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बीमार है जिला अस्पताल का सिस्टम.. यहां जरा बचकर रहें
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बरेली। सिस्टम की लापरवाही ने जिला अस्पताल को इस हालत में पहुंचा दिया है कि यहां इलाज कराने आने वालों को भी खुद को दूसरी बीमारियों से बचाने की जरूरत पड़ रही है। पिछले साल जिले भर में फैले फैल्सीफैरम मलेरिया के सैकड़ों लोगों की जान लेने के बाद स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने जिला अस्पताल का दौरा किया था, तब भी यहां काफी बुरा हाल पाया गया था। लापरवाही की हद देखने के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने कई लोगों को नाप दिया था, महिला अस्पताल की सीएमएस तक को यहां से हटना पड़ा लेकिन जिला अस्पताल का हाल नहीं बदला।
जिला अस्पताल के जनरल वार्ड में भर्ती रहते हुए फैल्सीफैरम मलेरिया के शिकार हुए सुभाषनगर के मरीज अशोक कुमार की पत्नी आशा ने बताया कि उनके पति कई दिनों से सीने में दर्द से परेशान थे। सात मई को जिला अस्पताल के जिस वार्ड में उन्हें भर्ती किया गया, वहां काफी गंदगी थी। शौचालय की सफाई पता नहीं कबसे नहीं हुई थी, बदबू की वजह से तीमारदारों का भी वार्ड में ठहरना मुश्किल हो जाता था। निशू के पिता महेशपाल ने भी इसकी पुष्टि की। कहा कि उनके बेटे को इमरजेंसी से जनरल वार्ड में शिफ्ट किया गया था। वहां गंदगी तो थी ही, सबसे बुरा हाल शौचालय और उसके आसपास था। मक्खी-मच्छरों की भी भरमार थी। वह समझ नहीं पा रहे हैं कि पांच दिन से अस्पताल में भर्ती उनके बेटे को फैल्सीफैरम मलेरिया कैसे हो गया। उन्होंने बताया कि इस बारे में कई बार स्टाफ से भी बात की, लेकिन कोई समस्या सुनने तक को तैयार नहीं हुआ।
तीन से पांच दिन के अंदर
प्रकट होते हैं लक्षण
मलेरिया परजीवी का मानव शरीर में दो चरणों में विकास होता है। पहले चरण में यकृत यानी लिवर और दूसरे चरण में लाल रक्त कोशिकाओं पर असर होता है। जब कोई संक्रमित मच्छर किसी आदमी को काटता है तो बीजाणु उसके शरीर में पहुंचकर 30 मिनट के अंदर लिवर की कोशिकाओं को संक्रमित कर देते हैं और फिर लिवर में ही अलैंगिक जनन करने लगते हैं। हजारों बीजाणु पैदा होने के बाद रक्त प्रवाह में शामिल हो जाते हैं और लाल रक्त कोशिकाओं को नष्ट करना शुरू कर देते हैं। शहर के फिजीशियन डॉ. सुदीप सरन ने बताया कि मच्छर के काटने के बाद तीन से पांच दिन का इंक्यूशन पीरियड होता है। इसके बाद बीमारी के लक्षण मरीज में दिखने लगते हैं। जिला मलेरिया निरीक्षक गुलशन के मुताबिक मच्छर काटने के बाद उसका परजीवी शरीर में असर तीन से सात दिन में दिखाता है। खास बात यह है कि जिला अस्पताल में फैल्सीफैरम मलेरिया का शिकार हुए निशू पांच दिन और अशोक कुमार आठ दिन से भर्ती हैं।
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दोनों मरीजों को फैल्सीफैरम मलेरिया से पीड़ित होने के पीछे कोई लापरवाही नहीं है। जांच रिपोर्ट में पुष्टि के बाद ही डॉक्टरों को यह जानकारी हुई कि उन्हें फैल्सीफैरम मलेरिया है। उसके बाद उन्हें अलग वार्ड में शिफ्ट कर उनका इलाज शुरू कर दिया गया है। - डॉ. केएस गुप्ता, सीएमएस पुरुष अस्पताल
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जिला अस्पताल के जनरल वार्ड में भर्ती रहते हुए फैल्सीफैरम मलेरिया के शिकार हुए सुभाषनगर के मरीज अशोक कुमार की पत्नी आशा ने बताया कि उनके पति कई दिनों से सीने में दर्द से परेशान थे। सात मई को जिला अस्पताल के जिस वार्ड में उन्हें भर्ती किया गया, वहां काफी गंदगी थी। शौचालय की सफाई पता नहीं कबसे नहीं हुई थी, बदबू की वजह से तीमारदारों का भी वार्ड में ठहरना मुश्किल हो जाता था। निशू के पिता महेशपाल ने भी इसकी पुष्टि की। कहा कि उनके बेटे को इमरजेंसी से जनरल वार्ड में शिफ्ट किया गया था। वहां गंदगी तो थी ही, सबसे बुरा हाल शौचालय और उसके आसपास था। मक्खी-मच्छरों की भी भरमार थी। वह समझ नहीं पा रहे हैं कि पांच दिन से अस्पताल में भर्ती उनके बेटे को फैल्सीफैरम मलेरिया कैसे हो गया। उन्होंने बताया कि इस बारे में कई बार स्टाफ से भी बात की, लेकिन कोई समस्या सुनने तक को तैयार नहीं हुआ।
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तीन से पांच दिन के अंदर
प्रकट होते हैं लक्षण
मलेरिया परजीवी का मानव शरीर में दो चरणों में विकास होता है। पहले चरण में यकृत यानी लिवर और दूसरे चरण में लाल रक्त कोशिकाओं पर असर होता है। जब कोई संक्रमित मच्छर किसी आदमी को काटता है तो बीजाणु उसके शरीर में पहुंचकर 30 मिनट के अंदर लिवर की कोशिकाओं को संक्रमित कर देते हैं और फिर लिवर में ही अलैंगिक जनन करने लगते हैं। हजारों बीजाणु पैदा होने के बाद रक्त प्रवाह में शामिल हो जाते हैं और लाल रक्त कोशिकाओं को नष्ट करना शुरू कर देते हैं। शहर के फिजीशियन डॉ. सुदीप सरन ने बताया कि मच्छर के काटने के बाद तीन से पांच दिन का इंक्यूशन पीरियड होता है। इसके बाद बीमारी के लक्षण मरीज में दिखने लगते हैं। जिला मलेरिया निरीक्षक गुलशन के मुताबिक मच्छर काटने के बाद उसका परजीवी शरीर में असर तीन से सात दिन में दिखाता है। खास बात यह है कि जिला अस्पताल में फैल्सीफैरम मलेरिया का शिकार हुए निशू पांच दिन और अशोक कुमार आठ दिन से भर्ती हैं।
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दोनों मरीजों को फैल्सीफैरम मलेरिया से पीड़ित होने के पीछे कोई लापरवाही नहीं है। जांच रिपोर्ट में पुष्टि के बाद ही डॉक्टरों को यह जानकारी हुई कि उन्हें फैल्सीफैरम मलेरिया है। उसके बाद उन्हें अलग वार्ड में शिफ्ट कर उनका इलाज शुरू कर दिया गया है। - डॉ. केएस गुप्ता, सीएमएस पुरुष अस्पताल