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दीन में कोई नई बात कुबूल नहीं
Updated Tue, 06 Nov 2018 02:38 AM IST
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बरेली। आला हजरत इमाम अहमद रजा खां कादरी फाजिले बरेलवी का सौवां इंटरनेशनल उर्स-ए-रजवी जानशीन एवं शहजादे ताजुश्शरीया मुफ्ती मोहम्मद असजद रजा खां कादरी की सरपरस्ती में मनाया गया। मथुरापुर स्थित जमीयतुर्रजा इस्लामिक स्टडी सेंटर हुए उर्स के दौरान पैगंबरे इस्लाम की सीरते पाक और आला हजरत एवं ताजुश्शरीया की दीनी खिदमात पर रोशनी डाली गई। साथ ही कहा गया कि दीन अपने आप में मुकम्मल है। अगर दीन में कोई नई बात लेकर आता है तो उसे कुबूल न किया जाए।
इस मौके पर जामिया अजहर लेबनान के डीन शेख इदरीस मोहम्मद यूसुफ जाफरी ने कहा, आला हजरत इमाम अहमद रजा और ताजुश्शरीया हजरत अख्तर रजा खां ने जो रास्ता दिखाया है, हमें उसी पर चलना चाहिए और बुजुर्गों से सच्ची मोहब्बत करनी चाहिए। अल्लामा जियाउल मुस्तफा ने कहा कि आला हजरत दीन के बहुत बड़े आलिम और मुजद्दि थे। उन्होेंने अपनी पूरी जिंदगी इस्लाम की हिफाजत में फना कर दी। शहजादे ताजुश्शरीया मुफ्ती असजद रजा खां ने कहा कि मसलके आला हजरत पर कायम रहें। इसकी तालीम हुजूर ताजुश्शरीया ने जिंदगी भर दी। अगर किसी को भी दीन से अलग दूसरे रास्ते पर चलता देखें या वह दीन में कोई नई बात ले कर आए तो उसे न मानें। अगर ‘मैं खुद भी इस मसलक से हट जाऊं तो मेरी भी मत मानो और मुझे भी छोड़ दो।’ इसके अलावा अल्लामा अब्दुल मुस्तफा रुदौलवी, मौलाना जियाउल मुस्तफा सहित कई देश विदेश के उलमा ने खिताब किया। इसके बाद 2:38 कुल शरीफ की रस्म अदा की गई।
बांटीं गईं ढाई लाख किताबें
बरेली। आला हजरत के कुल शरीफ के बाद जमीयतुर्रमा में उलमा और जायरीन को दो लाख 60 हजार किताबें मुफ्त बांटी र्गइं। इस संबंध में जमात रजा मुस्तफा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सलमान हसन खां कादरी (सलमान मियां) ने बताया कि इन किताबों में इंसान की जिंदगी के जरूरी मसलों का हल है। इसके अलावा यह भी बताया कि उर्स के मौके पर ताजुश्शरीया हजरत अजहरी मियां की मजारे पाक पर मदीना शरीफ से आई मिट्टी डाली गई है।
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मंच पर नहीं पहुंचे असहन मियां
बरेली। उर्स-ए-रजवी पर यह पहला मौका था जब दरगाह आला हजरत के सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा खां कादरी (अहसन मियां) इस्लामिया कॉलेज के मंच पर नहीं पहुंच पाए। इस संबंध में मंच से बताया गया कि तबीयत खराब होने के कारण वह नहीं आ पाए हैं।
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इस मौके पर जामिया अजहर लेबनान के डीन शेख इदरीस मोहम्मद यूसुफ जाफरी ने कहा, आला हजरत इमाम अहमद रजा और ताजुश्शरीया हजरत अख्तर रजा खां ने जो रास्ता दिखाया है, हमें उसी पर चलना चाहिए और बुजुर्गों से सच्ची मोहब्बत करनी चाहिए। अल्लामा जियाउल मुस्तफा ने कहा कि आला हजरत दीन के बहुत बड़े आलिम और मुजद्दि थे। उन्होेंने अपनी पूरी जिंदगी इस्लाम की हिफाजत में फना कर दी। शहजादे ताजुश्शरीया मुफ्ती असजद रजा खां ने कहा कि मसलके आला हजरत पर कायम रहें। इसकी तालीम हुजूर ताजुश्शरीया ने जिंदगी भर दी। अगर किसी को भी दीन से अलग दूसरे रास्ते पर चलता देखें या वह दीन में कोई नई बात ले कर आए तो उसे न मानें। अगर ‘मैं खुद भी इस मसलक से हट जाऊं तो मेरी भी मत मानो और मुझे भी छोड़ दो।’ इसके अलावा अल्लामा अब्दुल मुस्तफा रुदौलवी, मौलाना जियाउल मुस्तफा सहित कई देश विदेश के उलमा ने खिताब किया। इसके बाद 2:38 कुल शरीफ की रस्म अदा की गई।
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बांटीं गईं ढाई लाख किताबें
बरेली। आला हजरत के कुल शरीफ के बाद जमीयतुर्रमा में उलमा और जायरीन को दो लाख 60 हजार किताबें मुफ्त बांटी र्गइं। इस संबंध में जमात रजा मुस्तफा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सलमान हसन खां कादरी (सलमान मियां) ने बताया कि इन किताबों में इंसान की जिंदगी के जरूरी मसलों का हल है। इसके अलावा यह भी बताया कि उर्स के मौके पर ताजुश्शरीया हजरत अजहरी मियां की मजारे पाक पर मदीना शरीफ से आई मिट्टी डाली गई है।
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मंच पर नहीं पहुंचे असहन मियां
बरेली। उर्स-ए-रजवी पर यह पहला मौका था जब दरगाह आला हजरत के सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा खां कादरी (अहसन मियां) इस्लामिया कॉलेज के मंच पर नहीं पहुंच पाए। इस संबंध में मंच से बताया गया कि तबीयत खराब होने के कारण वह नहीं आ पाए हैं।