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पेड़, बिजली के खंभों से टला बड़ा हादसा
बरेली।
Updated Sun, 16 Apr 2017 01:45 AM IST
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राज्यरानी ट्रेन हादसाः
- फोटो : amarujala
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बरेली। राज्यरानी एक्सप्रेस में सुबह के समय हर कोई अपनी-अपनी मंजिल पर पहुंचने के लिए बेताब था। ट्रेन भी अपनी पूरी रफ्तार में चल रही थी। दैनिक यात्रा करने वाले यात्री अपनी दैनिक कथा कहने में मशगूल थे। इन्हें क्या पता था कि एक हादसा उनका इंतजार कर रहा है। सुबह के 8.21 बजे थे कि देखते ही देखते ट्रेन हिचकोले खाने लगी। धूल के गुबार से ट्रेन के डिब्बों में अंधेरा छा गया। जबतक लोग कुछ समझ पाते बोगियां पलट चुकी थीं। दो बिजली के खंभे और और रेल ट्रैक के किनारे पेड़ एक बड़े हादसे को रोकने में काफी मददगार साबित हुए। इनके चलते बोगियां रेल ट्रैक से कम से कम दस फिट की खाई में पलटने से बच गईं।
रेल ट्रैक से दस फिट नीचे खेत हैं। इन खेतों के किनारे पेड़ और बिजली के खंभे हैं। बोगियां पलटकर इन्हीं के सहारे टिक गईं। इससे वे पलटी खाते हुए दस फिट नीचे गिरने से बच गईं। इससे भारी जानमाल की क्षति होने से बच गई। ईश्वर भी आज यात्रियों पर सुबह मेहरबान रहा। रेल ट्रैक से बिजली तारों को सपोर्ट देने के लिए खंभों से लगी राड टूट कर तार के सहारे लटक गए। बिजली के तार टूट कर गिरते तो हादसा बड़ा हो सकता था। लगभग सौ मीटर तक रेल ट्रैक पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए। बोगियों से अलग होकर पहियों में लगे स्प्रिंग भी बिखरे पड़े हुए थे। रेल ट्रैक के बीच के स्लीपर गायब हो चुके थे। लोहे के रेल ट्रैक के गाटर कई टुकड़ों में क्षतिग्रस्त हो चुके थे।
इमरजेंसी खिड़कियां भी काम नहीं आईं
बोगियां तिरछी होने और ट्रेन में धूल होने के कारण बाहर निकलते समय लोगों के पैर फिसल रहे थे। खिड़कियों की छड़ को पकड़ कर लोग मुख्य दरवाजे से ही बाहर निकलने में सफल हुए। एक भी यात्री इमरजेंसी खिड़कियों के सहारे निकलने में सफल नहीं हो सका।
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नहीं पहुंचे डीएम, एसपी
हादसे के पौने दो घंटे तक मौके पर जिलाधिकारी और एसपी दस बजे तक मौके पर नहीं पहुंचे। यात्रियों की सुध लेने के लिए मौके पर एक भी जिम्मेदार अफसर मौके पर दस बजे तक नहीं पहुंचे थे।
यात्रियों को सुविधाएं मुहैया नहीं कराई गई
हादसे के बाद यात्रियों के सामने मंजिल तक पहुंचने की गंभीर समस्या बनी रही। 11 बजे तक यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाने के लिए संसाधन मुहैया नहीं कराए गए। आरपीएफ और जीआरपी और सिविल पुलिस के जवान यात्रियों को केवल झूठा आश्वासन देते रहे कि आगे रोडवेज की बसे लगाईं गई हैं। जबकि सड़क के दोनों छोर पर रोडवेज की एक भी बस 11 बजे तक दिखाई नहीं दी। दिखाई दी तो केवल एंबुलेंस और शव वाहन।
टेंपो चालकों ने की वसूली
ट्रेन यात्रियों को रोडवेज बस स्टेशन तक पहुंचने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ी। साधन सुलभ नहीं होने के कारण यात्रियों को मनमाना किराया चुकाना पड़ा। हादसा स्थल से रामपुर खास बस स्टेशन तक पहुंचने के लिए टेंपो चालकों ने प्रति यात्री बीस वसूल किए।
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रेल ट्रैक से दस फिट नीचे खेत हैं। इन खेतों के किनारे पेड़ और बिजली के खंभे हैं। बोगियां पलटकर इन्हीं के सहारे टिक गईं। इससे वे पलटी खाते हुए दस फिट नीचे गिरने से बच गईं। इससे भारी जानमाल की क्षति होने से बच गई। ईश्वर भी आज यात्रियों पर सुबह मेहरबान रहा। रेल ट्रैक से बिजली तारों को सपोर्ट देने के लिए खंभों से लगी राड टूट कर तार के सहारे लटक गए। बिजली के तार टूट कर गिरते तो हादसा बड़ा हो सकता था। लगभग सौ मीटर तक रेल ट्रैक पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए। बोगियों से अलग होकर पहियों में लगे स्प्रिंग भी बिखरे पड़े हुए थे। रेल ट्रैक के बीच के स्लीपर गायब हो चुके थे। लोहे के रेल ट्रैक के गाटर कई टुकड़ों में क्षतिग्रस्त हो चुके थे।
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इमरजेंसी खिड़कियां भी काम नहीं आईं
बोगियां तिरछी होने और ट्रेन में धूल होने के कारण बाहर निकलते समय लोगों के पैर फिसल रहे थे। खिड़कियों की छड़ को पकड़ कर लोग मुख्य दरवाजे से ही बाहर निकलने में सफल हुए। एक भी यात्री इमरजेंसी खिड़कियों के सहारे निकलने में सफल नहीं हो सका।
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नहीं पहुंचे डीएम, एसपी
हादसे के पौने दो घंटे तक मौके पर जिलाधिकारी और एसपी दस बजे तक मौके पर नहीं पहुंचे। यात्रियों की सुध लेने के लिए मौके पर एक भी जिम्मेदार अफसर मौके पर दस बजे तक नहीं पहुंचे थे।
यात्रियों को सुविधाएं मुहैया नहीं कराई गई
हादसे के बाद यात्रियों के सामने मंजिल तक पहुंचने की गंभीर समस्या बनी रही। 11 बजे तक यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाने के लिए संसाधन मुहैया नहीं कराए गए। आरपीएफ और जीआरपी और सिविल पुलिस के जवान यात्रियों को केवल झूठा आश्वासन देते रहे कि आगे रोडवेज की बसे लगाईं गई हैं। जबकि सड़क के दोनों छोर पर रोडवेज की एक भी बस 11 बजे तक दिखाई नहीं दी। दिखाई दी तो केवल एंबुलेंस और शव वाहन।
टेंपो चालकों ने की वसूली
ट्रेन यात्रियों को रोडवेज बस स्टेशन तक पहुंचने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ी। साधन सुलभ नहीं होने के कारण यात्रियों को मनमाना किराया चुकाना पड़ा। हादसा स्थल से रामपुर खास बस स्टेशन तक पहुंचने के लिए टेंपो चालकों ने प्रति यात्री बीस वसूल किए।