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बरेली के 70 फीसदी ई-टिकट काउंटर फर्जी
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Mon, 07 Nov 2016 12:55 AM IST
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Irctc
- फोटो : GettyImages
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रेलवे में ई-टिकट के फर्जीवाड़े का बड़ा गोरखधंधा सामने आया है। बरेली में फर्जी ट्रेवल एजेंट प्रदीप सूरी के पकड़े जाने पर पता चला है कि ई-टिकट के नाम पर ठगीकरने वाले जालसाजों का नेटवर्क समूचे देश में फैला है। ये ठग अपनी दुकानों पर निजी रेलवे आरक्षण केंद्र का फर्जी बोर्ड लगाकर निजी ई-मेल आईडी से ई-टिकट बनाकर बेचते हैं। बाद में उसी ई-टिकट को कैंसिल कराकर ग्राहक को चूना लगा देते हैं।
इंडियन रेल कैटरिंग एंड टिकट कारपोरेशन (आईआरसीटीसी) के माध्यम से रेलवे ने समूचे देश में ई-टिकट काउंटर खोल रखे हैं। ई-टिकट काउंटर संचालक एजेंट कहलाते हैं, जिन्हें आईआरसीटीसी की ओर से बाकायदा लाइसेंस दिया जाता है, जिस पर वैधता तिथि दर्ज रहती है। इन एजेंटों को टिकट बेचने का कमीशन मिलता है। इनसे ई-टिकट बनवाने पर किराए की राशि एजेंट के वैलेट से कटती है। बरेली जिले में आईआरसीटीसी के सिर्फ 65 अधिकृत एजेंट हैं। अधिकृत एजेंटों की आड़ में तमाम लोगों ने फर्जी तरीके से ई-टिकट बनाकर बेचने का अवैध धंधा शुरू कर दिया है। फर्जी एजेंटों से ई-टिकट बुक कराने पर किराए की राशि उसी के निजी एकाउंट से कटती है। ग्राहक से किराए की रकम नगद ले ली जाती है। तमाम फर्जी एजेंट ई-टिकट में गोलमाल करने लगे हैं। एक तो ई-टिकट कन्फर्म न होने पर खुद व खुद निरस्त हो जाता है। दूसरे जालसाजी करने वाले खुद ई-टिकट कैंसिल करा देते हैं। इन दोनों ही सूरत में किराए की राशि फर्जी एजेंट के एकाउंट में वापस पहुंच जाती है। खास बात यह कि ई-टिकट बुक कराने के समय फर्जी एजेंट ग्राहक के बजाय अपना मोबाइल नंबर दर्ज करते हैं। इससे ई-टिकट कैंसिल होने पर ग्राहक के पास एसएमएस नहीं पहुंचता।
निजी ई-मेल आईडी से महीने में केवल छह ई-टिकट ही बनाए जा सकते है। फर्जी एजेंट अलग-अलग नामों से कई ई-मेल आईडी बना लेते हैं, जिनसे रेलवे के ई-टिकट बनाते रहते हैं। सूत्रों की मानें तो पूर्वोत्तर रेलवे इज्जतनगर मंडल में ढाई सौ फर्जी काउंटर हैं। टिकट कैंसिल होने पर यात्रा के दौरान यात्री को किराए के साथ जुर्माना भी देना पड़ता है। बरेली स्थित हार्टमैन कॉलेज के 11 विद्यार्थियों के ई-टिकट कैंसिल होने के बाद पहली बार इस मामले का फर्जीवाड़ा सामने आया। आरपीएफ प्रदीप सूरी के खिलाफ दर्ज मुकदमे की तफ्तीश कर रही है। वहीं आरपीएफ की सीआईबी और आईआरसीटीसी फर्जी एजेंटों की तलाश में जुट गई है।
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आईआरसीटीसी का अधिकृत एजेंट नहीं था प्रदीप सूरी
