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बरेली जिला अस्पताल: मरीजों के इलाज की कम, नई बीमारी की पूरी गारंटी देता है यहां का पानी

Sun, 10 Jul 2022 02:22 PM IST
प्राची प्रियम अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली Published by: प्राची प्रियम Updated Sun, 10 Jul 2022 02:22 PM IST
सार

जिला अस्पताल में पानी की सप्लाई करने वाले टैंक की हालत इतनी बुरी है कि कीचड़ की तरह काले हो चुके पानी की सतह पर मरे पड़े कीड़े और गंदगी ऊपर से ही दिखती है। कई सालों से खुले पड़े इस टैंक की सफाई भी जाने कबसे नहीं हुई है।

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bareilly district hospital faces water crisis with old and dirty tank containing harmful water
बरेली जिला अस्पताल का पानी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बरेली स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं पर कितना भरोसा किया जा सकता है, यह जिला अस्पताल में पानी की सप्लाई करने वाले टैंक की हालत देखकर आसानी से तय किया जा सकता है। कई सालों से खुले पड़े इस टैंक की सफाई भी जाने कबसे नहीं हुई है। कीचड़ की तरह काले हो चुके पानी की सतह पर मरे पड़े कीड़े और गंदगी ऊपर से ही दिखती है। वार्डों से लेकर ओपीडी तक मरीज और तीमारदार यही पानी इस्तेमाल कर रहे हैं।
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पूरे जिला अस्पताल में जिस टैंक से पानी की सप्लाई की जा रही है, वह महिला अस्पताल परिसर में स्थित है। हाल के ही सालों में जिला अस्पताल में न जाने कितने अफसरों और मंत्रियों का दौरा हुआ लेकिन सारे के सारे अस्पताल केरास्तों में पड़े चूने और बेडों पर बिछी नई चादरों को देखने के बाद सारी व्यवस्थाएं दुरुस्त मानकर लौट गए। पानी जैसी जरूरी चीज पर स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों की अनदेखी पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
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बेकार पड़ा है सालों पहले बना नया टैंक, तली में इकट्ठा हो गया कचरा
जिला अस्पताल में इमरजेंसी वार्ड के पास कुछ साल पहले नए टैंक का निर्माण कराया गया था जो इस्तेमाल ही नहीं किया गया। खुला रहने की वजह से सूखे पड़े इस टैंक में भी कचरा जमा हो गया है। महिला अस्पताल परिसर में बने एक और टैंक में पानी भरा हुआ है लेकिन यह टैंक काफी जर्जर हो चुका है।
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सीढ़ियां टूटी होने की वजह से टैंक की सफाई के लिए ऊपर चढ़ना भी मुश्किल है। जिला अस्पताल में इमरजेंसी के पास बने नए टैंक का इस्तेमाल न होने की वजह से महिला अस्पताल के टैंकों से ही पूरे अस्पताल में पानी की सप्लाई की जा रही है।

मरीजों की शिकायत- नहाने से शरीर पर हो जाती है खुजली और दाने, डॉक्टर कहते हैं- दवा दे सकते हैं, टैंक नहीं बदल सकते
इमरजेंसी के पास ही रैन बसेरे में भर्ती मरीजों के तीमारदार रहतेे हैं। यहां मिले ओमकार ने बताया कि वह 28 जून से जिला अस्पताल में है। यहां भर्ती उनकी मां के पित्ताशय में पथरी है। उन्होंने कहा कि टंकी में जो पानी आता है, उससे वे सिर्फ नहाते और कपड़े धोते हैं। पहले ही दिन यहां नहाने के बाद उनके शरीर पर दाने निकल आए थे। पानी खराब होने का अंदाजा नहीं था, लिहाजा इसके बाद भी नहाते रहे।

 

अब उनके पूरे शरीर में खुजली शुरू हो गई है। जिस्म दानों से भर गया है। ओमकार ने बताया कि सिर्फ उन्हें नहीं, कई और लोगों को खुजली और दानों की दिक्कत है। कई लोग अस्पताल से ही दवा ले रहे हैं। डॉक्टर को परेशानी भी बताई है लेकिन डॉक्टर का कहना है कि वह दवा तो दे सकते हैं, पानी का टैंक नहीं बदल सकते। महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. अलका यादव से इस मुद्दे पर बात करने के लिए उन्हें कई बार फोन किया, लेकिन उन्होंने फोन ही नहीं रिसीव किया।

महाप्रबंधक जलकल विभाग आरके यादव ने कहा कि जिला और महिला अस्पताल में पानी के टैंक सफाई की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की ही है। जलकल विभाग से इसका कोई मतलब नहीं है। सीएमओ डॉ. बलवीर सिंह ने कहा कि पानी के टैंक की सफाई कराना सीएमओ की जिम्मेदारी में नहीं आता। जिला अस्पताल में जो भी सीएमएस होता है, उसी की जिम्मेदारियों में यह शामिल होता है।
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