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‘नवाबगंज में प्रशासन ने भाजपा प्रत्याशी को हराया’
बरेली
Updated Sat, 09 Dec 2017 02:22 AM IST
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स्थानीय निकाय चुनाव की समीक्षा बैठक में भाजपा पदाधिकारियों ने नवाबगंज नगर पालिका में हुई पार्टी प्रत्याशी की हार के लिए सीधे तौर पर प्रशासन को जिम्मेदार बताया है। भाजपा नेताओं की बैठक में लंबे मंथन के बाद निष्कर्ष निकला कि अगर प्रशासन फर्जी मतदान की शिकायतों को गंभीरता से लेता तो भाजपा प्रत्याशी की हार नहीं होती। बल्कि इसके बजाय प्रशासन ने फर्जी आधार कार्ड से वोट डाले जाने का मामला सामने आने के बाद भी उसकी अनदेखी कर दी।
संजयनगर स्थित पार्टी कार्यालय में हुई इस बैठक में भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष बीएल वर्मा, क्षेत्रीय संगठन मंत्री भवानी सिंह, जिला प्रभारी भूपेंद्र सिंह, जिलाध्यक्ष रविंद्र सिंह राठौर, नवाबगंज विधायक केसर सिंह गंगवार समेत निकायों के समन्वयक और प्रत्याशी मौजूद रहे। नवाबगंज प्रकरण की समीक्षा के बाद पार्टी के क्षेत्रीय संगठन के पदाधिकारियों ने माना कि एसडीएम और सीओ नवाबगंज शुुरू से ही विरोधी पक्ष की मानसिकता के साथ काम कर रहे थे। इन अधिकारियों को चुनाव से पहले ही बदलने को कहा गया लेकिन उच्च अधिकारियों ने संजीदगी से नहीं लिया। एसडीएम से पहले नवाबगंज में बिजली विभाग के एक अधिशासी अभियंता को रिटर्निंग अधिकारी बनाया जा रहा था लेकिन उन्होंने ऐन वक्त पर अपना नाम कटवा लिया। मतदान के दौरान फर्जी आधार कार्ड से वोटिंग पकड़ी गई थी। मतगणना में भी गड़बड़ी की बात सामने आई। इसकी वजह से ही वहां बवाल हुआ और भाजपा जिलाध्यक्ष रविंद्र सिंह राठौर, उनके भाई नीरेंद्र सिंह समेत अन्य पदाधिकारियों पर एससी-एसटी एक्ट, जानलेवा हमला और मारपीट समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करा दिया गया। पदाधिकारियों ने माना कि अगर नवाबगंज में फर्जी वोटिंग पर लगाम लगी होती तो यह हार नहीं होती। बता दें कि नगर निकाय चुनाव में नवाबगंज से भाजपा जिलाध्यक्ष रविंद्र सिंह राठौर के भाई नीरेंद्र सिंह की पत्नी प्रेमलता राठौर भाजपा की प्रत्याशी थीं। मगर वह बसपा की शहला ताहिर से महज 170 वोटों से हार गईं।
बहेड़ी में हार स्वीकार की
बहेड़ी के जातिगत समीकरणों को देखते हुए पदाधिकारियों ने वहां हार स्वीकार की। बहेड़ी में भाजपा से बॉबी जायसवाल की पत्नी रश्मि जायसवाल प्रत्याशी थीं। वह बसपा के नसीम अहमद से 1600 वोटों से हार गईं। भाजपा ने समीक्षा के बाद बहेड़ी में हार की वजह जातिगत समीकरणों को माना। पदाधिकारियों ने यह स्वीकार किया कि बहेड़ी में हर स्तर पर अभी काफी काम करने की जरूरत है।
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170 वोटों से हार कोई बहुत बड़ी बात नहीं। फर्जी आधार कार्ड से वोटिंग पकड़ी गई, जिसे रोका जा सकता था लेकिन प्रशासन ने शिकायत के बाद भी उसकी अनदेखी कर दी। इसी वजह से समीकरण पक्ष में होते हुए भी भाजपा प्रत्याशी की हार हुई। हमारे कार्यकर्ताओं को भी मतदान से पहले वोटर लिस्ट को गंभीरता से लेना चाहिए था। बहेड़ी की हार को हमने स्वीकार किया है लेकिन नवाबगंज में हमारी प्रत्याशी को हराया गया है।
- बीएल वर्मा, क्षेत्रीय अध्यक्ष
बैठक में सभी बिंदुओं पर समीक्षा की गई। इसमें साफ हुआ कि नवाबगंज में पार्टी प्रत्याशी की हार प्रशासन ने कराई है। मतदान और मतगणना के दौरान अधिकारियों ने दूसरे प्रत्याशी के पक्ष में काम किया।
- रविंद्र सिंह राठौर, जिलाध्यक्ष
नवाबगंज प्रकरण पर प्रदेश अध्यक्ष की नजर
