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एनपीए के बोझ से दब रहे छोटे कारोबारी 

Fri, 21 Sep 2018 05:13 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली Updated Fri, 21 Sep 2018 05:13 PM IST
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banks pressuring small businessmen over npa issue
loan
 बैंकों में एनपीए (नॉन परफार्मेंस असेट) का ग्राफ लगातार बढ़ने से उसके नीचे छोटे कर्जदार दब रहे हैं। लगातार बढ़ रहे घाटे के बीच बैंक मुद्रा स्कीम के तहत छोटे ग्राहकों को कर्ज देने से हाथ खड़ा कर रहे हैं। जिले में सरकारी और गैर सरकारी 427 बैंकों के करीब बीस लाख खातों में 12 से 15 प्रतिशत तक खातों का एनपीए होना बताया जा रहा है।  
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बैंक अधिकारियों का कहना है कि बड़े लोन की बात को अलग कर दें तो बैंकों को सबसे ज्यादा नुकसान केसीसी और मुद्रा स्कीम में झेलना पड़ रहा है। केसीसी में किसानों को हर साल केवल चार प्रतिशत पर लोन दिया जाता है। इसके अलावा मुद्रा योजना में सरकार की अपनी गारंटी पर छोटे कर्ज दिए जाते हैं। बैंक अफसरों की मानें तो इन दिनों ही स्कीमों में लक्ष्य पूरा करने का सबसे ज्यादा दबाव होता है। इसके लिए इन्हें कर्ज देने में काफी नरमी बरती जाती है। इसमें लोग कर्ज तो ले लेते हैं, लेकिन ऋण की वापसी नहीं हो पाती है। यही वजह है कि मुद्रा योजना में लंबित आवेदनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 
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इस साल केवल 36 करोड़ ही दिया मुद्रा ऋण 
पीएम मोदी की खास पहल के बावजूद मुद्रा योजना में इस साल बैंकों ने केवल 1663 लोगों को 36.46 करोड़ का ही कर्ज दिया है, जबकि स्कीम शुरू होने से अब तक 11285 लोगों को एक अरब 87 करोड़ से ज्यादा का लोन दिया जा चुका है। मुद्रा स्कीम में बैंक ऋण देने से किस तरह से कन्नी काट रही है इसका अंदाजा 2804 लोगों की पत्रावलियां बैंकों द्वारा निरस्त किए जाने से लगाया जा सकता है। बैंकों ने लंबित आवेदन केवल 80 बताए हैं।    
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केसीसी में बैंक अधिकारी करते हैं खेल 
एक बैंक अधिकारी ने बताया कि अकाउंट एनपीए होने पर कड़ी कार्रवाई होने लगी है। इसी से बचने के लिए ग्रामीण क्षेत्र के बैंकों में अधिकारी अब खेल करने लगे हैं। किसानों को दिए गए फसली ऋण को बैंक का अधिकारी किसान पर दबाव बनाकर एनपीए होने से पहले एक दिन के लिए समायोजित करा लेता है। इसके बाद अगले दिन वह उसे फिर से लोन कर देता है। हर साल ऋण में दस प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है। खाते को एनपीए होने से बचाने के लिए साल के अंत में पुराने एकाउंट को बंद कर नया एकाउंट दस प्रतिशत बढ़ाकर खोला जाता है और किसान को महज दस प्रतिशत बढ़ी रकम दे दी जाती है।
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