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सांसद के गोद लिए गांव में आधे घर बिना शौचालय
Updated Mon, 24 Jul 2017 01:23 AM IST
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बरेली।
टिगरिंग सप्ताह में भले ही क्यारा ब्लाक में 69 राजस्व गांवों को 25 सितंबर तक खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) करने का लक्ष्य दिया गया है लेकिन इसी ब्लाक में आंवला सांसद धर्मेंद्र कश्यप के गोद लिये (सांसद आदर्श योजना में दो साल पहले) गांव रोंधी और उसके दो मजरों में आधे से ज्यादा परिवार खेतों में (खुले) शौच जाने को मजबूर हैं। ज्यादातर घरों में दो साल से कोई शौचालय नहीं बना। ब्लाक की बड़ी ग्राम पंचायतों में से एक सूदनपुर में भी चार सौ से ज्यादा घरों में शौचालय नहीं हैं। टिगरिंग सप्ताह की शुरूआत में इस गांव में डीएम ने जागरूकता शिविर भी लगवाया गया। मगर यहां भी अधिकांश घरों में शौचालय नहीं बने हैं।
छह हजार की आबादी वाले गांव रोंधी के दो मजरे मिलक और फरीदापुर में कश्यप, साहू, मुस्लिम, दलित समाज के परिवार रहते हैं। दो साल पहले आंवला सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने सांसद आदर्श योजना के तहत इस गांव को मॉडल गांव के रूप में विकसित कर आदर्श बनाने के लिए गोद लिया था। तबसे गांव में विकास के नाम पर सड़क बनी और बिजली की लाइनें खिंच गई। इस गांव में अधिकांश पुरुष मजदूरी करते हैं। नशे के आदी होने की वजह से उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। शौचालय निर्माण के लिए गांव से 450 परिवारों की सूची पंचायत राज विभाग को भेजी गई थी। तीन माह से किसी को भी शौचालय बनाने के लिए सरकार से मिलने वाली प्रोत्साहन राशि नहीं मिली है। 14 सौ घरों में से आधे से ज्यादा में शौचालय नहीं हैं। प्रधान मंजूर अहमद का कहना है कि घरों में शौचालय न होेने से सुबह ही महिला और पुरुषों की खेतों की ओर जाने के लिए लाइन लग जाती है जो कि पूरे गांव के लिए शर्मिंदगी की बात है।
दो दिन में बने 10 शौचालय
प्रधान के अनुसार दो महीने पहले जिले के एक अफसर ने उनसे फोन कर कहा कि गांव का निरीक्षण होने वाला है। तुरंत पांच दस शौचालय बनवा दो। इस पर बजट का इंतजाम करके दो दिन के अंदर हरविंदर, मोहनलाल, गेंदनलाल, धर्मेंद्र, करनलाल समेत 10 लोगों के घरों में शौचालय बनवाए गए थे। इसके बाद से कोई शौचालय नहीं बना। प्रधान के मुताबिक सांसद ने अपनी निधि से अब तक कोई काम नहीं कराए हैं।
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टिगरिंग सप्ताह में टीमें गांवों की मानीटरिंग कर रही हैं। जहां भी समस्या है, वहां शौचालय बनवाए जाएंगे। जिन लाभार्थियों को शौचालय के लिए प्रोत्साहन राशि नहीं मिली है, वहां अब प्रोत्साहन राशि के चेक वितरित किए जाएंगे। विनय कुमार सिंह, डीपीआरओ
खुले में शौच मुक्त करने में हैं बहुत अड़चनें