समीक्षा बैठक में नवाबगंज विवाद पर भी चर्चा हुई। क्षेत्रीय अध्यक्ष बीएल वर्मा ने बताया कि उन्होंने पूरी क्लिपिंग कई बार देखी है। उसमें ऐसा कुछ नहीं है, जैसे आरोप जिलाध्यक्ष पर लगाए गए हैं। जिलाध्यक्ष ने कोई मारपीट नहीं की है। अब यह प्रकरण प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय और प्रदेश संगठन महामंत्री सुनील बंसल खुद देख रहे हैं। प्रशासन के उच्च अधिकारियों ने भी एसडीएम को विश्वास में लेकर हकीकत जान ली होगी, इसलिए मामला जल्दी ही सुलझ जाएगा।
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संजयनगर स्थित पार्टी कार्यालय में हुई इस बैठक में भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष बीएल वर्मा, क्षेत्रीय संगठन मंत्री भवानी सिंह, जिला प्रभारी भूपेंद्र सिंह, जिलाध्यक्ष रविंद्र सिंह राठौर, नवाबगंज विधायक केसर सिंह गंगवार समेत निकायों के समन्वयक और प्रत्याशी मौजूद रहे। नवाबगंज प्रकरण की समीक्षा के बाद पार्टी के क्षेत्रीय संगठन के पदाधिकारियों ने माना कि एसडीएम और सीओ नवाबगंज शुुरू से ही विरोधी पक्ष की मानसिकता के साथ काम कर रहे थे। इन अधिकारियों को चुनाव से पहले ही बदलने को कहा गया लेकिन उच्च अधिकारियों ने संजीदगी से नहीं लिया। एसडीएम से पहले नवाबगंज में बिजली विभाग के एक अधिशासी अभियंता को रिटर्निंग अधिकारी बनाया जा रहा था लेकिन उन्होंने ऐन वक्त पर अपना नाम कटवा लिया। मतदान के दौरान फर्जी आधार कार्ड से वोटिंग पकड़ी गई थी। मतगणना में भी गड़बड़ी की बात सामने आई। इसकी वजह से ही वहां बवाल हुआ और भाजपा जिलाध्यक्ष रविंद्र सिंह राठौर, उनके भाई नीरेंद्र सिंह समेत अन्य पदाधिकारियों पर एससी-एसटी एक्ट, जानलेवा हमला और मारपीट समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करा दिया गया। पदाधिकारियों ने माना कि अगर नवाबगंज में फर्जी वोटिंग पर लगाम लगी होती तो यह हार नहीं होती। बता दें कि नगर निकाय चुनाव में नवाबगंज से भाजपा जिलाध्यक्ष रविंद्र सिंह राठौर के भाई नीरेंद्र सिंह की पत्नी प्रेमलता राठौर भाजपा की प्रत्याशी थीं। मगर वह बसपा की शहला ताहिर से महज 170 वोटों से हार गईं।
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बहेड़ी में हार स्वीकार की
बहेड़ी के जातिगत समीकरणों को देखते हुए पदाधिकारियों ने वहां हार स्वीकार की। बहेड़ी में भाजपा से बॉबी जायसवाल की पत्नी रश्मि जायसवाल प्रत्याशी थीं। वह बसपा के नसीम अहमद से 1600 वोटों से हार गईं। भाजपा ने समीक्षा के बाद बहेड़ी में हार की वजह जातिगत समीकरणों को माना। पदाधिकारियों ने यह स्वीकार किया कि बहेड़ी में हर स्तर पर अभी काफी काम करने की जरूरत है।
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170 वोटों से हार कोई बहुत बड़ी बात नहीं। फर्जी आधार कार्ड से वोटिंग पकड़ी गई, जिसे रोका जा सकता था लेकिन प्रशासन ने शिकायत के बाद भी उसकी अनदेखी कर दी। इसी वजह से समीकरण पक्ष में होते हुए भी भाजपा प्रत्याशी की हार हुई। हमारे कार्यकर्ताओं को भी मतदान से पहले वोटर लिस्ट को गंभीरता से लेना चाहिए था। बहेड़ी की हार को हमने स्वीकार किया है लेकिन नवाबगंज में हमारी प्रत्याशी को हराया गया है।
- बीएल वर्मा, क्षेत्रीय अध्यक्ष
बैठक में सभी बिंदुओं पर समीक्षा की गई। इसमें साफ हुआ कि नवाबगंज में पार्टी प्रत्याशी की हार प्रशासन ने कराई है। मतदान और मतगणना के दौरान अधिकारियों ने दूसरे प्रत्याशी के पक्ष में काम किया।
- रविंद्र सिंह राठौर, जिलाध्यक्ष
नवाबगंज प्रकरण पर प्रदेश अध्यक्ष की नजर
समीक्षा बैठक में नवाबगंज विवाद पर भी चर्चा हुई। क्षेत्रीय अध्यक्ष बीएल वर्मा ने बताया कि उन्होंने पूरी क्लिपिंग कई बार देखी है। उसमें ऐसा कुछ नहीं है, जैसे आरोप जिलाध्यक्ष पर लगाए गए हैं। जिलाध्यक्ष ने कोई मारपीट नहीं की है। अब यह प्रकरण प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय और प्रदेश संगठन महामंत्री सुनील बंसल खुद देख रहे हैं। प्रशासन के उच्च अधिकारियों ने भी एसडीएम को विश्वास में लेकर हकीकत जान ली होगी, इसलिए मामला जल्दी ही सुलझ जाएगा।