UP Board Result: मंडल में बरेली की छात्राओं ने मारा मैदान, हाईस्कूल टॉप टेन में पांच और इंटर में 11 बेटियां
यूपी बोर्ड परीक्षा में इस बार बरेली मंडल की बेटियों ने अपनी मेधा की चमक बिखेरी। हाईस्कूल टॉप टेन में पांच बेटियां आई हैं तो इंटरमीडिएट में 11 बेटियों ने परचम लहराया है।
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बरेली की बेटियों ने मंडल में दम दिखाया है। जिसकी बदौलत हाईस्कूल टॉप टेन में पांच बेटियां आई हैं तो इंटरमीडिएट में 11 बेटियों ने परचम लहराया है। मंडल के बरेली जनपद में बेटियों ने शानदार प्रदर्शन किया। हाईस्कूल टॉप टेन में पहले, छठे, सातवें, आठवें और 10वें स्थान पर बेटियां रहीं तो इंटरमीडिएट टॉप टेन में आठ स्थानों तक बेटियां छाई रहीं। इसमें एक से चार तक एक, पांच पर दो, छह और सात पर एक और 10वें स्थान पर तीन बेटियां रहीं।
बदायूं में हाईस्कूल टॉप टेन में नौ बेटियां रहीं। जिसमें दूसरे व चौथे पर एक-एक, पांचवें पर दो, छठे, आठ और नौ पर एक-एक तो 10वें स्थान पर दो बेटियों का कब्जा रहा। इंटरमीडिएट टॉप टेन में पहले, पांचवें, छठे, सातवें, नौवें स्थान पर उन्होंने कब्जा जमाया।
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शाहजहांपुर में हाईस्कूल के टॉप टेन में तीसरे, चौथे, छठे और 10वें स्थान पर बेटियों का कब्जा रहा तो इंटर के टॉप टेन में सात बेटियां रहीं। जिसमें दूसरे, तीसरे, छठे, सातवें, नौवें स्थान पर एक-एक तो 10वें स्थान पर दो बेटियां रहीं।
पीलीभीत में हाईस्कूल टॉप टेन में तीन बेटियां रहीं। उन्होंने दूसरे, छठे और 10वें स्थान पर कब्जा किया तो इंटरमीडिएट टॉप टेन में दो बेटियां रहीं। उन्होंने तीसरे और सातवें स्थान पर कब्जा किया।
टॉपर सूची में कमजोर, परिणाम सुधारने में सफल रहे सरकारी स्कूल
यूपी बोर्ड की ओर से शुक्रवार को जारी किए गए परिणामों ने जिले के सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था में सुधार पर ध्यान दिए जाने की जरूरत फिर बता दी। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट दोनों की टॉपर सूची में प्रमुख सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थी नदारद हैं। यह स्थिति तब है जब सरकार की ओर से लाखों रुपये खर्च कर किए जा रहे हैं। हालांकि, 80 फीसदी की सफलता दर और बच्चों के 85 फीसदी के करीब प्राप्तांक ने इन संस्थाओं के महत्व को जरूर दिखाया है।
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हाईस्कूल की टॉप 10 सूची में जहां निजी स्कूलों के नौ विद्यार्थी शामिल हैं, वहीं सरकारी विद्यालय का केवल एक विद्यार्थी जगह बना सका। इंटरमीडिएट की स्थिति भी कुछ ऐसी ही रही, जिसमें टॉप 13 विद्यार्थियों में से सिर्फ एक सरकारी स्कूल का है। यह ट्रेंड लगातार चिंता बढ़ा रहा है कि सरकारी स्कूलों से मेधावी छात्र कम निकल रहे हैं। इसके विपरीत, निजी स्कूल, जिनकी शिक्षा महंगी है, लगातार बेहतर परिणाम दे रहे हैं।
यह स्पष्ट रूप से सरकारी और निजी स्कूलों की शिक्षा गुणवत्ता के बीच एक बड़े अंतर को दर्शाता है। शिक्षाविदों का मानना है कि सरकारी स्कूलों में संसाधनों और शिक्षकों की उपलब्धता के साथ-साथ शिक्षा के स्तर पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि वे निजी स्कूलों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकें और बेहतर परिणाम दे सकें।