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रहें सावधान... संक्रमितों के सोर्स नहीं खोज पा रहा सर्विलांस
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300 बेड अस्पताल का निरीक्षण करते डीएम।
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एक भी संक्रमित की नहीं मिली ट्रेवल हिस्ट्री, बाजार-समारोह, पार्टी कहीं भी हो सकता है कोरोना
विदेश से लौटे संक्रमित लोगों के लिए तीन सौ बेड अस्पताल में बना इंटरनेशनल कोविड वार्ड
बरेली। कोरोना पहली और दूसरी लहर के दौरान सैकड़ों संक्रमितों का सोर्स खोजने में नाकाम रहे सर्विलांस पर एक बार फिर सवालिया निशान लग रहा है। पिछले करीब दो महीने में कई लोग संक्रमित मिल चुके हैं पर इनमें किसी के भी संक्रमण का सोर्स नहीं खोजा जा सका है। यानी साफ है कि जिले में तमाम ऐसे संक्रमित हो सकते हैं जिनका पता नहीं लगाया जा पा रहा है। ऐसे में अपनी हिफाजत के लिए सिस्टम के भरोसे रहने के बजाय खुद सावधान रहने की जरूरत है।
स्वास्थ्य विभाग की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले दिनों हजारों सैंपल की जांच किए बगैर जिले को कोरोना मुक्त घोषित कर दिया गया। अब संक्रमितों का सोर्स खोजने में भी स्वास्थ्य विभाग नाकाम हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग की सर्विलांस टीम को संक्रमित की ट्रेवल हिस्ट्री के साथ यह पता लगाना होता है कि वह किससे कितनी देर संपर्क में रहा। इसका ब्योरा तैयार किया जाता है। उसके संपर्क में आने वाले सभी लोगों की सैंपलिंग कराई जाती है। हालांकि कई बार सोर्स का पता नहीं चल पाता है। ज्यादातर संक्रमित समारोह में शामिल होने की जानकारी देते हैं। समारोह में शामिल होने वाले प्रत्येक व्यक्ति की ट्रैकिंग और ट्रेसिंग नामुमकिन बता दी जाती है।
आईडीएसपी एवं सर्विलांस सेल प्रभारी डॉ. अनुराग गौतम के मुताबिक संक्रमित को अधिकतम 20 से 25 लोग ही याद रहते हैं। शेष तमाम लोग जिनसे वह बाजार या भीड़भाड़ में अन्य कहीं मिला, उनकी याद नहीं रहती न ही कोई जानकारी रहती है। ऐसे में सोर्स का पता करना मुश्किल होता है। लोग अगर सावधानी बरतें और कोविड प्रोटोकॉल का पालन करें तो संक्रमण की आशंका बेहद कम रहेगी। सोर्स भी पता चलेंगे।
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लापरवाही फिर पड़ सकती है भारी
डॉ. अनुराग के मुताबिक कोरोना के मामले अब कम हो गए हैं पर संक्रमित मिल रहे हैं। कोविड प्रोटोकॉल यानी मास्क लगाने, दो गज की दूरी, सैनिटाइजेशन आदि के प्रति बेपरवाही भारी पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। दूसरी लहर आने की बड़ी वजह कोविड प्रोटोकॉल को दरकिनार करना भी रही। लिहाजा, तेजी से लोग संक्रमण की चपेट में आए और स्थिति गंभीर बनी। लोगों को सावधान रहना होगा।
निजी कॉलेज में सैंपलिंग, रिपोर्ट निगेटिव
शासन से जारी आदेश के तहत बुधवार को ज्योति कॉलेज और महाराजा अग्रसेन कॉलेज में पहुुंचकर स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने रैंडम सैंपलिंग की। जो संदिग्ध रहे उनकी आरटीपीसीआर जांच के लिए सैंपल लिए। एंटीजन जांच में कोई भी पॉजिटिव नहीं मिला। उधर, एयरपोर्ट पर भी यात्रियों की कोरोना जांच की गई। डॉ. अनुराग के मुताबिक फोकस सैंपलिंग बृहस्पतिवार को भी कॉलेज स्टाफ, विद्यार्थियों की जांच की जाएगी।
