फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Bareilly got recognition of industrial city know about history of bareilly

बरेली... जिसने मुड़कर नहीं देखा: 1919 में महज एक इंडस्ट्री से हुई थी शुरुआत, आज करीब 150 औद्योगिक इकाइयां

Mon, 13 Feb 2023 05:11 PM IST
मुकेश कुमार राहुल दुबे, बरेली
राहुल दुबे, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 13 Feb 2023 05:11 PM IST
सार

इन्वेटर्स समिट में 18 हजार करोड़ का निवेश आने से बरेली की औद्योगिक पहचान और मजबूत होगी। इस खास रिपोर्ट के जरिये हम आपको बीते सौ साल में शहर के औद्योगिक सफर से अवगत करा रहे हैं। 

विज्ञापन
Bareilly got recognition of industrial city know about history of bareilly
बरेली का झुमका, रबर फैक्टरी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बरेली को पहाड़ों का प्रवेश द्वार कहा जाता है। यहां की औद्योगिक पृष्ठभूमि भी काफी समृद्ध रही है। जरी-जरदोजी और फर्नीचर जैसे पारंपरिक उद्योगों के अलावा 1794 में हाशमी परिवार ने सुरमा का उत्पादन शुरू किया। सौ साल पहले शहर ने उद्योगों की ओर कदम बढ़ाया। यहां के खाद्य पदार्थ, तेल, मेंथा, प्लाईवुड समेत तमाम उत्पादों ने देश-विदेश में अपनी पहचान बनाई।

विज्ञापन


रेल पटरियां बिछीं तो यहां के उद्योगों को रफ्तार मिली। परसाखेड़ा, भोजीपुरा और रजऊ औद्योगिक क्षेत्रों में 150 छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां चल रही हैं। इधर, इन्वेटर्स समिट में 18 हजार करोड़ का निवेश आने से शहर की औद्योगिक पहचान और मजबूत होगी। इस रिपोर्ट के जरिये हम आपको बीते सौ साल में शहर के औद्योगिक सफर से अवगत करा रहे हैं। पढ़िए राहुल दुबे की खास रिपोर्ट... 
विज्ञापन


1820 में बरेली के तत्कालीन मजिस्ट्रेट ग्लिन ने गुलाम याह्या को यहां के कारीगरों, निर्माण और उत्पादन के साधन, उनकी पोशाक और शिष्टाचार के बारे में लिखने के लिए कहा था। याह्या के शोध के अनुसार यहां के लोग कांच और लाख की चूड़ियों का निर्माण, चारपाइयां बुनने, सोने-चांदी के धागों के निर्माण से जुड़े थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

Bareilly got recognition of industrial city know about history of bareilly
बरेली जंक्शन - फोटो : अमर उजाला

रेल कनेक्टिविटी के बाद पकड़ी रफ्तार 

आईआईए के पूर्व चेयरमैन नीरज गोयल बताते हैं कि रेल कनेक्टिविटी के बाद शहर के उद्योगों ने रफ्तार पकड़ी। शहर में नेशनल ब्रेवरी कंपनी, माचिस की फैक्टरी, एक बर्फ की फैक्टरी और एक भाप चालित आटा चक्की की स्थापना हुई। 1919 में इज्जतनगर में इंडियन वुड प्रोडक्ट्स लिमिटेड की स्थापना हुई, जहां बड़े स्तर पर कत्था निकाला जाता था।

वर्ष 1924 में सीबीगंज में इंडियन टरपेंटाइन एंड रोजिन (आईटीआर) फैक्टरी की स्थापना हुई। 1938 में वेस्टर्न इंडियन मैच कंपनी (विमको) स्थापित हुई। यहां की बनी माचिस पूरे देश में भेजी जाती थी। नेकपुर में 1932 में एचआर शुगर फैक्ट्री की स्थापना हुई। 1940 तक बरेली ने अपनी औद्योगिक पहचान पुख्ता कर ली थी। पूरे देश से लोग यहां रोजगार के लिए आने लगे।

1960 में फतेहगंज पश्चिमी में रबर फैक्टरी लगी। इसके उत्पाद पूरे एशिया में प्रसिद्ध थे। दो हजार लोग इस फैक्टरी से जुड़े थे। लंबे समय तक यह फैक्टरी बरेली की शान रही। इसके बाद यहां पुराने उद्योग अलग-अलग कारणों से दम तोड़ते रहे, लेकिन तब तक परसाखेड़ा इंडस्टि्रयल एरिया विकसित हो चुका था। पुराने उद्योग बंद हुए तो नए उद्योगों ने शहर की पुरानी पहचान को कायम रखा।

Bareilly got recognition of industrial city know about history of bareilly
रबर फैक्टरी - फोटो : अमर उजाला

1956 में औद्योगिक क्षेत्र बना तो उद्यमों को मिली रफ्तार

भोजीपुरा इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय शुक्ला बताते हैं कि राज्य सरकार ने वर्ष 1956 में सीबीगंज औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना की थी। कई एकड़ क्षेत्र में फैले इस इंडस्ट्रियल एरिया में 30 उद्योग लगे हैं। वर्ष 2004 में इसे नगर निगम के हवाले कर दिया गया। यूपी स्टेट इंडस्टि्रयल डेवलपमेंट काॅरपोरेशन ने वर्ष 1960 में 275 एकड़ क्षेत्र में परसाखेड़ा औद्योगिक एरिया की स्थापना की।

यह बरेली का सबसे बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है। इसमें खाद्य तेल, डिस्टिलरी, कन्फेक्शनरी, कोल्ड ड्रिंक, आइसक्रीम, प्लॉईवुड समेत कई इकाइयां स्थापित हैं। यूपीएसआइडीसी ने ही वर्ष 1964 में भोजीपुरा औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना की थी। मौजूदा समय में यहां 52 इकाइयां चल रही हैं। रजऊ क्षेत्र में भी 55 छोटी-बड़ी यूनिट चल रही हैं।

ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी बढ़ी तो तेजी से हुआ विकास

आईआईए के चैप्टर चेयरमैन तनुज भसीन कहते हैं कि बरेली के औद्योगिक विकास में ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी का काफी योगदान रहा। दिल्ली और लखनऊ दोनों से बरेली की दूरी लगभग 250 किमी है। यहां नॉर्दर्न रेलवे और एनई रेलवे दोनों का जंक्शन है। 150 ट्रेनें रोज गुजरती हैं। पुराने बस अड्डे पर दबाव बढ़ा तो सेटेलाइट बस अड्डे की शुरुआत हुई।

दिल्ली, कानपुर, मेरठ और उत्तराखंड के शहरों के लिए हर 20-30 मिनट पर बसें और हर घंटे दिल्ली के लिए ट्रेन उपलब्ध हैं। यहां से देश और प्रदेश दोनों की राजधानी तक पहुंचने में 4-6 घंटे लगते हैं। व्यापारिक गतिविधियों के लिए ये परिस्थितियां मुफीद साबित हुईं। बाहरी लोगों के लिए भी बरेली में आना सुविधाजनक रहा। हुलासनगरा ओवरब्रिज शुरू होने के बाद लखनऊ का सफर भी आसान हुआ।

रतनदीप-बटलर से शुरू हुआ कांप्लेक्स कल्चर

तीन दशक पहले तक बरेली का मुख्य बाजार कुतुबखाना और सिविल लाइंस के इर्द-गिर्द ही सिमटा हुआ था। उस समय यहां काॅम्प्लेक्स कल्चर भी नहीं था। चौकी चौराहा के पास रतनदीप और बटलर प्लाजा ही हुआ करते थे। उदारीकरण के बाद बाजार ने तेजी से पांव पसारा तो बरेली में कांप्लेक्स कल्चर का भी विकास हुआ। इस वक्त शहर में 125 से अधिक व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स हैं।

हवाई सेवा ने बदली तस्वीर

दो साल पहले बरेली से हवाई सेवा की शुरूआत हुई। दिल्ली के बाद बंगलूरू और मुंबई की उड़ान शुरू हुई तो शहर में पांच सितारा होटल भी आ गए। चिकित्सा के क्षेत्र में संभावनाओं के द्वार खुले। बंगलूरू की उड़ान मिलने के बाद आईटी सेक्टर में भी बरेली ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

बॉलीवुड के गीतों से सशक्त हुई पहचान

सुरमा बरेली वाला..., झुमका गिरा रे बरेली के बाजार में... जैसे बॉलीवुड गानों से देश-विदेश में शहर की पहचान और सशक्त हुई। 1794 में सुरमा उत्पादन शुरू करने वाले हकीम मोहम्मद हाशम के परिवार की छठवीं पीढ़ी आज भी इस कारोबार को आगे बढ़ा रही है। शाबेज हाशमी बताते हैं कि आंखों को खूबसूरत बनाने के साथ सुरमा उनका ख्याल भी रखता है।

