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मिश्रा जी! बीएसए दफ्तर का ‘दस्तूर’ नहीं जानते, फिर तो गाली ही खाएंगे

Wed, 03 Apr 2019 02:01 AM IST
pawan chandra पवन चंद्रा
Updated Wed, 03 Apr 2019 02:01 AM IST
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मिश्रा जी! बीएसए दफ्तर का ‘दस्तूर’ नहीं जानते, फिर तो गाली ही खाएंगे
बरेली। चार साल तक प्रोन्नत वेतन के लिए बीएसए दफ्तर के चक्कर काटते-काटते फतेहगंज पूर्वी के शिक्षक रामनिवास मिश्रा रिटायर हो गए, लेकिन अपनी फाइल बाबू की टेबल से आगे नहीं बढ़वा पाए। रिटायर होने के बाद मंगलवार को फिर बीएसए दफ्तर पहुंचे रामनिवास मिश्रा ने बाबू ने अपनी फाइल के बारे में पूछताछ की तो वह भड़क उठा। बुजुर्ग शिक्षक को गाली देते हुए उसने भाग जाने को कह दिया। इसके बाद बीएसए दफ्तर में काफी देर हंगामा हुआ। शिक्षक ने बीएसए से शिकायत की तो उन्होंने कार्रवाई के निर्देश देकर मामला रफादफा कर दिया।
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फतेहगंज पूर्वी के कृषक समाज इंटर कॉलेज की प्राथमिक शाखा के रिटायर्ड शिक्षक रामनिवास मिश्रा अपने साथी शिक्षक सतेंद्र पाल सिंह के साथ बुधवार दोपहर करीब डेढ़ बजे बीएसए दफ्तर पहुंचे थे। उन्होंने यहां एक बाबू से प्रोन्नत वेतनमान का पटल देखने वाले बाबू के बारे में पूछा। रामनिवास का कहना था कि वर्ष 2015 में उनके प्रोन्नत वेतनमान के लिए फाइल भेजी थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। बुधवार को भी संबंधित बाबू ने उनकी फरियाद को अनसुना कर दिया। उन्होंने फाइल आगे बढ़ाने को कहा तो वह अभद्रता करने लगा और उन्हें गाली देते हुए भाग जाने को कह दिया। इसके बाद शिक्षक का पारा भी चढ़ गया और उन्होंने बाबू को हद में रहने की चेतावनी दी। हंगामा हुआ तो अन्य कर्मचारी भी पहुंच गए।
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इसके बाद बड़ी संख्या में जुटे शिक्षक बीएसए तनुजा त्रिपाठी के पास पहुंचे और उन्हें बताया कि उनके दफ्तर में बगैर पैसे के कोई काम ही नहीं होता। इसके बाद बीएसए ने शिक्षकों को समस्या निस्तारण का आश्वासन दिया और उन्हें एडेड कॉलेज देखने वाले बाबू के पास भेजा। साथ ही यह भी कहा कि अभद्रता करने वाले बाबू पर कार्रवाई की जाएगी। उधर, आरोपी बाबू का कहना था कि वह परिषदीय विद्यालयों के प्रोन्नत वेतनमान के प्रकरण देखता है जबकि रामनिवास का मामला एडेड कॉलेज का था। उन्हें एडेड स्कूल के बाबू के पास ही जाने को कहा था जिस पर वह चिल्लाने लगे।
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चक्कर काटते-काटते सेवानिवृत्त हो गया
शिक्षक रामनिवास मिश्रा ने वर्ष 2015 में प्रोन्नत वेतनमान स्वीकृति के लिए आवेदन किया था। चार साल गुजरने के बाद भी आवेदन पर सुनवाई नहीं हुई। दो दिन पूर्व 31 मार्च को वह सेवानिवृत्त हुए तो एक बार फिर बीएसए दफ्तर साथी शिक्षक के साथ पहुंचे थे। बताते हैं कि बुधवार को प्रोन्नत वेतनमान को लेकर हुआ हंगामा नया नहीं है, पहले भी ऐसे प्रकरण हो चुके हैं।


शिक्षक ों को एडेड स्कूल के लिपिक के पास जाना था, लेकिन वह परिषदीय विद्यालय के प्रोन्नत वेतनमान का प्रकरण देख रहे लिपिक के पास चले गए। शिक्षकों से अच्छा व्यवहार करने के बजाय लिपिक ने अभद्रता की है। उनसे संबंधित पटल का कार्यभार हटाया जाएगा। - तनुजा त्रिपाठी, बीएसए
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