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पानी को तरस गए तमाम इलाकों के बाशिंदे

Bareilly Updated Mon, 14 May 2012 12:00 PM IST
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बिजली गुल होने से पेयजल आपूर्ति और काहिली से ज्यादातर हैंडपंप ठप
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बरेली। नए निजाम में बिजली की आपूर्ति में सुधार न होने से लोगों को जरूरत भर का पीने का पानी भी नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में जगह-जगह लगाए गए हैंडपंपों की उपयोगिता महसूस हो रही हैं। लेकिन, इनमें से ज्यादातर नल खराब हैं या फिर इनका पानी पीने लायक नहीं है। बाशिंदों को इस सवाल का जवाब नहीं मिल पा रहा है कि लगते ही खराब होने वाले इन नलों पर लाखों रुपये क्यों बहाया जाता है? खैर, यह सवाल तो हम सबके सामने हैं! शनिवार रात को आई आंधी और रविवार को हुई कटौती के चलते पानी के ओवरहेड टैंक भरे नहीं जा सके। नतीजतन, पूरे शहर में पानी को लेकर हायतौबा मची रही।
नगर निगम क्षेत्र में कुल 2768 हैंडपंप लगे हैं। इनके बूते पर इंतजामिया अपनी पीठ थपथपा रहे हैं कि कहीं कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन, हकीकत कुछ और ही बयान कर रही है। छोटे से इलाके जोगीनवादा में आठ हैंडपंप खराब हैं। ये हैं : श्मशान भूमि के पास वाला हैंडपंप, प्राइमरी पाठशाला, वनखंडी नाथ मंदिर परिसर में, उसके बैक साइड में, गल्ला मंडी और गोंसाई गौंटिया में लगा नल। यहां के रहने वाले हरिओम बताते हैं कि कई बार नगर निगम के प्रभारी जीएम आरवी राजपूत के हाथ में लिखित शिकायत देकर आए हैं, लेकिन नल ठीक नहीं हुए। पिछले साल कटरा चांद खां, जाटवपुरा और किशोर बाजार में 12 हैंडपंप लगाए गए थे। इनमें से किशोर बाजार में तीन और कटरा चांद खां में एक नल खराब हो चुका है। पिछले वित्तीय वर्ष में कुल 108 नल लगाए गए थे, जिनमें से आधे खराब हो चुके हैं। इनमें से एक चौथाई नल ऐसे हैं, जिनका पानी पीला होने या बदबू आने के चलते लोग इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं।
सूफी टोला के शबाब मियां पानी के लिए इन्हीं हैंडपंप पर निर्भर हैं। दो महीने पहले कोने वाले ताक और शेर खां स्कूल के पास लगा नल खराब हो गया। कहते हैं कि अब पानी के लिए पूरी तरह से नगर निगम पर निर्भर हो गए हैं और जिसके इंतजाम का कोई भरोसा नहीं कि कब धोखा दे जाए। मढ़ीनाथ में हनुमान मंदिर वाली गली में हैंडपंप रिबोर होना है। यहीं ललिता देवी मंदिर परिसर में लगा नल पिछले छह महीने से खराब है। चाहबाई को ओमदेव सक्सेना चित्रगुप्त मंदिर में लगे हैंडपंप को ठीक कराने के लिए लंबे समय से कोशिश कर रहे हैं, मगर अभी तक उन्हें कामयाबी नहीं मिली है। हैंडपंप खराब होने का सिलसिला यहीं नहीं रुका है। छोटी बमनपुरी में शिव मंदिर के पास, बिहारीपुर में कल्पना पब्लिक स्कूल के पास, बड़ी बमनपुरी में ट्रांसफार्मर वाली गली में, मलूकपुर में रावण वाली गली और पुलिस चौकी के पास लगा हैंडपंप खराब है। पुलिस चौकी के पास वाले हैंडपंप से बदबूदार पीला पानी आता है, जिसे लोग पीना तो दूर सूंघना पसंद नहीं करते। सौदागरान मोहल्ले में दो, खन्नू मोहल्ला और कन्हैया टोला में एक-एक हैंडपंप खराब है। यहां बता दें कि इंडिया मार्का एक हैंडपंप लगाने पर 34700 रुपये खर्च होते हैं। सूफी टोला के शबाब मियां को यह बताया गया तो उनका जवाब था कि फिर यह तीन महीने भी क्यों नहीं काम करते?