इंटरनेशनल वार्ड में रखे जाएंगे संक्रमित
विदेश से निगेटिव रिपोर्ट लेकर बरेली वापस आने के बाद अगर कोई व्यक्ति संक्रमित मिलेगा तो उसे इंटरनेशनल वार्ड में रखा जाएगा। इसके लिए तीन सौ बेड अस्पताल के 20 बेड वाले कक्ष को इंटरनेशनल वार्ड में तब्दील कर दिया गया है। सीएमएस डॉ. पवन कपाही ने बताया कि अगर कोई व्यक्ति संक्रमित मिलेगा तो उसे स्वस्थ होने तक आइसोलेट रखे जाने की पूरी व्यवस्था है।
डीएम ने किया तीन सौ बेड अस्पताल का निरीक्षण
बरेली। तीन सौ बेड कोविड चिकित्सालय के लंबित हस्तांतरण प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने के लिए डीएम मानवेंद्र सिंह ने सीएमओ डॉ. बलबीर सिंह कोे दिशानिर्देश दिए। मंगलवार को डीएम मानवेंद्र सिंह ने तीन सौ बेड अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने स्थापित किए गए ऑक्सीजन प्लांट का निरीक्षण किया और अस्पताल की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखने के निर्देश दिए।
तीन सौ बेड कोविड अस्पताल की हस्तांतरण किए जाने के निर्देश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दूसरी लहर के दौरान बरेली के निरीक्षण के दौरान दिए थे। करीब छह माह से ज्यादा का वक्त गुजरने के बावजूद अब तक निर्माणदायी संस्था ने अस्पताल का हस्तांतरण नहीं किया है। कमिश्नर आर रमेश कुमार ने बैठक के दौरान निर्माण कार्य पूरे हो चुके सभी निर्माण कार्यों के हस्तांतरण को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए हैं। ताकि उनका सुचारू प्रबंधन शुरू हो सके। बुधवार को निरीक्षण पर पहुंचे डीएम मानवेंद्र सिंह ने हस्तांतरण की प्रक्रिया में आ रही अड़चन की जानकारी ली और निस्तारण का निर्देश दिया। ब्यूरो
सैंपल बरबाद करने में तीन डॉक्टरों की भूमिका संदिग्ध
बरेली। हजारोें संदिग्ध मरीजों के लिए गए आरटीपीसीआर सैंपल की जांच के बजाय उन्हें बरबाद करने के प्रकरण में जांच रिपोर्ट जल्द सीएमओ को सौंप दी जाएगी। इसमें पूर्व कर्मचारियों समेत तीन चिकित्सकों की भी भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। बताया जाता है कि अगर उन्होंने अपने दायित्वों का सही तरीके से निर्वहन किया होता तो सैंपल बरबाद नहीं होते।
पिछले दिनों तीन सौ बेड कोविड अस्पताल के फ्लू कॉर्नर पर जांच के लिए भेजे गए हजारों सैंपल डंप कर दिए गए। उनकी जांच ही नहीं कराई गई। प्रकरण खुला तो सैंपल को नष्ट कर दिया गया। वहीं, अगस्त और सितंबर के भी एक स्टोर रूम में हजारों सैंपल मिलने के बाद विभाग में खलबली मच गई। आनन-फानन में सीएमओ डॉ. बलबीर सिंह ने जांच समिति गठित कर दी। पर चार दिन गुजरने के बाद भी अब तक जांच सौंपी नहीं जा सकी है। बताते हैं कि एक जांच अधिकारी के शहर से बाहर होने की वजह से जांच प्रक्रिया ठप रही। अब तक हुई जांच में तीन चिकित्सक और दो पूर्व में रहे कर्मचारी को संदिग्ध माना जा रहा है। जांच रिपोर्ट में भी उनके नाम खोले जाने की तैयारी है। हालांकि, प्रकरण पर विभाग के अफसर जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही कु छ कहने की बात कह रहे हैं। ब्यूरो
