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Bareilly News: भ्रष्टाचार के जहर से दम तोड़ रहा अमृत सरोवर
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- शाही के गांव दौली जवाहरलाल में 50 लाख की लागत से बना अमृत सरोवर एक साल में हुआ बदहाल
- जल संचयन के लिए 15वें वित्त आयोग के बजट से जिला पंचायत की ओर से कराया गया था निर्माण
राघवेंद्र कुमार
शाही। जल संचयन के लिए दौली जवाहरलाल गांव में बना अमृत सरोवर एक साल में ही बद से बदतर स्थिति में पहुंच गया है। निर्माण में जमकर भ्रष्टाचार होने के आरोप लग रहे हैं। लाखों रुपये खर्च के बाद भी फुटपाथ जगह-जगह से उखड़ चुका है। बेंचें टूट गई हैं। सरोवर में ऊंची-ऊंची झाड़ियां उग आई हैं। नाराज ग्रामीणों ने सरोवर के निर्माण में हुए भ्रष्टाचार की जांच कराने की मांग की है।
इस सरोवर का निर्माण आजादी के अमृत महोत्सव के तहत 15वें वित्त आयोग के बजट से कराया गया था। करीब 50 लाख रुपये से अधिक धनराशि खर्च किए जाने की बात सामने आ रही है, लेकिन सरोवर के पास लगे शिलापट पर लागत अंकित नहीं की गई है। यही नहीं ग्राम पंचायत को हैंडओवर करने में भी मनमानी करने और आपत्तियों को नजरंदाज करने के आरोप जिम्मेदारों पर लगे हैं।
पानी की निकासी के लिए लगाए पाइप उखड़े
निर्माण कार्य में खराब गुणवत्ता का हाल यह है कि एक साल में ही पानी की निकासी के लिए लगाए गए पाइपों के जोड़ खुल गए हैं और वह इधर-उधर गिरे पड़े हुए हैं। पाइपों को जोड़ने के लिए घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। बैठने के लिए लगाई गईं बेंच टूटकर गिर चुकी हैं। पौधे ज्यादातर सूख चुके हैं। पत्थर के स्थान पर लगाई गई ईंटें जमीन में धंस चुकी हैं और वहां कई-कई फुट गहरे गड्ढे हो गए हैं। स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण के दौरान कई बच्चे इन गड्ढों में गिर गए थे। सरोवर के चारों तरफ ऊंची-ऊंची झाड़ियां उग आई हैं और उनमें जहरीले जीव होने का खतरा बना रहता है।
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ठेकेदार ने सरोवर के पास ही खोद दिया गड्ढा, खतरे में बच्चों की जान
अमृत सरोवर में बेंच, पौधे, चैंबर, फैंसिंग, झंडारोहण पोल, एक घाट, साइन बोर्ड, बांध की दीवार और सोलर लाइट के लिए पोल लगाए गए हैं। गांव के रामपाल, गेंदन लाल, लोचन, केवल राम, पीतम, चंद्रपाल, सरनाम सिंह, रामऔतार आदि बताते हैं कि निर्माण करते समय मिट्टी बाहर से लाने के लिए कहा गया था लेकिन ठेकेदार ने मनमानी करते हुए सरोवर के पास से ही मिट्टी खोदाई करके गड्ढे बना दिए। गड्ढे काफी गहरे होने से उसमें बच्चों के गिरने की आशंका बनी रहती है।
प्रधान की आपत्ति के बाद भी कर दिया हैंडओवर
जिला पंचायत ने अगस्त 2023 में सरोवर को पूर्ण और संतोषजनक बताते हुए ग्राम पंचायत को डाकघर के माध्यम से पत्र भेजकर हस्तांतरित कर दिया था। इस पर ग्राम प्रधान चमन सिंह ने आपत्ति जताते हुए विभागीय अधिकारियों से शिकायत की थी। उन्होंने कहा था कि सरोवर में सरकारी धन का दुरुपयोग करते हुए कोई भी कार्य गुणवत्ता और मानक के अनुसार नहीं किया गया है। हस्तांतरण के समय ही सरोवर में लगाई गईं टाइल्स और ईंटें जमीन में धंसकर खराब हो चुकी थीं। शिकायत पर अधिकारियों ने कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन एक साल बाद भी कुछ नहीं हुआ।
मुख्यमंत्री से शिकायत करने की तैयारी में ग्रामीण
जिला पंचायत सदस्य ममता गंगवार ने बताया कि उन्हें सरोवर के बारे में शुरू से अंत तक कोई जानकारी नहीं दी गई। न ही शिलापट पर कुल लागत राशि दर्शायी गई है। तथ्यों को जनता से छुपाना संदेह पैदा कर रहा है। लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी सरोवर निर्माण में गुणवत्ता से खिलवाड़ और उसकी बदहाली पर ग्रामीण खामोश बैठने को तैयार नहीं हैं। निर्माण कार्य में हुए भ्रष्टाचार को मुख्यमंत्री के दरबार तक ले जाने की तैयारी है। संवाद
