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महिला के मन में पति की कमाई को लेकर लालच निंदनीय : कोर्ट
Fri, 27 Mar 2026 12:58 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Fri, 27 Mar 2026 12:58 AM IST
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बरेली। तारों या नक्षत्रों का आभूषण चंद्रमा है, िस्त्रयों का आभूषण पति है, पृथ्वी का आभूषण राजा है, किंतु विद्या वास्तव में सभी का आभूषण है। एमएससी, एमएड की हुई महिला से विशेष सूझ-बूझ की उम्मीद होती है, लेकिन उसके मन में पति की कमाई को लेकर लालच निंदनीय है। ये टिप्पणी करते हुए पारिवारिक न्यायालय के अपर प्रधान न्यायाधीश ज्ञानेंद्र त्रिपाठी ने 23 साल पुरानी शादी के मामले में तलाक को मंजूरी दे दी।
मूल रूप से नोयडा के रहने वाले सैन्य अधिकारी (लेफ्टिनेंट) पति ने वर्ष 2022 में पारिवारिक कोर्ट में अपनी पत्नी के विरुद्ध तलाक का मुकदमा दायर किया। वर्ष 2003 में उनकी शादी बांदा की उच्च शिक्षित महिला से हुई थी। दोनों की शादी का पंजीकरण बरेली में वर्ष 2011 में हुआ था। वर्ष 2004 में दोनों का एक बेटा भी हुआ। सैन्य अधिकारी ने परिवार के लिए ग्रेटर नोएडा में एक फ्लैट ले लिया। सैन्य अधिकारी ने आरोप लगाया कि शादी की शुरुआत से ही पत्नी का उनके प्रति कोई लगाव नहीं रहा। महिला ने पति के विरुद्ध कई बार घरेलू हिंसा की शिकायतें भी की। वर्ष 2016 में उनके दिल्ली में नहीं होने के बावजूद नारायना थाने में झूठी शिकायत की गई।
बेटे का झूठा जन्म प्रमाणपत्र भी बनवा लिया। सैन्य अधिकारी ने बताया कि पत्नी के माता-पिता चिकित्सक हैं। वह बार-बार अलग-अलग तरह से पैसे लेती थी। उसने बताया कि 2004 में जब पिता बीमार हुए थे तो भी पत्नी का व्यवहार भी ठीक नहीं था। महिला ने पति को निलंबित करने की भी अर्जी दी थी। वहीं, महिला ने कहा कि उसका पति पहले से ही उसे छोड़ना चाहता था, इसलिए वह योजना बना रहा था। पति की नौकरी के अलावा अलग-अलग स्रोतों से करीब दो करोड़ रुपये सालाना कमाई है। महिला ने बताया कि वह खतरनाक बीमारी से पीड़ित है। इसलिए उसे व उसके बेटे को प्रतिमाह दो लाख या एकमुश्त बीस करोड़ रुपये खर्च दिलाया जाए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने महिला को मात्र एकमुश्त बीस लाख रुपये दिलाने का आदेश सुनाया। लेफ्टिनेंट की ओर से दायर तलाक की अर्जी को स्वीकारते हुए दोनों की 23 साल पुरानी शादी में तलाक को मंजूरी दी।
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मूल रूप से नोयडा के रहने वाले सैन्य अधिकारी (लेफ्टिनेंट) पति ने वर्ष 2022 में पारिवारिक कोर्ट में अपनी पत्नी के विरुद्ध तलाक का मुकदमा दायर किया। वर्ष 2003 में उनकी शादी बांदा की उच्च शिक्षित महिला से हुई थी। दोनों की शादी का पंजीकरण बरेली में वर्ष 2011 में हुआ था। वर्ष 2004 में दोनों का एक बेटा भी हुआ। सैन्य अधिकारी ने परिवार के लिए ग्रेटर नोएडा में एक फ्लैट ले लिया। सैन्य अधिकारी ने आरोप लगाया कि शादी की शुरुआत से ही पत्नी का उनके प्रति कोई लगाव नहीं रहा। महिला ने पति के विरुद्ध कई बार घरेलू हिंसा की शिकायतें भी की। वर्ष 2016 में उनके दिल्ली में नहीं होने के बावजूद नारायना थाने में झूठी शिकायत की गई।
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बेटे का झूठा जन्म प्रमाणपत्र भी बनवा लिया। सैन्य अधिकारी ने बताया कि पत्नी के माता-पिता चिकित्सक हैं। वह बार-बार अलग-अलग तरह से पैसे लेती थी। उसने बताया कि 2004 में जब पिता बीमार हुए थे तो भी पत्नी का व्यवहार भी ठीक नहीं था। महिला ने पति को निलंबित करने की भी अर्जी दी थी। वहीं, महिला ने कहा कि उसका पति पहले से ही उसे छोड़ना चाहता था, इसलिए वह योजना बना रहा था। पति की नौकरी के अलावा अलग-अलग स्रोतों से करीब दो करोड़ रुपये सालाना कमाई है। महिला ने बताया कि वह खतरनाक बीमारी से पीड़ित है। इसलिए उसे व उसके बेटे को प्रतिमाह दो लाख या एकमुश्त बीस करोड़ रुपये खर्च दिलाया जाए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने महिला को मात्र एकमुश्त बीस लाख रुपये दिलाने का आदेश सुनाया। लेफ्टिनेंट की ओर से दायर तलाक की अर्जी को स्वीकारते हुए दोनों की 23 साल पुरानी शादी में तलाक को मंजूरी दी।
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