामचीन तस्कर हाथ नहीं आ रहे हैं। इस मामले में बेहरा का तस्कर सबसे आगे है, क्योंकि सबसे बड़ा गैंग भी उसका ही है। इस तस्कर की सेटिंग दिल्ली तक है। हाल के दिनों में उस पर कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हो सकी है।
वर्जन
अपराधियों पर कार्रवाई में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आरोपी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे घेरने व कानूनी शिकंजा तैयार करने के लिए पुलिस को पूरी छूट दी गई है। नामी व चर्चित आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम गठित कर बाहर प्रांतों में भी भेजी जाती है। जो अपराधी गिरफ्तार नहीं हो सके हैं, उनकी धरपकड़ के प्रयास किए जा रहे हैं। - अनुराग आर्य, एसएसपी