जिलाधिकारी राघवेंद्र विक्रम सिंह ने क्यारा ब्लाक के 69 राजस्व गांवों को 25 सितंबर तक खुले में शौच मुक्त घोषित करने का लक्ष्य रखा है। अगर तय समय सीमा में ये ब्लाक ओडीएफ होता है तो इसे मॉडल के तौर पर पेश किया जाएगा। मगर, इस लक्ष्य को हासिल करने में बहुत अड़चनें हैं। अब तक अधिकांश गांवों में शौचालय निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। क्यारा से शौचालय निर्माण के लिए सात सौ लाभार्थियों की सूची भेजी गई है। किसी भी शौचालय का निर्माण शुरू नहीं हो पाया। लाभार्थियों को प्रथम किस्त के रूप में छह हजार रुपये मिलने हैं। ये प्रधान की ग्राम निधि-6 में जाएंगे। शौचालय निर्माण कराना प्रधान की जिम्मेदारी होगी। बभिया से 492 लाभार्थियों की सूची भेजी गई। एक भी शौचालय का निर्माण शुरू नहीं हुआ। यही हाल सूदनपुर, चौबारी, जितौर, बिरिया नारायनपुर, हड़ौलिया समेत ज्यादातर गांवों का है। प्रथम किस्त के रूप में 11 हजार लाभार्थियों में प्रत्येक को छह हजार का चेक दिया जाना है। दूसरी किस्त के लिए आधा शौचालय बनवाने के बाद सरकारी सिस्टम में लाभार्थियों को इंतजार करना होगा।
पुराने शौचालयों में भरे कंडे, बंध रहीं बकरियां
स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत लोहिया गांव रह चुके हडा़ैलिया और बिरिया नरायनपुर में पुराने बने स्वच्छ शौचालयों का बुरा हाल है। कहीं अधूरे बने शौचालयों में गोबर के उपले (कंडे) भरे हैं तो कहीं उनमें बकरियां बंध रही हैं। बिरिया नरायनपुर के छोटेलाल के एक साल पहले बनवाए गए शौचालय में गोबर के उपले भरे मिले। वह घर पर नहीं थे। पप्पू के घर बने शौचालय में बकरियां बंध रही थीं। खास बात ये है कि इन लाभार्थियों के नाम शौचालय निर्माण की नई सूची में भी भेजे गए हैं। पातीराम, प्रेमशंकर बसंती आदि के नाम भी शौचालय निर्माण की नई सूची में हैं लेकिन अब तक इनको सरकार से मिलने वाली प्रोत्साहन राशि का चेक नहीं मिला है।
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टिगरिंग सप्ताह में भले ही क्यारा ब्लाक में 69 राजस्व गांवों को 25 सितंबर तक खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) करने का लक्ष्य दिया गया है लेकिन इसी ब्लाक में आंवला सांसद धर्मेंद्र कश्यप के गोद लिये (सांसद आदर्श योजना में दो साल पहले) गांव रोंधी और उसके दो मजरों में आधे से ज्यादा परिवार खेतों में (खुले) शौच जाने को मजबूर हैं। ज्यादातर घरों में दो साल से कोई शौचालय नहीं बना। ब्लाक की बड़ी ग्राम पंचायतों में से एक सूदनपुर में भी चार सौ से ज्यादा घरों में शौचालय नहीं हैं। टिगरिंग सप्ताह की शुरूआत में इस गांव में डीएम ने जागरूकता शिविर भी लगवाया गया। मगर यहां भी अधिकांश घरों में शौचालय नहीं बने हैं।
छह हजार की आबादी वाले गांव रोंधी के दो मजरे मिलक और फरीदापुर में कश्यप, साहू, मुस्लिम, दलित समाज के परिवार रहते हैं। दो साल पहले आंवला सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने सांसद आदर्श योजना के तहत इस गांव को मॉडल गांव के रूप में विकसित कर आदर्श बनाने के लिए गोद लिया था। तबसे गांव में विकास के नाम पर सड़क बनी और बिजली की लाइनें खिंच गई। इस गांव में अधिकांश पुरुष मजदूरी करते हैं। नशे के आदी होने की वजह से उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। शौचालय निर्माण के लिए गांव से 450 परिवारों की सूची पंचायत राज विभाग को भेजी गई थी। तीन माह से किसी को भी शौचालय बनाने के लिए सरकार से मिलने वाली प्रोत्साहन राशि नहीं मिली है। 14 सौ घरों में से आधे से ज्यादा में शौचालय नहीं हैं। प्रधान मंजूर अहमद का कहना है कि घरों में शौचालय न होेने से सुबह ही महिला और पुरुषों की खेतों की ओर जाने के लिए लाइन लग जाती है जो कि पूरे गांव के लिए शर्मिंदगी की बात है।