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पीला पानी आने की वजह
एक मिलियन (दस लाख) लीटर पानी में आयरन की मात्रा .5 पीपीएम से ज्यादा नहीं होना चाहिए। इससे ज्यादा मात्रा होने पर पानी पीला हो जाता है, जो सेहत के लिए नुकसानदायक भी है। बोरिंग में लगाए गए पाइप पर जिंक की कोट होती है, यह कोट हटने पर भी पीला पानी आने लगता है। पहली स्थिति में हैंडपंप को दूसरी जगह पर लगाना जरूरी होता है, जबकि दूसरी स्थिति में पाइप बदलकर काम चलाया जा सकता है। जल निगम के एक्सईएन का कहना है कि हैंडपंप लगाने से पहले पानी की जांच की जाती है कि कहीं उसमें आयरन की मात्रा तो ज्यादा नहीं है। लेकिन, वह इस सवाल का जवाब नहीं दे सके कि टेस्टिंग के बावजूद ऐसे हैंडपंपों की तादाद ज्यादा क्यों है, जिनसे पीला पानी आ रहा है।
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रखरखाव के अभाव में नगर निगम क्षेत्र में लगाए गए ज्यादातर नल खराब हो चुके हैं। नल लगाने के एक साल तक मरम्मत की जिम्मेदारी हमारी है, फिर इसे नगर निगम को हैंडओवर कर दिया जाता है। कभी रि-बोर के लिए नल उखाड़ते हैं, तो पता चलता है कि उसके नीचे के पाइप ही मिस्त्रियों ने गायब कर दिए हैं।- दिनेश चंद्रा, एक्सईएन, जल निगम
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जब भी किसी नल के खराब होने की सूचना हमें मिलती है, उसे फौरन सही करा दिया जाता है। औसतन, हर महीने सौ से डेढ़ सौ शिकायतें आती हैं। ज्यादातर नल सही हैं। शनिवार को नगर निगम की पेयजल आपूर्ति पर्याप्त बिजली न मिलने से प्रभावित हुई थी, लेकिन रविवार को करीब-करीब सभी टैंक भर लिए। जिससे दिक्कत कम हुई।-आरवी राजपूत, प्रभारी जीएम, जलकल विभाग
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कई इलाकों में पेयजल आपूर्ति ठप
शनिवार की रात सुभाषनगर उपकेंद्र के ट्रांसफार्मर पर पीपल का पेड़ गिर गया था। पास में ही ट्यूबवेल है। बिजली विभाग ने टहनियां हटाकर आपूर्ति तो चालू कर दी, मगर मोटर पेड़ के नीचे ही दबा रह गया। नतीजतन पूरे दिन पानी की जबरदस्त किल्लत रही। जगतपुर में ओवरहेड टैंक भरने के लिए एक ही पंप है। इसलिए यहां के बाशिंदों को न के बराबर पानी मिल पा रहा है। ख्वाजा कुतुब में पिछले आठ दिनों से जबरदस्त पानी की किल्लत है। जो लोग नगर निगम की लाइन से पानी लेने के लिए मोटर चला लेते हैं, उन्हें तो पानी मिल जाता है, बाकी लोग बेहद मुश्किल हैं। बिहारीपुर, मलूकपुर, बमनपुरी और चाहबाई इलाकों में भी पेयजल आपूर्ति की किल्लत बनी हुई है। सिविल लाइंस में भी बड़े डाकखाने के पीछे वाले ट्यूबवेल का मोटर खराब है, जिससे पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है।

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मढ़ीनाथ और कालीबाड़ी क्षेत्र के नल सही
मढ़ीनाथ और कालीबाड़ी क्षेत्र के ज्यादातर इंडिया मार्का हैंडपंप ठीक हैं, इससे लोगों को राहत है। लेकिन, ऐसी व्यवस्था अगर बाकी इलाकों में भी हो जाए तो मुसीबत काफी कम हो सकती है।

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