फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   संप्रेक्षण गृह कांड के लपेटे में केस वर्कर भी

संप्रेक्षण गृह कांड के लपेटे में केस वर्कर भी

Thu, 07 Mar 2013 05:32 AM IST
Bareilly
Bareilly Updated Thu, 07 Mar 2013 05:32 AM IST
विज्ञापन
बरेली। किला स्थित राजकीय संप्रेक्षण गृह (किशोर) में गत एक मार्च की शाम मंत्री के पहुंचने के बाद संवासियों के बवाल की जारी जांच में कई रोचक तथ्य सामने आये हैं। सबसे अहम यह कि छोटा को गृह लाने और उसके मौत होने के दौरान पुराने अधीक्षक क्षमानाथ राय छुट्टी पर थे। तब यहां का प्रभार केस वर्कर विकास चंद्र के पास था। ऐसे में अब जांच के लपेटे में यह भी निलंबित अधीक्षक के साथ आ गये हैं। मामले की मजिस्ट्रेटी जांच एसीएम द्वितीय लक्ष्मी शंकर सिंह ने शुरू कर दी है।
विज्ञापन

शासन से पूरे घटनाक्रम के संबंधी लगातार तलब की जा रही जानकारियों के मद्देनजर जिला प्रोवेशन अधिकारी (डीपीओ) ऊषा तिवारी ने पूरे घटनाक्रम के संबंध में प्रामाणिक ब्योरे जुटाये हैं। इसमें कई अहम तथ्य मिले हैं। पहला यह कि दो मार्च को न्यायिक जांच कर रहे जज ने सभी संवासियों को बयान के लिये तलब किया था। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि बयान दर्ज कराने से ऐन पहले की संध्या पर बवाल की सही वजह क्या रही? बवाल होने के चलते बयान दर्ज करने का मामला टल गया है। दूसरा बिंदु यह कि जिन चार संवासी को छोटा प्रकरण का खुलासा करने के चलते बाकी संवासियों के कोप का भाजन बनने की बात सामने आई है, वे सभी गृह में 13 फरवरी या उसके बाद रखे गये जबकि घटना 12 फरवरी की रात की थी। ऐसे में इन चारों के उस घटना के गवाह होने पर ही सवाल उठ खड़ा हुआ है।
विज्ञापन


10 संवासी हैं बालिग
बरेली। किला स्थित राजकीय संप्रेक्षण गृह की घटना पर शासन ने जिला प्रशासन से कई ब्योरे तलब किये हैं। शासन गृह में रखे गये संवासियों के मौजूदा उम्र की जानकारी मांगी है। इसमें यहां रखे गये 91 संवासी में 10 बालिग मिले हैं। इनकी उम्र 18 से ज्यादा और अधिकतम 21 वर्ष तक है। जिला प्रोवेशन अधिकारी ऊषा तिवारी ने इसकी पुष्टि की। बता दें कि बालिग संवासियों की यह संख्या घटना के बाद से ही अमर उजाला ने प्रकाशित की थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


कांड के बाद गृह में मनमाने हुए संवासी
बरेली। संप्रेक्षण गृह में बवाल थमने के बाद प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों भले ही मौके पर बने हुए हैं लेकिन बवाल काटने वाले संवासियों में कई अब भी मनमाना रवैया अपनाये हुए हैं। सुबह पांच से छह के बीच जगकर नित्य क्रिया से फारिग होकर प्रार्थना सभा में शामिल होने का रूटीन तय है। लेकिन कुछ तो दिन के 10 बजे जग रहे हैं और उसके बाद फ्रेश होते ही सुबह का ब्रेक फास्ट मांग रहे हैं जबकि तब तक लंच तैयार हो चुका रहता है। नये सहायक अधीक्षक डीपी सिंह के अनुसार, दिन में तीन - चार संवासियों से सीधी बातचीत की जा रही है। उनका रूटीन पहले की तुलना में अब काफी सुधर चला है। जल्द ही सब सामान्य होने की संभावना है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed