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इंस्पेक्टर का कॉलर पकड़ा तो आरआरएफ ने उठा ली लाठी
Updated Sat, 29 Jul 2017 01:45 AM IST
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इंस्पेक्टर का कॉलर पकड़ा तो आरआरएफ ने उठा ली लाठी
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
बरेली।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय में लाठी चार्ज की घटना कहीं न कहीं गलतफहमी के चलते हुई। हालांकि एबीवीपी के उग्र रवैये से निपटने के लिए कैंपस में काफी फोर्स तैनात था। शुक्रवार को विवि कैंपस छावनी बन गया था।
एबीवीपी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं पर लाठियां बरसने का कारण बनी एलआईआयू इंस्पेक्टर के साथ बदसलूकी। दरअसल, कार्यकर्ता जिसको विवि का कर्मचारी समझ बैठे और उसका कॉलर पकड़कर नीचे खींचने लगे और मारपीट की नौबत आ गई असल में वह एलआईआयू इंस्पेक्टर था। हालांकि कुछ एबीवीपी पदाधिकारी बीच बचाव में भी जुटे थे। उसी दौरान गाली गलौज शुरू हो गई। पुलिस कर्मी बीच में आए तो उनके साथ भी धक्कामुक्की होने लगी। प्रशासनिक भवन में आरआरएफ के जवान बिल्कुल तैयार खड़े थे। चार से पांच जवान कार्यकर्ताओं को ललकारते हुए लाठी लेकर दौड़ पड़े। लाठियां चलते ही प्रशासनिक भवन के बाहर भगदड़ मची। फोर्स कार्यकर्ताओं पर लाठियां बरसाते हुए उन्हें कैंपस के बाहर खदेड़ आई।
नहीं पता किसके इशारे पर चलीं लाठियां
कुलपति ने साफ इन्कार कर दिया कि उनके इशारे में लाठियां नहीं चलीं। अब सवाल उठता है कि फोर्स ने किसके इशारे में छात्रों पर लाठियां बरसाना शुरू किया। अधिकतर छात्र इंटर कॉलेजों के थे। कैंपस में इतना फोर्स था कि वह सब एक साथ खड़े हो जाते तो वह दबाव में आ जाते। बावजूद इसके अचानक लाठी चार्ज कैसे हो गया। हालांकि अब कुलपति ने चीफ प्रॉक्टर बीआर कुकरेती को इसकी जांच सौंपी है।
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आम छात्र भी हुए परेशान
हंगामे के चलते आम छात्रों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। लाठी चार्ज होते ही विवि में किसी न किसी काम से आए छात्र भी भाग खड़े हुए। कुछ साइकिल स्टैंड की तरफ गए तो कुछ कैंटीन की तरफ चले गए।
दस छात्र हुए घायल
लाठी चार्ज होते ही भगदड़ मची। कुछ फोर्स की लाठियों से तो कुछ गिरकर, दस छात्र इस घटना में घायल हुए हैं। हर्ष अग्रवाल, प्रशांत देवेल, आशीष भट्ट, सुरजीत, हिमांशु, आशीष हिंदू, निशांत यादव, आशीष पाठक, अभिषेक भारद्वाज, सूरज मिश्रा घटना में घायल हुए। किसी के पैर में चोट लगी तो किसी के हाथ में। सभी को मेडिकल के लिए भेजा गया है।
सूचना मिलते ही कैंपस पहुंचे भाजपा नेता
कैंपस से बाहर खदेड़े जाने के बाद कार्यकर्ताओं ने इसकी सूचना भाजपा नेताओं का दी। भाजपा जिलाध्यक्ष रविन्द्र सिंह राठौर, महानगर अध्यक्ष उमेश कठेरिया, उपाध्यक्ष देवेन्द्र जोशी, महामंत्री यतिन भाटिया, दुर्विजय सिंह शाक्य, प्रतेश पांडेय, अंकुश अग्रवाल, पवन शर्मा, आदेश प्रताप सिंह, पुष्पेन्द्र शर्मा समेत कई नेता पहुुंच गए। करीब एक घंटे तक कुलपति कार्यालय में वार्ता होती रही। कुछ भाजपा नेताओं और कुलपति के बीच हॉटटॉक भी हो गई। उनका कहना था कि छात्र हैं कोई आतंकवादी नहीं, जो फोर्स से लाठियां बरसाई गईं। कुलपति ने स्पष्ट कह दिया कि लाठी चार्ज किसके इशारे पर हुआ उनको जानकारी नहीं। जांच कराई जाएगी। साथ ही कहा कि सुरक्षा प्रभारी को हटाया जाएगा।
