{"_id":"5931bd724f1c1bf946bdae13","slug":"amrit-siddhi-will-be-the-ganga-bath","type":"story","status":"publish","title_hn":"अमृत सिद्धि के महासंयोग में होगा कल गंगा स्नान ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अमृत सिद्धि के महासंयोग में होगा कल गंगा स्नान
बरेली।
Updated Sat, 03 Jun 2017 01:07 AM IST
विज्ञापन
Amrit Siddhi will be the Ganga bath
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष दशमी में मनाए जाने वाला गंगा दशहरा इस बार चार जून रविवार को पड़ रहा है। हालांकि शुभ तिथि शनिवार को सुबह 6 बजकर 51 मिनट से ही है। रविवार को सुबह 8 बजकर 21 तक इसका असर रहेगा। उदया तिथि की प्रधानता होने के अनुसार यह पर्व रविवार को ही मान्य होगा। गंगा जी का अवतरण भी दशमी तिथि में वृष लग्न में हुआ था। वृष लग्न रविवार को प्रात: 5 बजकर 54 से 8:8 बजकर तक ही रहेगी। इसलिए वृष लग्न का समय स्नान दान पूजा पाठ के लिए श्रेष्ठ माना जाएगा। वैसे तो स्नान आदि कार्य पूरे दिन चलेंगे।
आचार्य मुकेश मिश्रा ने बताया कि इस दिन सुबह 5 बजकर 28 मिनट से दोपहर बाद 3 बजकर 23 मिनट तक अमृत सिद्धि और सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। अमृत सिद्धि अर्थात रोग आदि का शमन, आयु की वृद्धि करने वाला योग कहलाता है। वहीं सर्वार्थ सिद्धि सभी मनोवांछित इच्छाओं को पूर्ण करने वाला कहा जाता है। जबकि इस दिन रविवार को हस्त नक्षत्र पड़ने से इस पर्व की महत्वा कई गुना बढ़ गई है।
ऐसे मनाएं गंगा पर्व
इस दिन स्नान के बाद गंगा तट पर दीपदान और अन्न वस्त्र का दान करना चाहिए। मुकेश मिश्रा बताते हैं कि गंगा स्तोत्र का पाठ, हनुमान चालीसा, भगवान विष्णु और शिव की आराधना अवश्य करनी चाहिए। ऐसा करने से पितृ भी प्रसन्न होते हैं। अपने जीवन में किये गए सभी पापों का शमन भी होता है।
विज्ञापन
इसलिए है गंगा दशहरा का महत्व
कहा जाता है कि इसी दिन भागीरथ गंगा को पृथ्वी पर लाए थे और सेतुबंध रामेश्वर की प्रतिष्ठा भी इसी दिन भगवान राम ने की थी। वेदमाता गायत्री जयंती भी इसी दिन मनाई जाती है। इसलिए इस दिन स्नान करने से दस प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है।
विज्ञापन
आचार्य मुकेश मिश्रा ने बताया कि इस दिन सुबह 5 बजकर 28 मिनट से दोपहर बाद 3 बजकर 23 मिनट तक अमृत सिद्धि और सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। अमृत सिद्धि अर्थात रोग आदि का शमन, आयु की वृद्धि करने वाला योग कहलाता है। वहीं सर्वार्थ सिद्धि सभी मनोवांछित इच्छाओं को पूर्ण करने वाला कहा जाता है। जबकि इस दिन रविवार को हस्त नक्षत्र पड़ने से इस पर्व की महत्वा कई गुना बढ़ गई है।
विज्ञापन
ऐसे मनाएं गंगा पर्व
इस दिन स्नान के बाद गंगा तट पर दीपदान और अन्न वस्त्र का दान करना चाहिए। मुकेश मिश्रा बताते हैं कि गंगा स्तोत्र का पाठ, हनुमान चालीसा, भगवान विष्णु और शिव की आराधना अवश्य करनी चाहिए। ऐसा करने से पितृ भी प्रसन्न होते हैं। अपने जीवन में किये गए सभी पापों का शमन भी होता है।
विज्ञापन
इसलिए है गंगा दशहरा का महत्व
कहा जाता है कि इसी दिन भागीरथ गंगा को पृथ्वी पर लाए थे और सेतुबंध रामेश्वर की प्रतिष्ठा भी इसी दिन भगवान राम ने की थी। वेदमाता गायत्री जयंती भी इसी दिन मनाई जाती है। इसलिए इस दिन स्नान करने से दस प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है।