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विदेश से लौटे संक्रमित लोगों के लिए तीन सौ बेड अस्पताल में बना इंटरनेशनल कोविड वार्ड
बरेली। कोरोना पहली और दूसरी लहर के दौरान सैकड़ों संक्रमितों का सोर्स खोजने में नाकाम रहे सर्विलांस पर एक बार फिर सवालिया निशान लग रहा है। पिछले करीब दो महीने में कई लोग संक्रमित मिल चुके हैं पर इनमें किसी के भी संक्रमण का सोर्स नहीं खोजा जा सका है। यानी साफ है कि जिले में तमाम ऐसे संक्रमित हो सकते हैं जिनका पता नहीं लगाया जा पा रहा है। ऐसे में अपनी हिफाजत के लिए सिस्टम के भरोसे रहने के बजाय खुद सावधान रहने की जरूरत है।
स्वास्थ्य विभाग की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले दिनों हजारों सैंपल की जांच किए बगैर जिले को कोरोना मुक्त घोषित कर दिया गया। अब संक्रमितों का सोर्स खोजने में भी स्वास्थ्य विभाग नाकाम हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग की सर्विलांस टीम को संक्रमित की ट्रेवल हिस्ट्री के साथ यह पता लगाना होता है कि वह किससे कितनी देर संपर्क में रहा। इसका ब्योरा तैयार किया जाता है। उसके संपर्क में आने वाले सभी लोगों की सैंपलिंग कराई जाती है। हालांकि कई बार सोर्स का पता नहीं चल पाता है। ज्यादातर संक्रमित समारोह में शामिल होने की जानकारी देते हैं। समारोह में शामिल होने वाले प्रत्येक व्यक्ति की ट्रैकिंग और ट्रेसिंग नामुमकिन बता दी जाती है।
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आईडीएसपी एवं सर्विलांस सेल प्रभारी डॉ. अनुराग गौतम के मुताबिक संक्रमित को अधिकतम 20 से 25 लोग ही याद रहते हैं। शेष तमाम लोग जिनसे वह बाजार या भीड़भाड़ में अन्य कहीं मिला, उनकी याद नहीं रहती न ही कोई जानकारी रहती है। ऐसे में सोर्स का पता करना मुश्किल होता है। लोग अगर सावधानी बरतें और कोविड प्रोटोकॉल का पालन करें तो संक्रमण की आशंका बेहद कम रहेगी। सोर्स भी पता चलेंगे।
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लापरवाही फिर पड़ सकती है भारी
डॉ. अनुराग के मुताबिक कोरोना के मामले अब कम हो गए हैं पर संक्रमित मिल रहे हैं। कोविड प्रोटोकॉल यानी मास्क लगाने, दो गज की दूरी, सैनिटाइजेशन आदि के प्रति बेपरवाही भारी पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। दूसरी लहर आने की बड़ी वजह कोविड प्रोटोकॉल को दरकिनार करना भी रही। लिहाजा, तेजी से लोग संक्रमण की चपेट में आए और स्थिति गंभीर बनी। लोगों को सावधान रहना होगा।
निजी कॉलेज में सैंपलिंग, रिपोर्ट निगेटिव
शासन से जारी आदेश के तहत बुधवार को ज्योति कॉलेज और महाराजा अग्रसेन कॉलेज में पहुुंचकर स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने रैंडम सैंपलिंग की। जो संदिग्ध रहे उनकी आरटीपीसीआर जांच के लिए सैंपल लिए। एंटीजन जांच में कोई भी पॉजिटिव नहीं मिला। उधर, एयरपोर्ट पर भी यात्रियों की कोरोना जांच की गई। डॉ. अनुराग के मुताबिक फोकस सैंपलिंग बृहस्पतिवार को भी कॉलेज स्टाफ, विद्यार्थियों की जांच की जाएगी।