सुरमा बनाने के लिए सऊदी अरब से पत्थर आता है। मुंबई और दिल्ली के कुछ कारोबारियों के पास ही इसे मंगवाने का लाइसेंस है। बरेली के उत्पादक दिल्ली-मुंबई से ही इस चमकीले पत्थर को खरीदते हैं। इसे छह माह गुलाब जल में और फिर छह माह सौंफ के पानी में डुबोकर रखा जाता है। सूखने के बाद इसकी घिसाई कर उसमें सोना, चांदी, बादाम का अर्क आदि मिलाया जाता है।

विदेश तक भेजे जा रहे बांस-बेत के उत्पादपुराना शहर से लेकर पदारथपुर, ठिरिया, उड़ला जागीर, आलमपुर, गरगटा आदि गांवों में बांस के उत्पाद बनाने का काम पीढ़ियों से हो रहा है। पदारथपुर में साइकिल के आगे लगने वाली बांस की टोकरी भी खूब बनाई जाती थी। 90 फीसदी बास्केट केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु आदि प्रदेशों को भेजी जाती थी। अब यह काम लगभग बंद हो चुका है। अब बांस-बेत की कुर्सियां, झूले, सोफा सेट समेत अन्य फर्नीचर देश-विदेश तक भेजे जा रहे हैं।

Bareilly got recognition of industrial city know about history of bareilly
बीडीए का प्रस्तावित मॉडल - फोटो : अमर उजाला

बीडीए ने बढ़ाया शहर का दायरा

पिछले डेढ़ साल में बीडीए ने रामगंगा नगर आवासीय योजना के जरिये शहर का दायरा बढ़ाया। तीन हजार से अधिक आवासीय और व्यावसायिक प्लॉटों की बिक्री हुई। बीडीए का कार्यालय भी रामगंगा नगर पहुंच गया। अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक का मुख्य कार्यालय और एलआईसी के कार्यालय समेत कुछ और अन्य इकाइयों पर काम शुरू हुआ। बीडीए वीसी जोगिंदर सिंह ने बताया कि इन्वेस्टर्स समिट में बीडीए रामगंगा नगर में 2300 करोड़ का निवेश ले आया है।

इसमें 325 करोड़ से मेडिकल कॉलेज और 84 करोड़ से होटल तैयार होंगे। 1500 करोड़ से अधिक हाउसिंग कॉलोनी पर खर्च किया जाएगा। 150 व्यावसायिक भूखंड भी होंगे। इस निवेश से कई हजार लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा।

प्रस्तावित ग्रेटर बरेली कॉलोनी में सिनेमा हाल, तरणताल, पार्क, उच्चस्तरीय सुविधाओं वाला अस्पताल, खेल मैदान और रुहेलखंड के इतिहास को जीवंत रखने के लिए संग्रहालय भी बनाया जाएगा। सॉफ्टवेयर कंपनियों के लिए साइबर सिटी, तकनीकी और शोध संस्थान, होटल, मल्टीप्लेक्स के लिए भूखंड आवंटित किए जा रहे हैं।

इफको के आने की कहानी भी दिलचस्प

1980 के करीब केंद्र सरकार ने देश में दस गैसबेस प्लांट लगाने की घोषणा की, फिर उनकी संख्या घटकर छह हो गई। इसी दौरान जनप्रतिनिधियों ने आंवला की जमीन का सुझाव दिया। दिल्ली से टीम जांच करने आई, मगर उसने यह जमीन निरस्त कर दी। इसके बाद कैंफर फैक्टरी के निदेशक एमपी सिंह, पूर्व सांसद राजवीर सिंह, जयदीप सिंह बरार और राकेश मथुरिया ने तत्कालीन केंद्रीय मंत्री एनडी तिवारी से मुलाकात कर कहा कि जमीन ठीक है, आप प्रयास कीजिए।

एनडी तिवारी ने कहा कि आप राज्य सरकार से जमीन के दोबारा सर्वे के लिए अनुरोध कराएं, बाकी हम देख लेंगे। इसके बाद पूर्व सांसद राजवीर सिंह, जयदीप सिंह बरार और राकेश मथुरिया तीन दिन लखनऊ में रुके। सर्वे ज्ञापन तैयार कराकर विधानसभा से निकलने वाले सभी विधायकों से हस्ताक्षर मांगने लगे। 127 विधायकों ने ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

