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कोर्ट का फैसला: दुष्कर्म का झूठा आरोप लगाने वाली युवती को 1653 दिन की सजा, इतने ही दिन जेल में रहा था युवक

Sun, 05 May 2024 04:54 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 05 May 2024 04:54 AM IST
सार

Bareilly News: उत्तर प्रदेश के बरेली में चार साल, छह माह, आठ दिन यानी 1,653 दिनों की कैद की सजा के साथ 5,88,822 रुपये अर्थदंड भी लगाया है। कोर्ट ने युवती को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया। 

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Bareilly: girl denied allegation of misdeed, now she will have to be in jail
Demo Pic - फोटो : ANI

विस्तार

बरेली में दुष्कर्म के मुकदमे में गवाही के दौरान बयान से मुकरने पर कोर्ट ने युवती को उतने ही दिन कैद की सजा सुनाई, जितने दिन आरोपी जेल में रहा था। चार साल, छह माह, आठ दिन यानी 1,653 दिनों की कैद की सजा के साथ 5,88,822 रुपये अर्थदंड भी लगाया है। युवती को कोर्ट ने न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया। 

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कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा, इस तरह की महिलाओं के कृत्य से वास्तविक पीड़िताओं को नुकसान उठाना पड़ता है। दुर्गानगर की महिला ने दो सितंबर, 2019 को बारादरी थाने में अजय नामक युवक पर बेटी के अपहरण व दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने अजय को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। युवती ने अजय पर नशीला प्रसाद खिलाने और दिल्ली ले जाकर कमरे में बंद कर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। लेकिन, अदालत में गवाही के दौरान युवती मुकर गई। अदालत ने अजय को दोषमुक्त करार दिया, वहीं झूठी गवाही देने के लिए युवती पर मुकदमा चलाया। अपर सत्र न्यायाधीश ज्ञानेंद्र त्रिपाठी की अदालत ने उसे दोषी पाते हुए सजा सुनाई। 

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पुरुषों के हितों पर आघात की छूट नहीं दी जा सकती
अदालत ने कहा कि यह समाज के लिए बेहद गंभीर स्थिति है। अपने मकसद की पूर्ति के लिए पुलिस व कोर्ट को माध्यम बनाना आपत्तिजनक है। अनुचित लाभ के लिए महिलाओं को पुरुषों के हितों पर आघात करने की छूट नहीं दी जा सकती। यह मुकदमा उन महिलाओं के लिए नजीर बनेगा, जो पुरुषों से वसूली के लिए झूठे मुकदमे लिखाती हैं।

इसलिए लगाया अर्थदंड
अदालत ने युवती पर अर्थदंड भी लगाया है, जो न्यूनतम पारिश्रमिक दर के आधार पर तय किया गया। अदालत ने माना कि अजय ने जितने दिन जेल में बिताए, इतने दिन अगर वह मजदूरी करता तो कम से कम 5,88,822.47 रुपये कमा लेता। युवती से इतना जुर्माना वसूलकर अजय को दिया जाएगा। युवती जुर्माना नहीं दे पाती है तो उसे छह माह अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

आईपीसी की धारा 195 के तहत दर्ज हुआ परिवाद
बयानों से मुकरने के बाद अदालत में युवती के खिलाफ भारतीय दंड संहिता 195 के तहत परिवाद दर्ज किया गया था। सहायक शासकीय अधिवक्ता सुनील कुमार पांडेय ने बताया कि ऐसा मामला जिसमें आजीवन कारावास या सात साल से ज्यादा अवधि के कारावास की सजा हो, इसके लिए मिथ्या साक्ष्य देने व गढ़ने के संबंध में परिवाद दर्ज करने का प्रावधान है।
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अदालतों में दुष्कर्म के करीब पांच हजार मुकदमे
बरेली जिले में पिछले कुछ वर्षों में दुष्कर्म के मुकदमों की संख्या में इजाफा हुआ है। एक अनुमान के तहत अदालतों में दुष्कर्म के करीब पांच हजार मुकदमे चल रहे हैं। इनमें पॉक्सो एक्ट के मामले भी शामिल हैं। दुष्कर्म के आरोप में जमानत मिलना बहुत मुश्किल होता है। ऐसे में आरोपी लंबे समय तक जेल में रहता है। पुलिस, डॉक्टर, दोनों पक्षों के गवाहों को अदालत में बुलाकर बयान दर्ज कराए जाते हैं। मुकदमे में गवाही के दौरान पीड़िता के आरोपों से मुकरने पर सबकी मेहनत बेकार हो जाती है। ऐसे मामलों में अब अदालतों ने सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है।
 
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