इंटरनेशनल वार्ड में रखे जाएंगे संक्रमित
विदेश से निगेटिव रिपोर्ट लेकर बरेली वापस आने के बाद अगर कोई व्यक्ति संक्रमित मिलेगा तो उसे इंटरनेशनल वार्ड में रखा जाएगा। इसके लिए तीन सौ बेड अस्पताल के 20 बेड वाले कक्ष को इंटरनेशनल वार्ड में तब्दील कर दिया गया है। सीएमएस डॉ. पवन कपाही ने बताया कि अगर कोई व्यक्ति संक्रमित मिलेगा तो उसे स्वस्थ होने तक आइसोलेट रखे जाने की पूरी व्यवस्था है।
डीएम ने किया तीन सौ बेड अस्पताल का निरीक्षण
बरेली। तीन सौ बेड कोविड चिकित्सालय के लंबित हस्तांतरण प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने के लिए डीएम मानवेंद्र सिंह ने सीएमओ डॉ. बलबीर सिंह कोे दिशानिर्देश दिए। मंगलवार को डीएम मानवेंद्र सिंह ने तीन सौ बेड अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने स्थापित किए गए ऑक्सीजन प्लांट का निरीक्षण किया और अस्पताल की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखने के निर्देश दिए।
तीन सौ बेड कोविड अस्पताल की हस्तांतरण किए जाने के निर्देश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दूसरी लहर के दौरान बरेली के निरीक्षण के दौरान दिए थे। करीब छह माह से ज्यादा का वक्त गुजरने के बावजूद अब तक निर्माणदायी संस्था ने अस्पताल का हस्तांतरण नहीं किया है। कमिश्नर आर रमेश कुमार ने बैठक के दौरान निर्माण कार्य पूरे हो चुके सभी निर्माण कार्यों के हस्तांतरण को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए हैं। ताकि उनका सुचारू प्रबंधन शुरू हो सके। बुधवार को निरीक्षण पर पहुंचे डीएम मानवेंद्र सिंह ने हस्तांतरण की प्रक्रिया में आ रही अड़चन की जानकारी ली और निस्तारण का निर्देश दिया। ब्यूरो
सैंपल बरबाद करने में तीन डॉक्टरों की भूमिका संदिग्ध
बरेली। हजारोें संदिग्ध मरीजों के लिए गए आरटीपीसीआर सैंपल की जांच के बजाय उन्हें बरबाद करने के प्रकरण में जांच रिपोर्ट जल्द सीएमओ को सौंप दी जाएगी। इसमें पूर्व कर्मचारियों समेत तीन चिकित्सकों की भी भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। बताया जाता है कि अगर उन्होंने अपने दायित्वों का सही तरीके से निर्वहन किया होता तो सैंपल बरबाद नहीं होते।
पिछले दिनों तीन सौ बेड कोविड अस्पताल के फ्लू कॉर्नर पर जांच के लिए भेजे गए हजारों सैंपल डंप कर दिए गए। उनकी जांच ही नहीं कराई गई। प्रकरण खुला तो सैंपल को नष्ट कर दिया गया। वहीं, अगस्त और सितंबर के भी एक स्टोर रूम में हजारों सैंपल मिलने के बाद विभाग में खलबली मच गई। आनन-फानन में सीएमओ डॉ. बलबीर सिंह ने जांच समिति गठित कर दी। पर चार दिन गुजरने के बाद भी अब तक जांच सौंपी नहीं जा सकी है। बताते हैं कि एक जांच अधिकारी के शहर से बाहर होने की वजह से जांच प्रक्रिया ठप रही। अब तक हुई जांच में तीन चिकित्सक और दो पूर्व में रहे कर्मचारी को संदिग्ध माना जा रहा है। जांच रिपोर्ट में भी उनके नाम खोले जाने की तैयारी है। हालांकि, प्रकरण पर विभाग के अफसर जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही कु छ कहने की बात कह रहे हैं। ब्यूरो