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अमर उजाला शिक्षा अभियान : कक्षा एक में जाने से पहले बाल वाटिका में निखरेंगे नौनिहाल, मंडल स्तर पर इकलौते विद्यालय का चयन
Thu, 31 Mar 2022 01:13 PM IST
सुशील कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
Published by: सुशील कुमार
Updated Thu, 31 Mar 2022 01:13 PM IST
सार
नए प्रावधानों के अनुसार तीन से आठ साल तक के बच्चों के लिए फाउंडेशन स्टेज की बात कही गई है। इसमें दो साल आंगनबाड़ी के होंगे। इसके बाद एक साल बालवाटिका का और फिर पहली और दूसरी कक्षा होगी। यह तीनों कक्षाएं स्कूल में संचालित होगी।
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- फोटो : amar ujala
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विस्तार
नई शिक्षा नीति में शिक्षा विभाग के ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी हो गई है। सरकारी स्कूलों में भी प्री प्राइमरी कक्षाएं प्रारंभ करने की योजना है। नई शिक्षा नीति में इसका प्रावधान किया जा रहा है। इस कक्षा को बालवाटिका नाम दिया जाएगा। इसके लिए मंडल स्तर पर एक विद्यालय का चयन भी कर लिया गया है। बरेली के प्राथमिक विद्यालय लखौरा में बाल वाटिका विकसित होगी। लखनऊ से विद्यालय को 37 आइटम की किट भेजी गई है।
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प्रधानाध्यापिका नीता जोशी ने बताया कि लखनऊ से उनके विद्यालय का चयन किया गया है। इसके बाद लखनऊ में यूनीसेफ के साथ प्रदेश स्तरीय चार दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। बरेली से एसआरजी डॉ. लक्ष्मी शुक्ला, शिक्षक संकुल मनोहर लाल सागर, नोडल शिक्षक मीती भाटिया और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गुंजन शामिल रहीं। कार्यशाला में बताया कि प्री प्राइमरी के बच्चों को यहां पढ़ाई कराई जाएगी और बच्चों को खेल और गतिविधि आधारित शिक्षा प्रदान की जाएगी। प्रशिक्षण में बताया गया कि विद्यार्थियों को उनकी रचनात्मकता, महत्वपूर्ण सोच और शब्दावली को मौखिक और लिखित रूप में व्यक्त करने की क्षमता सुधारने में मदद करना ही उद्देश्य है।
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इसके अलावा बच्चों में किताबों को पढ़ने और उसमें अपनी क्षमता का प्रदर्शन करना बताया जाना है। जिससे उनके ज्ञान का विकास हो सके। बच्चों का समूह बनाकर हर गतिविधि का आयोजन करेंगे। जिसमें पढ़ने को सुखद बनाने और पढ़ने के आनंद के साथ आजीवन जुड़ाव बनाने पर ध्यान दिया जाएगा। पढ़ना सीखने की नींव है, जो छात्रों को स्वतंत्र रूप से किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित करता है। रचनात्मकता, महत्वपूर्ण सोच, शब्दावली और मौखिक और लिखित दोनों में व्यक्त करने की क्षमता विकसित करता है। यह बच्चों को अपने परिवेश और वास्तविक जीवन की स्थिति से रूबरू कराने में मदद करता है। इसके लिए पहल होगी।
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नए प्रावधानों के अनुसार तीन से आठ साल तक के बच्चों के लिए फाउंडेशन स्टेज की बात कही गई है। इसमें दो साल आंगनबाड़ी के होंगे। इसके बाद एक साल बालवाटिका का और फिर पहली और दूसरी कक्षा होगी। यह तीनों कक्षाएं स्कूल में संचालित होगी।
बाल वाटिका में गतिविधि आधारित शिक्षण कार्य किया जाएगा। खेल की किट दी जाएगी व बच्चों को विद्यालयों में समायोजन के लिए तैयार किया जाएगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्रों और प्राथमिक कक्षाओं को जोड़ने की पहल की गई है। हम प्रार्थना सभा में भी बच्चों के बोलने की क्षमता विकसित करने पर अधिक से अधिक ध्यान देंगे ताकि बाल वाटिका से निकलकर जब बच्चे प्राइमरी में कक्षा में पहुंचे और कक्षा एक में प्रवेश लें तो वह बिना किसी हिचकिचाहट के फर्राटेदार बोल सकें। - नीता जोशी, प्रधानाध्यापिका, प्राथमिक विद्यालय, लखौरा