सुबह से ही तैनात था काफी फोर्स
विवि प्रशासन को पहले से ही आभास था कि माहौल ज्यादा ही बिगड़ सकता है। पुलिस के साथ आरआरएफ जवानों की भी एक वैन भरकर आई थी। लाठी चार्ज के बाद भी एक वैन भरकर आई। सारी फोर्स प्रशासनिक भवन के बाहर तैनात हो गई। हंगामा समाप्त होने के बाद भी कैंपस में फोर्स तैनात रहा।
नारेबाजी करते हुए फिर पहुंचे कैंपस
कार्यकर्ता विवि गेट के सामने करीब आधा घंटे भाजपा नेताओं के इंतजार में खड़े रहे। भाजपा नेताओं के पहुंचते ही कार्यकर्ता फिर एकजुट हुए और विवि प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रशासनिक भवन के पास पहुंच गए। चैनल गेट पर भी सुरक्षा प्रभारी, पुलिस कर्मियों के साथ भाजपा नेताओं की नोकझोंक हुई।
पंद्रह मिनट बाद वार्ता को बुलाया
गेट पर काफी हंगामा होने लगा। कार्यकर्ता चैनल गेट पर चढ़ गए। नारेबाजी की। सीओ नीति द्विवेदी भी फोर्स के साथ पहुंच गईं। भाजपा नेताओं को काफी समझाने की कोशिश की। करीब पंद्रह मिनट बाद कुलपति ने भाजपा नेताओं को वार्ता के लिए बुलाया।
कुलपति बोले, मैं दबाव में नहीं आने वाला
कुलपति कार्यालय में काफी नोकझोंक हो रही थी, उसी दौरान कुलपति बोल बैठे कि मैं किसी के दबाव में नहीं आने वाला। इस बात पर भाजपा नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई। भाजपा के महामंत्री यतिन भाटिया ने पहले सम्मान से फिर उग्र होते हुए कहा, एक मिनट शुक्ला, दबाव बनाना होता तो बाहर बैठ जाते। छात्र हैं कोई आतंकवादी नहीं जो इन पर लाठियां चलवा दीं। हालांकि कुलपति ने बाद में कहा कि उन्होंने इस संदर्भ में यह बात नहीं कही।
कैंपस है कोई निजी दरबार नहीं जो कुलसचिव पर्ची लगवाते हैं
कुलसचिव के रवैये के प्रति भी कार्यकर्ताओं में काफी रोष था। दरअसल, नए कुलसचिव एके अरविंद बिना पर्ची के किसी से नहीं मिलते। गेट के बाहर दो सुरक्षा कर्मी बंदूक के साथ तैनात रखते हैं। हालांकि विवि में ऐसा पहली बार ही हो रहा है। एबीवीपी कार्यकर्ताओं का कहना था कि छात्र मुरादाबाद, बिजनौर, चंदौसी कई जिलों से आते हैं। कुलसचिव के एक हस्ताक्षर के लिए उनको घंटों इंतजार करना पड़ता है। अंदर जाते वक्त गार्ड भी बदसलूकी करते हैं। कुलपति ने कहा कि अगर इससे आपत्ति है तो अब से कुलसचिव कार्यालय में पर्ची नहीं लगेगी।
भाजपा नेता बोले, छात्र उग्र होते तो अभी क्या से क्या हो जाता
कुलपति कार्यालय में भाजपा नेताओं में काफी रोष था। एक नेता तो यहां तक कह गए कि अगर छात्र उग्र हो जाएं तो कैंपस में क्या से क्या हो जाएगा। कुलपति की मेज उठाते हुए कहा कि अभी सब उलट-पलट हो जाएगा।
सत्ता पक्ष की भी गूंजती रहीं बातें
हंगामे के दौरान कुलपति कार्यालय में सत्ता पक्ष की भी बातें गूंजती रहीं। भाजपा नेताओं का कहना था कि एबीवीपी के नेता हंगामा नहीं करते। अगर अन्य किसी की सरकार होती और कोई दूसरा संगठन होता तो कैंपस में आग लग जाती। बातों बातों पर भाजपा के बड़े नेताओें के नाम भी आते रहे।