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- जल संचयन के लिए 15वें वित्त आयोग के बजट से जिला पंचायत की ओर से कराया गया था निर्माण
राघवेंद्र कुमार
शाही। जल संचयन के लिए दौली जवाहरलाल गांव में बना अमृत सरोवर एक साल में ही बद से बदतर स्थिति में पहुंच गया है। निर्माण में जमकर भ्रष्टाचार होने के आरोप लग रहे हैं। लाखों रुपये खर्च के बाद भी फुटपाथ जगह-जगह से उखड़ चुका है। बेंचें टूट गई हैं। सरोवर में ऊंची-ऊंची झाड़ियां उग आई हैं। नाराज ग्रामीणों ने सरोवर के निर्माण में हुए भ्रष्टाचार की जांच कराने की मांग की है।
इस सरोवर का निर्माण आजादी के अमृत महोत्सव के तहत 15वें वित्त आयोग के बजट से कराया गया था। करीब 50 लाख रुपये से अधिक धनराशि खर्च किए जाने की बात सामने आ रही है, लेकिन सरोवर के पास लगे शिलापट पर लागत अंकित नहीं की गई है। यही नहीं ग्राम पंचायत को हैंडओवर करने में भी मनमानी करने और आपत्तियों को नजरंदाज करने के आरोप जिम्मेदारों पर लगे हैं।
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पानी की निकासी के लिए लगाए पाइप उखड़े
निर्माण कार्य में खराब गुणवत्ता का हाल यह है कि एक साल में ही पानी की निकासी के लिए लगाए गए पाइपों के जोड़ खुल गए हैं और वह इधर-उधर गिरे पड़े हुए हैं। पाइपों को जोड़ने के लिए घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। बैठने के लिए लगाई गईं बेंच टूटकर गिर चुकी हैं। पौधे ज्यादातर सूख चुके हैं। पत्थर के स्थान पर लगाई गई ईंटें जमीन में धंस चुकी हैं और वहां कई-कई फुट गहरे गड्ढे हो गए हैं। स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण के दौरान कई बच्चे इन गड्ढों में गिर गए थे। सरोवर के चारों तरफ ऊंची-ऊंची झाड़ियां उग आई हैं और उनमें जहरीले जीव होने का खतरा बना रहता है।
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ठेकेदार ने सरोवर के पास ही खोद दिया गड्ढा, खतरे में बच्चों की जान
अमृत सरोवर में बेंच, पौधे, चैंबर, फैंसिंग, झंडारोहण पोल, एक घाट, साइन बोर्ड, बांध की दीवार और सोलर लाइट के लिए पोल लगाए गए हैं। गांव के रामपाल, गेंदन लाल, लोचन, केवल राम, पीतम, चंद्रपाल, सरनाम सिंह, रामऔतार आदि बताते हैं कि निर्माण करते समय मिट्टी बाहर से लाने के लिए कहा गया था लेकिन ठेकेदार ने मनमानी करते हुए सरोवर के पास से ही मिट्टी खोदाई करके गड्ढे बना दिए। गड्ढे काफी गहरे होने से उसमें बच्चों के गिरने की आशंका बनी रहती है।
प्रधान की आपत्ति के बाद भी कर दिया हैंडओवर
जिला पंचायत ने अगस्त 2023 में सरोवर को पूर्ण और संतोषजनक बताते हुए ग्राम पंचायत को डाकघर के माध्यम से पत्र भेजकर हस्तांतरित कर दिया था। इस पर ग्राम प्रधान चमन सिंह ने आपत्ति जताते हुए विभागीय अधिकारियों से शिकायत की थी। उन्होंने कहा था कि सरोवर में सरकारी धन का दुरुपयोग करते हुए कोई भी कार्य गुणवत्ता और मानक के अनुसार नहीं किया गया है। हस्तांतरण के समय ही सरोवर में लगाई गईं टाइल्स और ईंटें जमीन में धंसकर खराब हो चुकी थीं। शिकायत पर अधिकारियों ने कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन एक साल बाद भी कुछ नहीं हुआ।
मुख्यमंत्री से शिकायत करने की तैयारी में ग्रामीण
जिला पंचायत सदस्य ममता गंगवार ने बताया कि उन्हें सरोवर के बारे में शुरू से अंत तक कोई जानकारी नहीं दी गई। न ही शिलापट पर कुल लागत राशि दर्शायी गई है। तथ्यों को जनता से छुपाना संदेह पैदा कर रहा है। लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी सरोवर निर्माण में गुणवत्ता से खिलवाड़ और उसकी बदहाली पर ग्रामीण खामोश बैठने को तैयार नहीं हैं। निर्माण कार्य में हुए भ्रष्टाचार को मुख्यमंत्री के दरबार तक ले जाने की तैयारी है। संवाद