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दो दिन में बने 10 शौचालय
प्रधान के अनुसार दो महीने पहले जिले के एक अफसर ने उनसे फोन कर कहा कि गांव का निरीक्षण होने वाला है। तुरंत पांच दस शौचालय बनवा दो। इस पर बजट का इंतजाम करके दो दिन के अंदर हरविंदर, मोहनलाल, गेंदनलाल, धर्मेंद्र, करनलाल समेत 10 लोगों के घरों में शौचालय बनवाए गए थे। इसके बाद से कोई शौचालय नहीं बना। प्रधान के मुताबिक सांसद ने अपनी निधि से अब तक कोई काम नहीं कराए हैं।
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टिगरिंग सप्ताह में टीमें गांवों की मानीटरिंग कर रही हैं। जहां भी समस्या है, वहां शौचालय बनवाए जाएंगे। जिन लाभार्थियों को शौचालय के लिए प्रोत्साहन राशि नहीं मिली है, वहां अब प्रोत्साहन राशि के चेक वितरित किए जाएंगे। विनय कुमार सिंह, डीपीआरओ
खुले में शौच मुक्त करने में हैं बहुत अड़चनें
जिलाधिकारी राघवेंद्र विक्रम सिंह ने क्यारा ब्लाक के 69 राजस्व गांवों को 25 सितंबर तक खुले में शौच मुक्त घोषित करने का लक्ष्य रखा है। अगर तय समय सीमा में ये ब्लाक ओडीएफ होता है तो इसे मॉडल के तौर पर पेश किया जाएगा। मगर, इस लक्ष्य को हासिल करने में बहुत अड़चनें हैं। अब तक अधिकांश गांवों में शौचालय निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। क्यारा से शौचालय निर्माण के लिए सात सौ लाभार्थियों की सूची भेजी गई है। किसी भी शौचालय का निर्माण शुरू नहीं हो पाया। लाभार्थियों को प्रथम किस्त के रूप में छह हजार रुपये मिलने हैं। ये प्रधान की ग्राम निधि-6 में जाएंगे। शौचालय निर्माण कराना प्रधान की जिम्मेदारी होगी। बभिया से 492 लाभार्थियों की सूची भेजी गई। एक भी शौचालय का निर्माण शुरू नहीं हुआ। यही हाल सूदनपुर, चौबारी, जितौर, बिरिया नारायनपुर, हड़ौलिया समेत ज्यादातर गांवों का है। प्रथम किस्त के रूप में 11 हजार लाभार्थियों में प्रत्येक को छह हजार का चेक दिया जाना है। दूसरी किस्त के लिए आधा शौचालय बनवाने के बाद सरकारी सिस्टम में लाभार्थियों को इंतजार करना होगा।
पुराने शौचालयों में भरे कंडे, बंध रहीं बकरियां
स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत लोहिया गांव रह चुके हडा़ैलिया और बिरिया नरायनपुर में पुराने बने स्वच्छ शौचालयों का बुरा हाल है। कहीं अधूरे बने शौचालयों में गोबर के उपले (कंडे) भरे हैं तो कहीं उनमें बकरियां बंध रही हैं। बिरिया नरायनपुर के छोटेलाल के एक साल पहले बनवाए गए शौचालय में गोबर के उपले भरे मिले। वह घर पर नहीं थे। पप्पू के घर बने शौचालय में बकरियां बंध रही थीं। खास बात ये है कि इन लाभार्थियों के नाम शौचालय निर्माण की नई सूची में भी भेजे गए हैं। पातीराम, प्रेमशंकर बसंती आदि के नाम भी शौचालय निर्माण की नई सूची में हैं लेकिन अब तक इनको सरकार से मिलने वाली प्रोत्साहन राशि का चेक नहीं मिला है।