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रुहेलखंड विश्वविद्यालय में लाठी चार्ज की घटना कहीं न कहीं गलतफहमी के चलते हुई। हालांकि एबीवीपी के उग्र रवैये से निपटने के लिए कैंपस में काफी फोर्स तैनात था। शुक्रवार को विवि कैंपस छावनी बन गया था।
एबीवीपी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं पर लाठियां बरसने का कारण बनी एलआईआयू इंस्पेक्टर के साथ बदसलूकी। दरअसल, कार्यकर्ता जिसको विवि का कर्मचारी समझ बैठे और उसका कॉलर पकड़कर नीचे खींचने लगे और मारपीट की नौबत आ गई असल में वह एलआईआयू इंस्पेक्टर था। हालांकि कुछ एबीवीपी पदाधिकारी बीच बचाव में भी जुटे थे। उसी दौरान गाली गलौज शुरू हो गई। पुलिस कर्मी बीच में आए तो उनके साथ भी धक्कामुक्की होने लगी। प्रशासनिक भवन में आरआरएफ के जवान बिल्कुल तैयार खड़े थे। चार से पांच जवान कार्यकर्ताओं को ललकारते हुए लाठी लेकर दौड़ पड़े। लाठियां चलते ही प्रशासनिक भवन के बाहर भगदड़ मची। फोर्स कार्यकर्ताओं पर लाठियां बरसाते हुए उन्हें कैंपस के बाहर खदेड़ आई।
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नहीं पता किसके इशारे पर चलीं लाठियां
कुलपति ने साफ इन्कार कर दिया कि उनके इशारे में लाठियां नहीं चलीं। अब सवाल उठता है कि फोर्स ने किसके इशारे में छात्रों पर लाठियां बरसाना शुरू किया। अधिकतर छात्र इंटर कॉलेजों के थे। कैंपस में इतना फोर्स था कि वह सब एक साथ खड़े हो जाते तो वह दबाव में आ जाते। बावजूद इसके अचानक लाठी चार्ज कैसे हो गया। हालांकि अब कुलपति ने चीफ प्रॉक्टर बीआर कुकरेती को इसकी जांच सौंपी है।
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आम छात्र भी हुए परेशान
हंगामे के चलते आम छात्रों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। लाठी चार्ज होते ही विवि में किसी न किसी काम से आए छात्र भी भाग खड़े हुए। कुछ साइकिल स्टैंड की तरफ गए तो कुछ कैंटीन की तरफ चले गए।
दस छात्र हुए घायल
लाठी चार्ज होते ही भगदड़ मची। कुछ फोर्स की लाठियों से तो कुछ गिरकर, दस छात्र इस घटना में घायल हुए हैं। हर्ष अग्रवाल, प्रशांत देवेल, आशीष भट्ट, सुरजीत, हिमांशु, आशीष हिंदू, निशांत यादव, आशीष पाठक, अभिषेक भारद्वाज, सूरज मिश्रा घटना में घायल हुए। किसी के पैर में चोट लगी तो किसी के हाथ में। सभी को मेडिकल के लिए भेजा गया है।
सूचना मिलते ही कैंपस पहुंचे भाजपा नेता
कैंपस से बाहर खदेड़े जाने के बाद कार्यकर्ताओं ने इसकी सूचना भाजपा नेताओं का दी। भाजपा जिलाध्यक्ष रविन्द्र सिंह राठौर, महानगर अध्यक्ष उमेश कठेरिया, उपाध्यक्ष देवेन्द्र जोशी, महामंत्री यतिन भाटिया, दुर्विजय सिंह शाक्य, प्रतेश पांडेय, अंकुश अग्रवाल, पवन शर्मा, आदेश प्रताप सिंह, पुष्पेन्द्र शर्मा समेत कई नेता पहुुंच गए। करीब एक घंटे तक कुलपति कार्यालय में वार्ता होती रही। कुछ भाजपा नेताओं और कुलपति के बीच हॉटटॉक भी हो गई। उनका कहना था कि छात्र हैं कोई आतंकवादी नहीं, जो फोर्स से लाठियां बरसाई गईं। कुलपति ने स्पष्ट कह दिया कि लाठी चार्ज किसके इशारे पर हुआ उनको जानकारी नहीं। जांच कराई जाएगी। साथ ही कहा कि सुरक्षा प्रभारी को हटाया जाएगा।
