{"_id":"5bd9f293bdec226983027486","slug":"81541010067-bareilly-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सोलर एनर्जी से रोशन होगा आनंद आश्रम, 75 फीसदी निर्माण हुआ पूरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सोलर एनर्जी से रोशन होगा आनंद आश्रम, 75 फीसदी निर्माण हुआ पूरा
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Sun, 04 Nov 2018 12:59 AM IST
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रामपुर गार्डन स्थित आनंद आश्रम के पुनर्निर्माण का कार्य लगभग 75 फीसदी पूरा हो चुका है। आश्रम के संरक्षक महामंडलेश्वर ज्योतिर्मानंद के मुताबिक निर्माण कार्य पूरा होने के बाद आश्रम का सत्संग भवन दिल्ली स्थित अक्षरधाम मंदिर जैसा दिखेगा। खास बात यह कि पूरा मंदिर सोलर एनर्जी से जगमग होगा।
आर्किटेक्ट अनुपम सक्सेना बताते हैं कि आश्रम के सत्संग भवन और मुख्य प्रवेश द्वार को भारत के प्राचीन मंदिरों की तर्ज पर बनाया जा रहा है। इसमें बौद्ध स्तूप, अक्षरधाम समेत अन्य प्रसिद्ध मंदिरों की खूबियों को संजोने की कोशिश की गई है। मंदिर में उदयपुर का मिरर वर्क भी देखने को मिलेगा।
निर्माण में धौलपुर के पत्थर प्रयोग किए जा रहे हैं। मिरर वर्क की नक्काशी आश्रम को दर्शनीय बनाएगी। पहले जोधपुर का झूमर लगाने की भी योजना थी, लेकिन फिर इसे निरस्त कर दिया गया। करीब साल भर से चल रहे निर्माण कार्य में अब तक 85 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। कार्य पूरा होने तक खर्च एक करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
विज्ञापन
मंदिर से शुरू हो जागरूकता
आर्किटेक्ट के अनुसार मंदिर से जागरूकता का संदेश जाए, इसलिए मंदिर को सोलर पैनल से जगमग करने की योजना का प्रस्ताव रखा गया है। सत्संग भवन में लाउडस्पीकर का प्रयोग नहीं किया जाएगा। जो ध्वनि प्रदूषण के प्रति लोगों को जागरूक करेगा। साथ ही मंदिर में स्वच्छता बरकरार रखने के लिए जरूरी एहतियात का प्रस्ताव रखा है।
टर्की का कालीन होगा खास
आश्रम के पदाधिकारियों के मुताबिक एक श्रद्धालु ने कालीन दान देने को कहा है। ताकि सत्संग आदि प्रयोजनों में पहुंचने वाले लोग आराम से बैठ सकें। इसके लिए पूर्व में भदोही का कालीन बिछाने की योजना थी, लेकिन बाद में संबंधित दानदाता ने टर्की से कालीन मंगाने की बात कही। मंदिर के गुंबद भी पुराने मंदिरों की तर्ज पर बनेंगे।
विज्ञापन
आर्किटेक्ट अनुपम सक्सेना बताते हैं कि आश्रम के सत्संग भवन और मुख्य प्रवेश द्वार को भारत के प्राचीन मंदिरों की तर्ज पर बनाया जा रहा है। इसमें बौद्ध स्तूप, अक्षरधाम समेत अन्य प्रसिद्ध मंदिरों की खूबियों को संजोने की कोशिश की गई है। मंदिर में उदयपुर का मिरर वर्क भी देखने को मिलेगा।
विज्ञापन
निर्माण में धौलपुर के पत्थर प्रयोग किए जा रहे हैं। मिरर वर्क की नक्काशी आश्रम को दर्शनीय बनाएगी। पहले जोधपुर का झूमर लगाने की भी योजना थी, लेकिन फिर इसे निरस्त कर दिया गया। करीब साल भर से चल रहे निर्माण कार्य में अब तक 85 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। कार्य पूरा होने तक खर्च एक करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
विज्ञापन
मंदिर से शुरू हो जागरूकता
आर्किटेक्ट के अनुसार मंदिर से जागरूकता का संदेश जाए, इसलिए मंदिर को सोलर पैनल से जगमग करने की योजना का प्रस्ताव रखा गया है। सत्संग भवन में लाउडस्पीकर का प्रयोग नहीं किया जाएगा। जो ध्वनि प्रदूषण के प्रति लोगों को जागरूक करेगा। साथ ही मंदिर में स्वच्छता बरकरार रखने के लिए जरूरी एहतियात का प्रस्ताव रखा है।
टर्की का कालीन होगा खास
आश्रम के पदाधिकारियों के मुताबिक एक श्रद्धालु ने कालीन दान देने को कहा है। ताकि सत्संग आदि प्रयोजनों में पहुंचने वाले लोग आराम से बैठ सकें। इसके लिए पूर्व में भदोही का कालीन बिछाने की योजना थी, लेकिन बाद में संबंधित दानदाता ने टर्की से कालीन मंगाने की बात कही। मंदिर के गुंबद भी पुराने मंदिरों की तर्ज पर बनेंगे।