{"_id":"120-62462","slug":"Bareilly-62462-120","type":"story","status":"publish","title_hn":"अगले महीने चालू हो जाएगा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अगले महीने चालू हो जाएगा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट
Bareilly
Updated Thu, 14 Mar 2013 05:32 AM IST
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बरेली। सब कुछ ठीकठाक रहा तो सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट अगले महीने चालू हो जाएगा। प्लांट का एरिया ही अब टीन शेड से कवर्ड होना बाकी रह गया है। झाड़ियों को साफ कर पौपलर के पौधे लगाने का काम भी इसी महीने पूरा होना है। मेयर और नगर आयुक्त ने होली से पहले ही सारे अधूरे काम पूरे करने के निर्देश दिए हैं। प्लांट का उद्घाटन नगर विकास मंत्री मोहम्मद आजम खां करेंगे।
मेयर डॉ. आईएस तोमर और नगर आयुक्त उमेश प्रताप सिंह ने बुधवार को अपर नगर आयुक्त, नगर स्वास्थ्य अधिकारी और अधिशासी अभियंता के साथ रजऊ परसपुर पहुंचकर प्लांट चालू करने की संभावनाओं को परखा। नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने प्लांट से निकलने वाले पानी का परीक्षण किया। मेयर ने प्लांट लगाने वाली कंपनी के अधिकारी रनवीर सिंह को प्लांट की बदबू बाहर फैलने से रोकने को पूरे एरिया को टिन शेड से ढकने, परिसर में झाड़ियों की सफाई कराने और चारों ओर पौपलर के पेड़ लगाने का काम 25 मार्च तक पूरे कराने को कहा। मेयर ने बताया कि प्लांट लगाने का काम पूरा हो चुका है। वह नगर विकास मंत्री से समय लेकर अप्रैल के प्रथम सप्ताह में प्लांट का उद्घाटन करा देंगे। नगर आयुक्त ने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण पत्र भी मिल गया है।
तीन सौ मीट्रिक टन कूड़े की होगी खपत
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट में रोजाना लगभग तीन सौ मीट्रिक टन कूड़ा खपाने की क्षमता है। शुरूआती दौर में प्लांट में 250 मीट्रिक टन कूड़े की खपत होगी। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. आरएन गिरि ने बताया कि नगर निगम क्षेत्र से प्रतिदिन 150 से 200 मीट्रिक टन कूड़ा उठता है। बाकी कूड़े की भरपाई बाकरगंज के ट्रंचिंग ग्राउंड से भेजा जायेगा। प्लांट के चालू हो जाने से शहर को गंदगी से निजात मिलेगी। रजऊ परसखेड़ा में 21.20 एकड़ जमीन 1972 में ट्रंचिंग ग्राउंड बनाने के लिए अधिग्रहीत की गई थी। केंद्र सरकार के शहरी विकास मंत्रालय से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का प्रोजेक्ट वर्ष 2003 में आया। 13.26 करोड़ के इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य शहर के आसपास कूड़ा करकट खत्म करना है।
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मेयर पर भड़के कार्यकारिणी के सदस्य
बरेली। नगर निगम कार्यकारिणी के सदस्यों ने प्लांट के बारे में मेयर डॉ. तोमर के बयान पर नाराजगी जताई है। कार्यकारिणी के सभी सदस्यों ने कहा है कि वे इस बारे में खुद बैठक बुलाएंगे। इन्वर्टिस यूनिवर्सिटी के पास बन रहे प्लांट को शिफ्ट करने को लेकर कार्यकारिणी के सदस्य और मेयर आमने-सामने आ गए हैं। मेयर ने कहा है कि कार्यकारिणी के किसी भी पुराने फैसले को बदला नहीं जा सकता, जबकि सदस्यों का कहना है कि जनहित में प्लांट शिफ्ट होना चाहिए। वे इस मुद्दे पर बैठक बुलाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन मेयर ने इस प्रकरण पर बैठक बुलाने से इंकार कर दिया है। बुधवार को इन सदस्यों ने बैठक कर फैसला लिया कि वे अधिवेशन बुलाएंगे। निगम अधिनियम में इसका प्रावधान भी है। इस बारे में उन्होंने एक संयुक्त हस्ताक्षरयुक्त पत्र भी मेयर को सौंपा है।
तो किराये पर चल रही थी नगर निगम की जेसीबी!
