{"_id":"5c31154bbdec2256e517f364","slug":"91546720587-bareilly-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"उम्र भर किस किस के हिस्से का सफर मैने किया...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उम्र भर किस किस के हिस्से का सफर मैने किया...
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। अपनी जुबान और तहजीबो अदब को बढ़ा देने के लिए बज्म-ए-नूर की ओर आईएमए हाल में आल इंडिया मुशायरे का आयोजन किया गया। इसमें कई शहरों से आए शोअरा इकराम ने अपने कलाम से बरेली के श्रोताओं को आत्म विभोर कर दिया।
मुशायरे की महफिल एमएलसी एवं प्रसिद्ध शायर प्रोफेसर वसीम बरेलवी की सदारत में सजाई गई। महफिल में प्रोफेसर वसीम बरेलवी के कलाम पर श्रोताओं ने दिल भर कर दाद दी। खास कर इस पर कि- क्या बताऊं खुद को कैसा दर बदर मैने किया। उम्र भर किस किस के हिस्से का सफर मैने किया।। बार बार सुना गया।
इसी कड़ी में किच्छा के शायर राहिल सकलैनी का यह शेर कि- प्यास को जीते हुए उमर गुजरी लेकिन, किसी दरिया किसी बादल से शिकायत नहीं की। बेहद पसंद किया गया। इसी तरह सिया सचदेवा की गजल- शगुफ्ता लहजा ही पहचान बन गया ... और आजम शाकरी की नज्म- चराग बेखौफ जल रहे हैं हवा ने रोजा रखा हुआ है... पर खूब वाहवाही मिली।
विज्ञापन
यह मुशायरा बज्म के सरपरस्त मुंतखब अहमद नूर की सरपरस्ती में संपन्न हुआ। निजामत शायर नदीम फर्रूख ने किया। मुशायरे में कलाम पढ़ने वाले अन्य शायरों में नूर ककरालवी, अकील नोमानी, पवन कुमार, निशांत असीम, तहव्वर बदायूंनी, चांद ककरालवी, जमील उझानवी, ताहिर सकलैनी, ताहिर बरेलवी आदि रहे, जिनको पढ़ना बाकी था।
इस मौके पर महापौर उमेश गौतम, डीएमओ डा. जगमोहन सिंह, आईएमए अध्यक्ष डा. सत्येंद्र सिंह, डा. विनोद पगरानी, डा. जीडी कटियार, डा. सुनीता काटियार सहित कई अधिकारी व गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। आयोजन में बज्म के अध्यक्ष हाजी डा. हमीद उद्दीन सकलैनी, सचिव मुहम्मद हमजा नूर, कोषाध्यक्ष ताहिर नूर सकलैनी सहयोग रहा।
विज्ञापन
मुशायरे की महफिल एमएलसी एवं प्रसिद्ध शायर प्रोफेसर वसीम बरेलवी की सदारत में सजाई गई। महफिल में प्रोफेसर वसीम बरेलवी के कलाम पर श्रोताओं ने दिल भर कर दाद दी। खास कर इस पर कि- क्या बताऊं खुद को कैसा दर बदर मैने किया। उम्र भर किस किस के हिस्से का सफर मैने किया।। बार बार सुना गया।
विज्ञापन
इसी कड़ी में किच्छा के शायर राहिल सकलैनी का यह शेर कि- प्यास को जीते हुए उमर गुजरी लेकिन, किसी दरिया किसी बादल से शिकायत नहीं की। बेहद पसंद किया गया। इसी तरह सिया सचदेवा की गजल- शगुफ्ता लहजा ही पहचान बन गया ... और आजम शाकरी की नज्म- चराग बेखौफ जल रहे हैं हवा ने रोजा रखा हुआ है... पर खूब वाहवाही मिली।
विज्ञापन
यह मुशायरा बज्म के सरपरस्त मुंतखब अहमद नूर की सरपरस्ती में संपन्न हुआ। निजामत शायर नदीम फर्रूख ने किया। मुशायरे में कलाम पढ़ने वाले अन्य शायरों में नूर ककरालवी, अकील नोमानी, पवन कुमार, निशांत असीम, तहव्वर बदायूंनी, चांद ककरालवी, जमील उझानवी, ताहिर सकलैनी, ताहिर बरेलवी आदि रहे, जिनको पढ़ना बाकी था।
इस मौके पर महापौर उमेश गौतम, डीएमओ डा. जगमोहन सिंह, आईएमए अध्यक्ष डा. सत्येंद्र सिंह, डा. विनोद पगरानी, डा. जीडी कटियार, डा. सुनीता काटियार सहित कई अधिकारी व गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। आयोजन में बज्म के अध्यक्ष हाजी डा. हमीद उद्दीन सकलैनी, सचिव मुहम्मद हमजा नूर, कोषाध्यक्ष ताहिर नूर सकलैनी सहयोग रहा।