भोजीपुरा से विधायक और तत्कालीन कृषि मंत्री भानु प्रताप सिंह ने दोबारा सर्वे कराने का प्रस्ताव कैबिनेट के समक्ष रखा। टीम दोबारा सर्वे करने आई। एनडी तिवारी सीधे मॉनीटिरिंग कर रहे थे तो जमीन पास कर दी गई। इसके बाद आंवला वन में 700 करोड़ और आंवला टू में 900 करोड़ की लागत से इफको की स्थापना हुई।

ये बड़ी फैक्टरियां हुईं बंद

- इंडियन टरपेंटाइन एंड रोजिन (आइटीआर) फैक्टरी में तारपीन का तेल, बिरोजा आदि का उत्पादन होता था। अप्रैल 1998 में फैक्टरी बंद हो गई।
- फतेहगंज पश्चिमी स्थित रबर फैक्टरी के उत्पाद पूरे एशिया में प्रसिद्ध थे। 15 जुलाई 1999 में फैक्टरी बंद हो गई।
- उप्र शुगर कॉरपोरेशन के अधीन नेकपुर की शुगर मिल को वर्ष 1996 में लक्ष्य से अधिक उत्पादन के लिए गोल्ड मेडल मिला था। सितंबर 1998 में मिल बंद हो गई।
- सीबीगंज स्थित विमको फैक्टरी में माचिस का उत्पादन होता था। वर्ष 2014 में फैक्टरी बंद हो गई।
- बहेड़ी की यूपी सहकारी कताई मिल को भी अगस्त 2010 में बंद कर दिया गया।

ब्लिस हाउसिंग सोसायटी के एमडी अजय शर्मा 1500 करोड़ के निवेश से बरेली में टाउनशिप विकसित कर रहे हैं। बताया कि इस टाउनशिप में सभी सुविधाएं होंगी। टाउनशिप निर्माण के दौरान और उसके बाद भी सैकड़ों लोगों को रोजगार मिलेगा। इन्वेस्टर्स समिट के जरिये प्रोजेक्ट को तेजी से स्वीकृति मिल सकी। लखनऊ-दिल्ली के मध्य स्थित बरेली में रियल एस्टेट सेक्टर में काफी संभावनाएं हैं।

आंवला में स्थापित होंगे दो प्लांट 

इफको आंवला में 638 करोड़ रुपये से नैनो फर्टिलाइजर के दो प्लांट स्थापित होंगे। स्टेट मार्केटिंग मैनेजर अभिमन्यु राय ने बताया कि नैनो टेक्नोलॉजी के जरिये उत्पादित आधा लीटर नैनो फर्टिलाइजर में एक बोरी यूरिया की क्षमता होगी। यूरिया का प्रयोग करने से जमीन, हवा और पानी तीनों प्रदूषित होते हैं। 60 फीसदी यूरिया बर्बादी होती है। नैनो तकनीकी सुरक्षित है। इससे किसानों को फायदा मिलेगा।

धामपुर बायो ऑर्गेनिक लिमिटेड की ओर से मीरगंज में एथनॉल डिस्टिलरी समेत शुगर फैक्टरी के विस्तार पर 460 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव आया है। निवेशक रूपेश गोयल ने बताया कि बरेली में पहले से ही कई डिस्टिलरी और एथनॉल फैक्टरियां हैं। उन्होंने मीरगंज में नए प्लांट लगने और फैक्टरी के विस्तार से रोजगार के साथ ही खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में विकास होने की संभावना जताई है।

होटल इंडस्ट्री भी भरेगी रफ्तार 

बरेली में अंतरराष्ट्रीय स्तर के होटल और उसमें सेवा मुहैया कराने के लिए आरएमएस होटल एंड रिसॉर्ट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के एमडी मेहताब सिद्दीकी ने 460 करोड़ के निवेश प्रस्ताव दिया है। होटल परिसर में वेलनेस सेंटर, जिम, रेस्त्रां, हॉस्पिटल, शॉपिंग काॅम्पलेक्स, सौ गेस्ट रूम और बैंक्वेट हॉल आदि बनेंगे। उन्होंने इन्वेस्टर्स समिट के जरिये बरेली में पर्यटन को बड़े पैमाने पर बढ़ावा मिलने की बात कही।

श्री राममूर्ति स्मारक ट्रस्ट की ओर से इन्वेस्टर्स समिट में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विकास के लिए करीब 275 करोड़ के निवेश का प्रस्ताव सौंपा गया है। ट्रस्ट के डायरेक्टर एडमिनिस्ट्रेशन आदित्य मूर्ति ने बताया कि कॉलेज में लगभग सभी तरह का इलाज मुहैया कराया जा रहा है। सेवा विस्तार के तहत शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को और आधुनिक बनाया जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed