छात्र की मौत का मामला: यशपाल के साथ ही बुझ गया परिवार की उम्मीदों का चिराग, जमीन बेचकर पढ़ा रहे थे पिता
अयोध्या के आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के हॉस्टल में छात्र यशपाल का शव फंदे से लटका मिला था। वह शोध का छात्र था। बरेली निवासी छात्र के पिता ने बेटे की पढ़ाई के लिए जमीन तक बेच डाली थी। यशपाल की मौत के साथ उनकी उम्मीदों का चिराग भी बुझ गया है।
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अयोध्या के कृषि विश्वविद्यालय में शोध छात्र यशपाल की मौत के साथ ही घर का ही नहीं, उसके बूढ़े पिता, भाइयों और परिवार की उम्मीदों का चिराग भी बुझ गया। खेत बेचकर किसी तरह उसे पढ़ा रहे परिजन उसके साथ खुद के भविष्य का ताना-बाना बुन रहे थे, जिस पर पानी फिर गया। अयोध्या से शव आने पर मंगलवार शाम गांव मानपुर भगवतीपुर में यशपाल का अंतिम संस्कार किया गया।
बरेली के मानपुर भगवतीपुर निवासी शोध छात्र यशपाल के पिता मलखान सिंह ने कहा कि जात-पात के भेदभाव ने उनके बेटे को निगल लिया। चार बेटों में सबसे छोटा यशपाल बचपन से ही होनहार था। हाईस्कूल व इंटर मीडिएट में अच्छे अंकों से उत्तीर्ण होने पर उसे राजकीय पुरस्कार भी मिला था। उसी पर पूरे परिवार का सुनहरा भविष्य भी निर्भर था। इसीलिए पूरे परिवार की इच्छा थी कि किसी भी तरह अच्छी तालीम देकर उसे योग्य बनाने का हर संभव प्रयास किया जाए।
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पहली बार में ही प्रवेश परीक्षा देकर एग्रोनॉमी में दाखिला पा गया तो पुश्तैनी 10 बीघा जमीन में से कुछ खेत बेचकर उसकी पढ़ाई कराई जा रही थी। सिविल सेवाओं की तैयारी के लिए उसे दिल्ली भेजने की योजना थी। इसे लेकर पूरा परिवार एकजुट था। परिवार के सभी सदस्य यशपाल को किसी बड़े ओहदे पर देखना चाहते थे।
पिता ने आरोप लगाया कि जात-पात की दूषित मानसिकता से ग्रसित शिक्षक ने सभी के अरमानों पर पानी फेर दिया। इसी दूषित मानसिकता से आए दिन उसे प्रताड़ित किया जा रहा था। वह धान, गेहूं के ट्रायल की मांग कर रहा था, लेकिन जान-बूझकर उसे दूसरे विषय का ट्रायल दिया गया।
जातीय भावना से ग्रसित होकर उत्पीड़न का आरोप
मृतक छात्र यशपाल सिंह के भाई हरिवंश सिंह ने कुमारगंज पुलिस को दी गई तहरीर में आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. विशुद्धानंद जातीय भावना से ग्रसित होकर उनके भाई यशपाल सिंह की तीन बार थीसिस खारिज कर दी। उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे। 20 दिन पहले उसके ताऊ का निधन होने पर घर जाने की छुट्टी तक नहीं दी थी। उसकी डिग्री रोकने की धमकी भी देते थे। छात्रों में इस बात पर भी आक्रोश है कि यशपाल ने अपनी रिसर्च से संबंधित तमाम डाटा इकट्ठा किया था।
प्रजेंटेशन से एक दिन पहले यानी 12 मई को शिक्षक ने उसे भी खारिज कर दिया, जबकि वे उसके गाइड थे। गलत डाटा तैयार होने पर पहले से बता सकते थे। शिक्षक की ओर से किए जा रहे उत्पीड़न की जानकारी उनके भाई ने उन्हें कई बार फोन पर दी। मामले में पुलिस ने शिक्षक डॉ. विशुद्धानंद के खिलाफ आत्महत्या के लिए विवश करने की धारा में मुकदमा दर्ज कर लिया है। थानाध्यक्ष रतन सिंह ने बताया कि आरोपी शिक्षक की गिरफ्तारी के लिए टीम गठित की गई है।
10 सदस्यीय कमेटी करेगी उच्च स्तरीय जांच
छात्र यशपाल सिंह के आत्महत्या के मामले की जांच के लिए कुलपति ने 10 सदस्यीय कमेटी बनाई है। समिति में कुलसचिव डॉ. पीएस प्रमाणिक, निदेशक प्रशासन एवं परिवीक्षण डॉ. एके सिंह, कृषि अधिष्ठाता डॉ. प्रतिभा सिंह, छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. डीके द्विवेदी, वानिकी अधिष्ठाता डॉ. संजय पाठक, सामुदायिक विज्ञान अधिष्ठाता डॉ. साधना सिंह, सुरक्षा अधिकारी आरके सिंह, डॉ. नवाज खान, डॉ. सीएन राम, डॉ. नीरज यादव शामिल हैं।
मंगलवार की सुबह नौ बजे समिति ने कुलपति के साथ दो घंटे तक बैठक की। प्रारंभिक जांच में दोषी मिलने पर आरोपी शिक्षक को निलंबित कर दिया गया। कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने बताया कि घटना के संबंध में स्नातक, परास्नातक व पीएचडी के छात्र-छात्राओं के आईडी नंबर के साथ व्यक्तिगत जानकारी समिति दर्ज करेगी। पुख्ता सबूतों के आधार पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। निलंबन की अवधि में शिक्षक को फसल अनुसंधान केंद्र मसौधा से संबद्ध किया गया है।