बरेली। नगर आयुक्त ने बुधवार को नगर निगम की एक जेसीबी को निजी काम करते हुए पकड़ लिया। इस मामले में नगर स्वास्थ्य अधिकारी का जवाब तलब किया गया है। माडल टाउन में एक निजी कार्यक्रम के आयोजन के लिए नगर निगम की एक जेसीबी मशीन मिट्टी की खुदाई कर रही थी। इसकी जानकारी मिलने पर नगर आयुक्त ने चेकिंग कराई तो खुलासा हुआ कि विभागीय खर्चे पर मशीन से निजी कार्य कराया जा रहा था।
खर्च हो चुके हैं 40 करोड़
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट में अब तक 40 करोड़ लग चुके हैं। यह प्लांट पीपीपी मॉडल पर बनाया गया है। इसमें एकेसी कंपनी ने 27 करोड़ रुपये लगाए हैं, जबकि रक्षा मंत्रालय ने 13 करोड़ रुपये दिए हैं।
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मेयर डॉ. आईएस तोमर और नगर आयुक्त उमेश प्रताप सिंह ने बुधवार को अपर नगर आयुक्त, नगर स्वास्थ्य अधिकारी और अधिशासी अभियंता के साथ रजऊ परसपुर पहुंचकर प्लांट चालू करने की संभावनाओं को परखा। नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने प्लांट से निकलने वाले पानी का परीक्षण किया। मेयर ने प्लांट लगाने वाली कंपनी के अधिकारी रनवीर सिंह को प्लांट की बदबू बाहर फैलने से रोकने को पूरे एरिया को टिन शेड से ढकने, परिसर में झाड़ियों की सफाई कराने और चारों ओर पौपलर के पेड़ लगाने का काम 25 मार्च तक पूरे कराने को कहा। मेयर ने बताया कि प्लांट लगाने का काम पूरा हो चुका है। वह नगर विकास मंत्री से समय लेकर अप्रैल के प्रथम सप्ताह में प्लांट का उद्घाटन करा देंगे। नगर आयुक्त ने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण पत्र भी मिल गया है।
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तीन सौ मीट्रिक टन कूड़े की होगी खपत
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट में रोजाना लगभग तीन सौ मीट्रिक टन कूड़ा खपाने की क्षमता है। शुरूआती दौर में प्लांट में 250 मीट्रिक टन कूड़े की खपत होगी। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. आरएन गिरि ने बताया कि नगर निगम क्षेत्र से प्रतिदिन 150 से 200 मीट्रिक टन कूड़ा उठता है। बाकी कूड़े की भरपाई बाकरगंज के ट्रंचिंग ग्राउंड से भेजा जायेगा। प्लांट के चालू हो जाने से शहर को गंदगी से निजात मिलेगी। रजऊ परसखेड़ा में 21.20 एकड़ जमीन 1972 में ट्रंचिंग ग्राउंड बनाने के लिए अधिग्रहीत की गई थी। केंद्र सरकार के शहरी विकास मंत्रालय से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का प्रोजेक्ट वर्ष 2003 में आया। 13.26 करोड़ के इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य शहर के आसपास कूड़ा करकट खत्म करना है।
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मेयर पर भड़के कार्यकारिणी के सदस्य
बरेली। नगर निगम कार्यकारिणी के सदस्यों ने प्लांट के बारे में मेयर डॉ. तोमर के बयान पर नाराजगी जताई है। कार्यकारिणी के सभी सदस्यों ने कहा है कि वे इस बारे में खुद बैठक बुलाएंगे। इन्वर्टिस यूनिवर्सिटी के पास बन रहे प्लांट को शिफ्ट करने को लेकर कार्यकारिणी के सदस्य और मेयर आमने-सामने आ गए हैं। मेयर ने कहा है कि कार्यकारिणी के किसी भी पुराने फैसले को बदला नहीं जा सकता, जबकि सदस्यों का कहना है कि जनहित में प्लांट शिफ्ट होना चाहिए। वे इस मुद्दे पर बैठक बुलाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन मेयर ने इस प्रकरण पर बैठक बुलाने से इंकार कर दिया है। बुधवार को इन सदस्यों ने बैठक कर फैसला लिया कि वे अधिवेशन बुलाएंगे। निगम अधिनियम में इसका प्रावधान भी है। इस बारे में उन्होंने एक संयुक्त हस्ताक्षरयुक्त पत्र भी मेयर को सौंपा है।
तो किराये पर चल रही थी नगर निगम की जेसीबी!
बरेली। नगर आयुक्त ने बुधवार को नगर निगम की एक जेसीबी को निजी काम करते हुए पकड़ लिया। इस मामले में नगर स्वास्थ्य अधिकारी का जवाब तलब किया गया है। माडल टाउन में एक निजी कार्यक्रम के आयोजन के लिए नगर निगम की एक जेसीबी मशीन मिट्टी की खुदाई कर रही थी। इसकी जानकारी मिलने पर नगर आयुक्त ने चेकिंग कराई तो खुलासा हुआ कि विभागीय खर्चे पर मशीन से निजी कार्य कराया जा रहा था।
खर्च हो चुके हैं 40 करोड़
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट में अब तक 40 करोड़ लग चुके हैं। यह प्लांट पीपीपी मॉडल पर बनाया गया है। इसमें एकेसी कंपनी ने 27 करोड़ रुपये लगाए हैं, जबकि रक्षा मंत्रालय ने 13 करोड़ रुपये दिए हैं।