सुबह से ही तैनात था काफी फोर्स
विवि प्रशासन को पहले से ही आभास था कि माहौल ज्यादा ही बिगड़ सकता है। पुलिस के साथ आरआरएफ जवानों की भी एक वैन भरकर आई थी। लाठी चार्ज के बाद भी एक वैन भरकर आई। सारी फोर्स प्रशासनिक भवन के बाहर तैनात हो गई। हंगामा समाप्त होने के बाद भी कैंपस में फोर्स तैनात रहा।
नारेबाजी करते हुए फिर पहुंचे कैंपस
कार्यकर्ता विवि गेट के सामने करीब आधा घंटे भाजपा नेताओं के इंतजार में खड़े रहे। भाजपा नेताओं के पहुंचते ही कार्यकर्ता फिर एकजुट हुए और विवि प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रशासनिक भवन के पास पहुंच गए। चैनल गेट पर भी सुरक्षा प्रभारी, पुलिस कर्मियों के साथ भाजपा नेताओं की नोकझोंक हुई।
पंद्रह मिनट बाद वार्ता को बुलाया
गेट पर काफी हंगामा होने लगा। कार्यकर्ता चैनल गेट पर चढ़ गए। नारेबाजी की। सीओ नीति द्विवेदी भी फोर्स के साथ पहुंच गईं। भाजपा नेताओं को काफी समझाने की कोशिश की। करीब पंद्रह मिनट बाद कुलपति ने भाजपा नेताओं को वार्ता के लिए बुलाया।
कुलपति बोले, मैं दबाव में नहीं आने वाला
कुलपति कार्यालय में काफी नोकझोंक हो रही थी, उसी दौरान कुलपति बोल बैठे कि मैं किसी के दबाव में नहीं आने वाला। इस बात पर भाजपा नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई। भाजपा के महामंत्री यतिन भाटिया ने पहले सम्मान से फिर उग्र होते हुए कहा, एक मिनट शुक्ला, दबाव बनाना होता तो बाहर बैठ जाते। छात्र हैं कोई आतंकवादी नहीं जो इन पर लाठियां चलवा दीं। हालांकि कुलपति ने बाद में कहा कि उन्होंने इस संदर्भ में यह बात नहीं कही।
कैंपस है कोई निजी दरबार नहीं जो कुलसचिव पर्ची लगवाते हैं
कुलसचिव के रवैये के प्रति भी कार्यकर्ताओं में काफी रोष था। दरअसल, नए कुलसचिव एके अरविंद बिना पर्ची के किसी से नहीं मिलते। गेट के बाहर दो सुरक्षा कर्मी बंदूक के साथ तैनात रखते हैं। हालांकि विवि में ऐसा पहली बार ही हो रहा है। एबीवीपी कार्यकर्ताओं का कहना था कि छात्र मुरादाबाद, बिजनौर, चंदौसी कई जिलों से आते हैं। कुलसचिव के एक हस्ताक्षर के लिए उनको घंटों इंतजार करना पड़ता है। अंदर जाते वक्त गार्ड भी बदसलूकी करते हैं। कुलपति ने कहा कि अगर इससे आपत्ति है तो अब से कुलसचिव कार्यालय में पर्ची नहीं लगेगी।
भाजपा नेता बोले, छात्र उग्र होते तो अभी क्या से क्या हो जाता
कुलपति कार्यालय में भाजपा नेताओं में काफी रोष था। एक नेता तो यहां तक कह गए कि अगर छात्र उग्र हो जाएं तो कैंपस में क्या से क्या हो जाएगा। कुलपति की मेज उठाते हुए कहा कि अभी सब उलट-पलट हो जाएगा।
सत्ता पक्ष की भी गूंजती रहीं बातें
हंगामे के दौरान कुलपति कार्यालय में सत्ता पक्ष की भी बातें गूंजती रहीं। भाजपा नेताओं का कहना था कि एबीवीपी के नेता हंगामा नहीं करते। अगर अन्य किसी की सरकार होती और कोई दूसरा संगठन होता तो कैंपस में आग लग जाती। बातों बातों पर भाजपा के बड़े नेताओें के नाम भी आते रहे।