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निर्भया कांड के आरोपियों की फांसी टलने से गुस्से में छात्राएं
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निर्भया के आरोपियों की फांसी टलने पर रोष जताती छात्राएं।
- फोटो : अमर उजाला, बरेली
बरेली। निर्भया कांड के तीन आरोपियों की फांसी एक बार फिर टलने और उनके बार-बार रिव्यू पिटीशन डालने से छात्राओं में रोष है। उनका कहना है कि सरकार और न्यायालय ऐसे लोगों की पिटीशन पर ध्यान ही क्यों देती है। घटना का एक नाबालिग आरोपी बाहर खुले में घूम रहा है। जब रेप के वक्त लड़कियों की उम्र नहीं देखी जाती। छह माह की बच्ची से लेकर बूढ़ी औरतों के साथ भी दुराचार की कोशिश की जाती है तो न्यायपालिका घटना के आरोपियों की उम्र क्यों देखती है। अपराध के लिए केवल सजा का प्रावधान होना चाहिए।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय की छात्रा अमीषा ने कहा कि हमारी न्यायिक प्रणाली इतनी जटिल है कि अपराधी को बचने का बार-बार मौका मिलता जाता है। मानवता को तार-तार करने वाले अपराधियों की फांसी टलना भारतीय जनमानस को झकझोरने वाला है। इन अपराधियों को जल्द से जल्द फांसी पर लटकाया जाना चाहिए। छात्रा निकिता के अनुसार बार-बार फांसी टलने से आम जनमानस में खराब मेसेज गया है। इस तरह देश में महिलाएं खुद को बेबस महसूस करेंगी। न्याय में देरी नहीं होनी चाहिए। छात्रा आकांक्षा ने कहा कि निर्भया कांड का एक आरोपी नाबालिग होने के नाते छूट गया। जब रेप करते समय अपराधी बच्चियों के उम्र का लिहाज नही करते तो न्यायालय फैसले देते वक्त उनके उम्र का क्यों लिहाज करता है। छात्रा श्रेया ने कहा कि इस तरह तो हर आदमी अपराध करने के बाद बच जाएगा। छात्रा वैशाली, हिमानी, स्नेहा, नम्रता व वर्षा ने कहा कि उन्हें देश की न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है पर तब जब इन पर अपराध साबित हो चुका है, इनकी किसी भी पेटीशन पर कोर्ट को सुनवाई नहीं करनी चाहिए।
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रुहेलखंड विश्वविद्यालय की छात्रा अमीषा ने कहा कि हमारी न्यायिक प्रणाली इतनी जटिल है कि अपराधी को बचने का बार-बार मौका मिलता जाता है। मानवता को तार-तार करने वाले अपराधियों की फांसी टलना भारतीय जनमानस को झकझोरने वाला है। इन अपराधियों को जल्द से जल्द फांसी पर लटकाया जाना चाहिए। छात्रा निकिता के अनुसार बार-बार फांसी टलने से आम जनमानस में खराब मेसेज गया है। इस तरह देश में महिलाएं खुद को बेबस महसूस करेंगी। न्याय में देरी नहीं होनी चाहिए। छात्रा आकांक्षा ने कहा कि निर्भया कांड का एक आरोपी नाबालिग होने के नाते छूट गया। जब रेप करते समय अपराधी बच्चियों के उम्र का लिहाज नही करते तो न्यायालय फैसले देते वक्त उनके उम्र का क्यों लिहाज करता है। छात्रा श्रेया ने कहा कि इस तरह तो हर आदमी अपराध करने के बाद बच जाएगा। छात्रा वैशाली, हिमानी, स्नेहा, नम्रता व वर्षा ने कहा कि उन्हें देश की न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है पर तब जब इन पर अपराध साबित हो चुका है, इनकी किसी भी पेटीशन पर कोर्ट को सुनवाई नहीं करनी चाहिए।
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