छानबीन में पता चला है कि ई-टिकट फर्जीवाड़े में जेल गया प्रदीप सूरी आईआरसीटीसी का अधिकृत एजेंट नहीं था। उसने अलग -अलग नामों से करीब तीन दर्जन ई-मेल आईडी बना रखी थीं। वह इन्हीं ई-मेल आईडी से पहले ई-टिकट बुक कराता था। ग्राहक से किराए की रकम नकद लेकर बाद में (यात्रा से पहले) ई-टिकट कैंसिल करा देता था। उसने हार्टमैन कॉलेज के 11 विद्यार्थियों के काठगोदाम-लखनऊ एक्सप्रेस में बुक कराए ई-टिकट कैंसिल कर दिए थे। विद्यार्थियों के साथ यात्रा कर रहे उसी कॉलेज के शिक्षक संजीव श्रीवास्तव के टीटीई से बहस करने पर मामला पूर्वोत्तर रेलवे इज्जतनगर मंडल के सीनियर डीसीएम आरसी श्रीवास्तव के पास पहुंचा। उन्होंने मामला आरपीएफ कमांडेंट के हवाले कर दिया। सीआईबी की जांच के बाद ई-टिकट में फर्जीवाड़ा करने के आरोप प्रदीप सूरी को जेल भेज दिया गया।
अधिकृत एजेंट से लिया ई-टिकट
ई-टिकट पर नाम, पता, ई-मेल आईडी व फोन नंबर दर्ज रहता है। किराए की रकम के साथ आईआरसीटीसी का सर्विस चार्ज, पीजी चार्ज और एजेंट चार्ज लिखा होता है। ई-टिकट बुक करते समय फोन नंबर ग्राहक का लिखा जाता है। ई-टिकट का सारा विवरण एसएमएस के जरिए ग्राहक पर पहुंच जाता है।
फर्जी एजेंट ने बेचा ई-टिकट
एजेंट का नाम, पता, ई-मेल आईडी और फोन नंबर दर्ज नहीं होता। ई-टिकट पर कोई कमीशन नहीं लिखा होता है। फर्जी एजेंट ई-टिकट बुक करते समय फोन नंबर अपना दर्ज करते हैं, जिससे ई-टिकट कैंसिल होने की जानकारी यात्री को नहीं मिल पाती है। यह टिकट अधिकृत एजेंट की अपेक्षा कुछ सस्ता होता है।
मुकदमे की तफ्तीश शुरू कर दी है। प्रदीप सूरी पिछले एक साल से ई-टिकट बनाने का काम कर रहा था। आईआरसीटी का रिकार्ड देखा जाएगा अधिकृत एजेंट कितने हैं? ई-टिकट बनाने वाले फर्जी एजेंट और भी होने का पता चला है हैं, जिनके बारे में छानबीन की जा रही है। - घनश्याम पोहिया, एसआई आरपीएफ
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इंडियन रेल कैटरिंग एंड टिकट कारपोरेशन (आईआरसीटीसी) के माध्यम से रेलवे ने समूचे देश में ई-टिकट काउंटर खोल रखे हैं। ई-टिकट काउंटर संचालक एजेंट कहलाते हैं, जिन्हें आईआरसीटीसी की ओर से बाकायदा लाइसेंस दिया जाता है, जिस पर वैधता तिथि दर्ज रहती है। इन एजेंटों को टिकट बेचने का कमीशन मिलता है। इनसे ई-टिकट बनवाने पर किराए की राशि एजेंट के वैलेट से कटती है। बरेली जिले में आईआरसीटीसी के सिर्फ 65 अधिकृत एजेंट हैं। अधिकृत एजेंटों की आड़ में तमाम लोगों ने फर्जी तरीके से ई-टिकट बनाकर बेचने का अवैध धंधा शुरू कर दिया है। फर्जी एजेंटों से ई-टिकट बुक कराने पर किराए की राशि उसी के निजी एकाउंट से कटती है। ग्राहक से किराए की रकम नगद ले ली जाती है। तमाम फर्जी एजेंट ई-टिकट में गोलमाल करने लगे हैं। एक तो ई-टिकट कन्फर्म न होने पर खुद व खुद निरस्त हो जाता है। दूसरे जालसाजी करने वाले खुद ई-टिकट कैंसिल करा देते हैं। इन दोनों ही सूरत में किराए की राशि फर्जी एजेंट के एकाउंट में वापस पहुंच जाती है। खास बात यह कि ई-टिकट बुक कराने के समय फर्जी एजेंट ग्राहक के बजाय अपना मोबाइल नंबर दर्ज करते हैं। इससे ई-टिकट कैंसिल होने पर ग्राहक के पास एसएमएस नहीं पहुंचता।
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निजी ई-मेल आईडी से महीने में केवल छह ई-टिकट ही बनाए जा सकते है। फर्जी एजेंट अलग-अलग नामों से कई ई-मेल आईडी बना लेते हैं, जिनसे रेलवे के ई-टिकट बनाते रहते हैं। सूत्रों की मानें तो पूर्वोत्तर रेलवे इज्जतनगर मंडल में ढाई सौ फर्जी काउंटर हैं। टिकट कैंसिल होने पर यात्रा के दौरान यात्री को किराए के साथ जुर्माना भी देना पड़ता है। बरेली स्थित हार्टमैन कॉलेज के 11 विद्यार्थियों के ई-टिकट कैंसिल होने के बाद पहली बार इस मामले का फर्जीवाड़ा सामने आया। आरपीएफ प्रदीप सूरी के खिलाफ दर्ज मुकदमे की तफ्तीश कर रही है। वहीं आरपीएफ की सीआईबी और आईआरसीटीसी फर्जी एजेंटों की तलाश में जुट गई है।
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आईआरसीटीसी का अधिकृत एजेंट नहीं था प्रदीप सूरी
छानबीन में पता चला है कि ई-टिकट फर्जीवाड़े में जेल गया प्रदीप सूरी आईआरसीटीसी का अधिकृत एजेंट नहीं था। उसने अलग -अलग नामों से करीब तीन दर्जन ई-मेल आईडी बना रखी थीं। वह इन्हीं ई-मेल आईडी से पहले ई-टिकट बुक कराता था। ग्राहक से किराए की रकम नकद लेकर बाद में (यात्रा से पहले) ई-टिकट कैंसिल करा देता था। उसने हार्टमैन कॉलेज के 11 विद्यार्थियों के काठगोदाम-लखनऊ एक्सप्रेस में बुक कराए ई-टिकट कैंसिल कर दिए थे। विद्यार्थियों के साथ यात्रा कर रहे उसी कॉलेज के शिक्षक संजीव श्रीवास्तव के टीटीई से बहस करने पर मामला पूर्वोत्तर रेलवे इज्जतनगर मंडल के सीनियर डीसीएम आरसी श्रीवास्तव के पास पहुंचा। उन्होंने मामला आरपीएफ कमांडेंट के हवाले कर दिया। सीआईबी की जांच के बाद ई-टिकट में फर्जीवाड़ा करने के आरोप प्रदीप सूरी को जेल भेज दिया गया।
अधिकृत एजेंट से लिया ई-टिकट
ई-टिकट पर नाम, पता, ई-मेल आईडी व फोन नंबर दर्ज रहता है। किराए की रकम के साथ आईआरसीटीसी का सर्विस चार्ज, पीजी चार्ज और एजेंट चार्ज लिखा होता है। ई-टिकट बुक करते समय फोन नंबर ग्राहक का लिखा जाता है। ई-टिकट का सारा विवरण एसएमएस के जरिए ग्राहक पर पहुंच जाता है।
फर्जी एजेंट ने बेचा ई-टिकट
एजेंट का नाम, पता, ई-मेल आईडी और फोन नंबर दर्ज नहीं होता। ई-टिकट पर कोई कमीशन नहीं लिखा होता है। फर्जी एजेंट ई-टिकट बुक करते समय फोन नंबर अपना दर्ज करते हैं, जिससे ई-टिकट कैंसिल होने की जानकारी यात्री को नहीं मिल पाती है। यह टिकट अधिकृत एजेंट की अपेक्षा कुछ सस्ता होता है।
मुकदमे की तफ्तीश शुरू कर दी है। प्रदीप सूरी पिछले एक साल से ई-टिकट बनाने का काम कर रहा था। आईआरसीटी का रिकार्ड देखा जाएगा अधिकृत एजेंट कितने हैं? ई-टिकट बनाने वाले फर्जी एजेंट और भी होने का पता चला है हैं, जिनके बारे में छानबीन की जा रही है। - घनश्याम पोहिया, एसआई आरपीएफ