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मगर, पैरेंट्स को फीस कटौती पर कोई जवाब नहीं 

Thu, 26 Apr 2018 07:26 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली Updated Thu, 26 Apr 2018 07:26 PM IST
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52 complaints unnoticed on fees structure
डेमो - फोटो : डेमो
निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली के खिलाफ राज्य सरकार ने भले ही अध्यादेश लागू कर दिया है, लेकिन प्रशासन के कार्रवाई न करने से यह निरुद्देश्य हो गया है। नया शैक्षिक सत्र शुरू हो चुका है। अभिभावक इस इंतजार में अपने बच्चों की फीस जमा नहीं कर रहे कि शायद अध्यादेश लागू हो तो उनको कम फीस कम जमा करनी पड़े। मगर, अफसर पहले कहते थे कि शिकायतें आएंगी तो स्कूलों पर कार्रवाई करेंगे। मगर, अब शिकायतें भी आने लगीं तो भी किसी न किसी चीज की आड़ लेकर कार्रवाई न करके टालमटोल कर रहे हैं। 
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कान्वेंट और अन्य प्राइवेट स्कूलों में एक अप्रैल से नया शैक्षिक सत्र शुरू हो चुका है। निजी स्कूलों के किसी भी हाल में 20 हजार रुपये से अधिक फीस न वसूलने का प्रावधान है। पैरेंट्स की शिकायत पर पहली बार अध्यादेश न मानने वाले स्कूलों पर एक लाख, दूसरी बार अध्यादेश का उल्लंघन करने पर पांच लाख का जुर्माना वसूला जाना है। तीसरी बार अध्यादेश के उल्लंघन पर संबंधित स्कूल की मान्यता तक रद्द की जा सकती है। शहर में अधिकांश निजी स्कूल अध्यादेश में तय सीमा से दो से तीन गुना ज्यादा फीस वसूल चुके हैं। कुछ पैरेंट्स इस इंतजार में हैं कि शायद अध्यादेश सख्ती से लागू हो जाए तो उनको अपने बच्चे की फीस 20 हजार से कम जमा करनी पड़े। प्रशासन ने पैरेंट्स की शिकायतें सुनने के लिए डीआईओएस दफ्तर में कंट्रोल रूम भी खोला। इसमें तीन दिन के अंदर 52 से ज्यादा पैरेंट्स शहर के नामचीन स्कूलों की तय सीमा से अधिक फीस वसूलने भी शिकायतें दर्ज करा चुके हैं, मगर प्रशासन अब इसमें टालमटोल कर पैरेेंट्स की शिकायतों पर जांच कर कार्रवाई करने के बजाय संबंधित स्कूल के प्रिंसिपल को ही भेजकर 15 दिन में समस्या का समाधान करने की बात कह रहा है। यह सीधे तौर पर अध्यादेश के नियमों का पालन करने का बहाना भर है। अगर प्रशासन को सरकार के अध्यादेश का पालन ही कराना होता तो पैरेंट्स के नाम गोपनीय रखकर संबंधित स्कूल में टीम भेजकर जांच कराई जा सकती थी। स्टूडेंट्स की फीस रसीद देखकर भी प्रशासन अध्यादेश के नियमों का पालन करा सकता है, मगर अध्यादेश की कापी इधर से उधर घूम रही है। पैरेंट्स इसमें उलझकर रह गए हैं। निजी स्कूलों को इस सत्र में मनमानी फीस वसूलने की अघोषित छूट मिल गई है।  
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तीसरे दिन भी 17 शिकायतें दर्ज 
डीआईओएस दफ्तर में बने कंट्रोल रूम में पैरेंट्स लगातार अपने नाम से शिकायतें दर्ज करा रहे हैं। रजिस्टर पर उनकी शिकायतें दर्ज भी हो रही हैं, लेकिन इन शिकायतों पर कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हो रहा। तमाम पैरेंट्स ने अपना नाम गोपनीय रखने की गुजारिश पर शिकायतें दर्ज करने की बात कही तो डीआईओएस दफ्तर के कर्मचारियों ने उनसे साफ कह दिया कि अगर वह स्कूल की शिकायत करना चाहते हैं तो नाम जरूर लिखाना पडे़ेगा। प्रशासन के अब तक रुख से यह बात साफ है कि अफसर नौकरी में सिर्फ अपना समय काट रहे हैं। इस सत्र से वह राज्य सरकार अध्यादेश लागू नहीं कराना चाहते। कंट्रोल रूम में बुधवार को भी 17 शिकायतें आईं। तीन दिन में अब तक 52 शिकायतें दर्ज हो गईं।  
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मंडलीय कमेटी में पैरेंट्स एसोसिएशन के सदस्यों को नामित करने की प्रक्रिया चल रही है। पैरेंट्स की जो भी शिकायतें आ रही हैं, उनको निस्तारण के लिए पहले संबंधित स्कूल के प्रिंसिपल के पास भेजा जाएगा। उसके बाद मंडलीय कमेटी उन पर सुनवाई करेगी। - डॉ. पीवी जगनमोहन, कमिश्नर 
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