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सामुदायिक संक्रमण रोकने के लिए रहे अलर्ट
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बरेली। मुंबई, अहमदाबाद, गुजरात, राजस्थान, दिल्ली, मध्य प्रदेश में कोरोना संक्रमितों की तादाद सर्वाधिक है। यहां से वापस आ रहे सैकड़ों की तादाद में प्रवासियों में भी तमाम लोगों के संक्रमण की आशंका जताई जा रही है। मंगलवार को प्रमुख सचिव ने वीडियो कॉंफ्रेंसिंग में भी स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को प्रवासियों की सघन जांच किए जाने के निर्देश दिए। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सजग और सुरक्षित रहने के लिए प्रवासियों की जानकारी देने और सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क, हाथ धोने की कवायदों को आदत में ढालने का सुझाव दिया है।
जिला सर्विलांस अधिकारी एसीएमओ डॉ. रंजन गौतम के मुताबिक जो भी प्रवासी संक्रमित मिल रहे हैं वह एसिम्प्टोमैटिक हैं। शासन ने प्रवासियों की सघन जांच कराने के निर्देश दिए हैं। निजी अस्पताल और सरकारी अस्पतालों में भी संक्रमण न फैले, इसके लिए बेहतर इंतजाम करने को कहा है। साथ ही, इंफेक्शन प्रिवेंशन प्रोटोकॉल की गाइडलाइन का पालन कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए जिला स्तर पर गठित प्रोटोकॉल समिति को सक्रिय भूमिका निभाने की जिम्मेदारी सौंपी है। इसके अलावा मलेरिया के प्रकोप को कम करने, मैटरनिटी सेंटर में आ रहे मामलों को भी बेहद संजीदगी से लिए जाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, कोरोना संक्रमितों की मृत्युदर कम करने के लिए प्रदेश स्तर पर एक विशेषज्ञ डॉक्टरों का पैनल गठित करने को कहा।
संक्रमण चेन का का पता नहीं.. अफसर कह रहे नियंत्रण में स्थिति
हजियापुर, ब्रह्पुरा, साहूकारा में संक्रमण कहां से पहुंचा इसका सुराग तक स्वास्थ्य विभाग के अफसर नहीं खोज सके हैं। वहीं, निजी अस्पताल की नर्स में संक्रमण कहां से हुआ होगा, माना जा रहा है कि अफसर इसे भी नहीं खोज सकेंगे। दूसरी ओर, व्यापक स्तर पर सैंपल जांच कराने की कवायद भी परवान नहीं चढ़ पा रही है। अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था और बायो मेडिकल वेस्ट के समुचित निस्तारण कराने में भी अफसर पीछे हैं। प्रवासियों की ट्रेसिंग और उन्हें नियमानुसार क्वारंटीन कराना भी अफसरों के लिए चुनौती है। मगर स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट पर गौर करें तो स्थिति नियंत्रण में है।
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परेशानी: 40 फीसदी प्रवासियों ने दर्ज कराए हैं गलत नंबर
शासन के आदेश पर प्रशासन ने निगरानी समितियों समेत तमाम शिक्षकों को भी प्रवासियों की ट्रेस करने की जिम्मदारी सौंपी है। ब्लॉकवार चल रही ट्रेसिंग में जुटे कर्मियों का आरोप है कि जिले में वापस आए तमाम प्रवासियों ने गलत नंबर दर्ज कराए हैं। जो कलकत्ता, तमिलनाडु, झारखंड और छत्तीसगढ़ के नंबर बता रहे हैं। फोन भी स्विच ऑफ बता रहा है। मीरगंज ब्लॉक के कर्मचारी ने बताया कि प्रवासियों की ट्रेसिंग करना बेहद कठिन है। कोई सही से जवाब नहीं दे रहा है। बताया कि दिन भर में उसने 121 कॉल की इसमें से 30 से ज्यादा कॉल लग ही नहीं सकी और जो लगी भी उसमें ज्यादातर नंबर बाहर के हैं।
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जिला सर्विलांस अधिकारी एसीएमओ डॉ. रंजन गौतम के मुताबिक जो भी प्रवासी संक्रमित मिल रहे हैं वह एसिम्प्टोमैटिक हैं। शासन ने प्रवासियों की सघन जांच कराने के निर्देश दिए हैं। निजी अस्पताल और सरकारी अस्पतालों में भी संक्रमण न फैले, इसके लिए बेहतर इंतजाम करने को कहा है। साथ ही, इंफेक्शन प्रिवेंशन प्रोटोकॉल की गाइडलाइन का पालन कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए जिला स्तर पर गठित प्रोटोकॉल समिति को सक्रिय भूमिका निभाने की जिम्मेदारी सौंपी है। इसके अलावा मलेरिया के प्रकोप को कम करने, मैटरनिटी सेंटर में आ रहे मामलों को भी बेहद संजीदगी से लिए जाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, कोरोना संक्रमितों की मृत्युदर कम करने के लिए प्रदेश स्तर पर एक विशेषज्ञ डॉक्टरों का पैनल गठित करने को कहा।
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संक्रमण चेन का का पता नहीं.. अफसर कह रहे नियंत्रण में स्थिति
हजियापुर, ब्रह्पुरा, साहूकारा में संक्रमण कहां से पहुंचा इसका सुराग तक स्वास्थ्य विभाग के अफसर नहीं खोज सके हैं। वहीं, निजी अस्पताल की नर्स में संक्रमण कहां से हुआ होगा, माना जा रहा है कि अफसर इसे भी नहीं खोज सकेंगे। दूसरी ओर, व्यापक स्तर पर सैंपल जांच कराने की कवायद भी परवान नहीं चढ़ पा रही है। अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था और बायो मेडिकल वेस्ट के समुचित निस्तारण कराने में भी अफसर पीछे हैं। प्रवासियों की ट्रेसिंग और उन्हें नियमानुसार क्वारंटीन कराना भी अफसरों के लिए चुनौती है। मगर स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट पर गौर करें तो स्थिति नियंत्रण में है।
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परेशानी: 40 फीसदी प्रवासियों ने दर्ज कराए हैं गलत नंबर
शासन के आदेश पर प्रशासन ने निगरानी समितियों समेत तमाम शिक्षकों को भी प्रवासियों की ट्रेस करने की जिम्मदारी सौंपी है। ब्लॉकवार चल रही ट्रेसिंग में जुटे कर्मियों का आरोप है कि जिले में वापस आए तमाम प्रवासियों ने गलत नंबर दर्ज कराए हैं। जो कलकत्ता, तमिलनाडु, झारखंड और छत्तीसगढ़ के नंबर बता रहे हैं। फोन भी स्विच ऑफ बता रहा है। मीरगंज ब्लॉक के कर्मचारी ने बताया कि प्रवासियों की ट्रेसिंग करना बेहद कठिन है। कोई सही से जवाब नहीं दे रहा है। बताया कि दिन भर में उसने 121 कॉल की इसमें से 30 से ज्यादा कॉल लग ही नहीं सकी और जो लगी भी उसमें ज्यादातर नंबर बाहर के हैं।