फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   BDA forced the citymen to buy expensive homes

शहरवासियों को महंगे घर खरीदने को मजबूर किया बीडीए ने

Sat, 28 Oct 2017 01:40 AM IST
बरेली
बरेली Updated Sat, 28 Oct 2017 01:40 AM IST
विज्ञापन
ब से बीडीए और ब से बेकार। 
विज्ञापन

बीस साल पहले शहर को डीडीपुरम, एकतानगर जैसी पॉश कालोनियां देने वाली बरेली डेवलपमेंट अथारिटी को अब बेकार डेवलपमेंट अथॉरिटी कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। रामगंगा नगर आवासीय योजना लाने के बाद बीडीए 13 साल से बेकार पड़ा है। दो दशक से कोई नया प्रोजेक्ट न लाकर बीडीए ने शहरवासियों को प्राइवेट बिल्डरों से महंगे मकान खरीदने पर मजबूर कर दिया। बिल्डरों को अवैध कालोनियां बसाने की भी छूट मिली। शहरवासियों को तीन से चार गुनी कीमत चुकाकर मकान या फ्लैट खरीदने पड़े। इसी तरह आवास विकास परिषद भी दो दशकों से नकारेपन पर आमादा है। आवास विकास और बीडीए के अफसरों ने निजी हितों के लिए जनहित दबा दिए। सस्ती जमीनें खरीदकर जो मुनाफा दोनों सरकारी निर्माण एजेंसियां उठा सकती थीं, वह बिल्डरों ने उठाया। 

अब तक नहीं बस पाया रामगंगा नगर 
बीडीए ने 2004 मेें रामगंगा नगर आवासीय योजना के लिए कई गांवों की 269 हेक्टेअर जमीन अधिग्रहण के लिए प्रस्तावित की थी। किसान अधिग्रहण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक गए। 10 साल से ज्यादा समय तक मामला न्यायालय में उलझा रहा। बीडीए ने जमीन का बिना बैनामा कराए 1050 से ज्यादा लोगों को प्लाट आवंटित कर दिए जिन्हें कब्जे नहीं मिल सके। हालांकि कोर्ट से किसानों को राहत नहीं मिली। उधर, फैसला पक्ष में आने के दो साल बाद भी बीडीए 300 से ज्यादा किसानों का मुआवजा नहीं दे पाया। इसके लिए बैंक से लोन लेना पड़ रहा है। रामगंगा नगर योजना के बाद बीडीए कोई प्रोजेक्ट नहीं लाया। पूरा शहर बिल्डरों के लिए छोड़ दिया गया। 2004 के बाद बीडीए ने रामगंगा नगर में बमुश्किल दो हजार मकान बनाकर बेेचे। दूसरी ओर बिल्डर 80 वैध और 200 अवैध कालोनियां बसाकर लगभग एक लाख मकान बेच चुके हैं। पीलीभीत बाईपास, शाहजहांपुर रोड, बदायूं रोड, नैनीताल रोड और दिल्ली रोड पर सस्ती जमीन खरीदकर बिल्डरों ने महंगे दामों पर फ्लैट बेचे और करोड़पति बन गए जबकि बीडीए कंगाल होता गया।
विज्ञापन


आवास विकास भी दो दशक से नकारेपन पर आमादा 
बीस साल पहले आवास विकास परिषद ने सिविल लाइंस की आवास विकास कालोनी, राजेंद्र नगर, इंदिरा नगर, जनकपुरी, गांधी नगर कालोनियां बसाईं। यह  शहर की पॉश कालोनियों में गिनी जाती हैं। इन कालोनियों में लोगों ने उस समय 50 हजार से लेकर एक लाख रुपये चुकाकर मकान खरीद लिए। अब उनकी कीमत 50 लाख से लेकर एक करोड़ तक है। 2007 में आवास विकास ने पीलीभीत बाईपास पर योजना नंबर सात कालोनी बसाई जो ठोस प्लानिंग न होने चलते फ्लाप रही। इसके बाद आवास विकास परिषद भी नकारेपन पर आमादा हो गया। परिषद ने दो दशक में दिल्ली हाईवे पर सात गांवों की 512 हेक्टेअर जमीन पर 50 हजार आवासों की कालोनी बनाने का प्लान तैयार किया। जमीन अधिग्रहण के लिए दो साल तक किसानों की रजिस्ट्री पर रोक लगा दी। बाद में यह प्रोजेक्ट स्थगित कर दिया। अब किसान आंदोलन को मजबूर हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed