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‘अजब शहर में रंग महल में’ पिरोया फेस्ट का सफर
बरेली
Updated Fri, 22 Jan 2016 12:32 AM IST
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बरेली। मेरा निजी चरित्र मेरी अपनी समस्या है। इस गुनाह का क्या दंड भोगना है, इसे मैं निश्चित करूंगी, जैसा कि हर व्यक्ति को करना चाहिए। किसी दूसरे को अंगुली उठाने का अधिकार नहीं मिल सकता। हर एक का अपना व्यक्तित्व, मार्ग और फिर अंत होता है, किंतु यह सार्वजनिक कैसे हो सकता है। ‘खामोश अदालत जारी है’ नाटक में अभियुक्त लीला के ये सवाल दर्शकों को झकझोर गए। पुराने समय की अधूरी प्रेम कहानियां भले ही नए समय में पूरी होती दिख रही हों, लेकिन वास्तविकता में वो आज भी अधूरी हैं। 20वीं शताब्दी के कुसंस्कृति के अवशेष हैं ये भयानक चेहरे। होठों पर कितने खूबसूरत और औपचारिक शब्द और भीतर विकृत वासनाएं। मुझे इस शरीर से बहुत प्यार है और घृणा भी है। क्रोध आता है, लेकिन नकार नहीं सकती, इसके अस्तित्व को। लीला के ये शब्द आज भी आधुनिक समय पर तमाचा है।
बृहस्पतिवार को विंडरमेयर में थियेटर फेस्ट के 10वें साल में प्रवेश करने पर 10 सालों का सफर एक नजर में दिखाने का प्रयास किया गया। थियेटर फेस्ट की शुरुआत ‘अजब शहर में रंग महल में’ नाटक से हुई। दानिश खान के कुशल निर्देशन और लव तोमर की परिकल्पना से वीर अभिमन्यु, ऑफ माइस एंड मेन, चैनपुर की दास्तां, रंग-अभंग, विमल दा, विप्रलब्धा और खामोश अदालत जारी है... नाटकों को एक सूत्र में पिरोया गया। सभी नाटकों के अंश लेकर ‘अजब शहर में रंग महल में’ बनाया गया। इसे देखकर लोग काफी आकर्षित हुए। दयादृष्टि रंग विनायक रंगमंडल की प्रस्तुति को सभी ने सराहा। नाटक में सुदेश, विक्रम सिंह, अजय चौहान, वल तोमर, आशुतोष गुप्ता, राजीव सिंह, मनीष त्यागी, दानिश खान, पीयूष, अर्पित, अमन राठौर, शिवम, मोहित सोलंकी, एजाज गाजी, क्षिति, ऋतिक राज, शीषपाल, आंचल, अस्मिता, पंकज कुकरेती, रईस खान, प्रियांशी, पंकज मौर्य, माधुरी, लवीना, ब्रजेश तिवारी, राजू चौहान, भावना शिंघल, शुभम भटक, आदिल खान का अभिनय, देवेंद्र रावत का संगीत, मोहम्मद नदीम की लाइट ने इसे और आकर्षक बना दिया। बैक स्टेज से उत्कर्ष, राशि, रचित, दिव्या मणि, मयंक और मोहसिन का सहयोग रहा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लेखक एवं ऐक्टर अमरीक गिल रहे। इस मौके पर दया दृष्टि रंग विनायक रंग मंडल के चेयरमैन डॉ. ब्रजेश्वर सिंह, शिखा सिंह, और प्रवीण शेखर आदि मौजूद रहे।
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बृहस्पतिवार को विंडरमेयर में थियेटर फेस्ट के 10वें साल में प्रवेश करने पर 10 सालों का सफर एक नजर में दिखाने का प्रयास किया गया। थियेटर फेस्ट की शुरुआत ‘अजब शहर में रंग महल में’ नाटक से हुई। दानिश खान के कुशल निर्देशन और लव तोमर की परिकल्पना से वीर अभिमन्यु, ऑफ माइस एंड मेन, चैनपुर की दास्तां, रंग-अभंग, विमल दा, विप्रलब्धा और खामोश अदालत जारी है... नाटकों को एक सूत्र में पिरोया गया। सभी नाटकों के अंश लेकर ‘अजब शहर में रंग महल में’ बनाया गया। इसे देखकर लोग काफी आकर्षित हुए। दयादृष्टि रंग विनायक रंगमंडल की प्रस्तुति को सभी ने सराहा। नाटक में सुदेश, विक्रम सिंह, अजय चौहान, वल तोमर, आशुतोष गुप्ता, राजीव सिंह, मनीष त्यागी, दानिश खान, पीयूष, अर्पित, अमन राठौर, शिवम, मोहित सोलंकी, एजाज गाजी, क्षिति, ऋतिक राज, शीषपाल, आंचल, अस्मिता, पंकज कुकरेती, रईस खान, प्रियांशी, पंकज मौर्य, माधुरी, लवीना, ब्रजेश तिवारी, राजू चौहान, भावना शिंघल, शुभम भटक, आदिल खान का अभिनय, देवेंद्र रावत का संगीत, मोहम्मद नदीम की लाइट ने इसे और आकर्षक बना दिया। बैक स्टेज से उत्कर्ष, राशि, रचित, दिव्या मणि, मयंक और मोहसिन का सहयोग रहा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लेखक एवं ऐक्टर अमरीक गिल रहे। इस मौके पर दया दृष्टि रंग विनायक रंग मंडल के चेयरमैन डॉ. ब्रजेश्वर सिंह, शिखा सिंह, और प्रवीण शेखर आदि मौजूद रहे।
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