फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   तीन तलाक पर कानून: किसी को मिला चैन तो कोई है बेचैन

तीन तलाक पर कानून: किसी को मिला चैन तो कोई है बेचैन

Wed, 19 Sep 2018 11:40 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली Updated Wed, 19 Sep 2018 11:40 PM IST
विज्ञापन
तीन तलाक पर कानून: किसी को मिला चैन तो कोई है बेचैन
तीन तलाक पर कानून बनने से मुस्लिमों में काफी हलचल है। एक तरह जहां तीन तलाक पीड़ित महिलाओं में खुशी की लहर है और वे अध्यादेश का स्वागत कर रही हैं, वहीं आम मुस्लिमों में इसे लेकर खासी बेचैनी है। उलमा इसे शरीयत में हस्तक्षेप मान रहे हैं।
विज्ञापन


पीड़ित महिलाओं में खुशी की लहर
तीन तलाक पर अध्यादेश लागू होने पर तीन तलाक पीड़ित महिलाओं ने खुशी का इजहार किया है। ऐसी तमाम महिलाएं बुधवार को गढ़ैया स्थित मेरा हक फाउंडेशन के कार्यालय पर एकत्र हुईं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे इस बिल का स्वागत करती हैं और शुक्रगुजार हैं कि प्रधानमंत्री ने उनकी आवाज सुनी और कानून बनाने की मंजूरी दी। इससे उम्मीद जगी है कि अब उन्हें इंसाफ मिल सकेगा। इन महिलाओं मेें आयशा अंसारी, रूबीना खातून, तैयबा सोमन, समीना, रानी आदि मौजूद रहीं।
विज्ञापन


फरहत बोलीं- अध्यादेश से बढ़ेगी महिलाओं की ताकत
इस मुद्दे पर तीन तलाक पीड़ित महिलाओं की लड़ाई लड़ रहीं मेरा हक फाउंडेशन की अध्यक्ष फरहत नकवी ने कहा है कि अध्यादेश से महिलाओं की ताकत बढ़ी है। उन्होंने कहा कि इतने वक्त से महिलाएं तीन तलाक पर कानून के लिए संघर्ष कर रही थीं। बीच में वे मायूस जरूर हो गईं जब शीतकालीन संसद सत्र में कांग्रेस ने बिल रोक दिया और ऊपर से मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने विरोध शुरू कर दिया था। महिलाओं ने तीन तलाक के खिलाफ आवाज उठाने के लिए रैली निकाली प्रदर्शन किया। मेरा हक फाउंडेशन ने भी आवाज उठाई। यहां तक कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को बिल का समर्थन करने के लिए पत्र भी भेजे। उन्होंने कहा कि तीन तलाक का बिल राजनीतिक मुद्दा नहीं है बल्कि महिलाओं के हक से जुड़ा मसला है। उन्होंने प्रधानमंत्री से यह उम्मीद भी जताई कि पीड़ित महिलाओं को रोजगार और उनके बच्चों के भविष्य के बारे में भी विचार करेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन


उलमा बिल से नहीं हैं सहमत
केंद्र सरकार का तीन तलाक पर कानून मुसलमानों में बेचैनी का सबब बन गया है। इस मुद्दे पर तंजीम उलमा इस्लाम के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा है कि इस कानून में अगर शरीयत की धाराओं का ख्याल रखा गया है और कानून का कुरान और हदीस से टकराव नहीं होता है तो इसे कुबूल करने में कोई हर्ज नहीं है। अगर ऐसा नहीं है तो फिर मुस्लिम समाज में परिवार का ताना बाना बिखर जाएगा। घर घर समस्याएं उत्पन्न होंगी और कोर्ट कचहरी में मुकदमों की संख्या बढ़ा जाएगी। इससे देश में दो तरह की धाराएं बन जाएंगी। एक समाज का वह तबका होगा जो रोजाना की जिंदगी शरीयत के मुताबिक अमल करने की कोशिश करता है और दूसरा वह तबका जो कानून का हवाला देकर उस पर अमल करने की कोशिश करेगा। ऐसे में दोनों पक्षों में टकराव की सूरत पैदा हो जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed