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चंदना राम इकबाल यादव का ट्रांसफर
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Tue, 15 May 2018 01:17 AM IST
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बीएसए चंदना राम इकबाल यादव की आखिरकार जिले से विदाई हो ही गई। अपने कार्यकाल में विभिन्न योजनाओं के करोड़ों के बजट में हुए घोटालों और तुनकमिजाजी के लिए चर्चित रही चंदना राम के ट्रांसफर से सबसे ज्यादा राहत की सांस उनके खिलाफ कई दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे शिक्षकों ने ली। उनके खिलाफ कुछ समय पहले आधा दर्जन से ज्यादा मामलों में जांच शुरू हुई थी। इनमें कमिश्नर डॉ. पीवी जगनमोहन के आदेश पर विभाग में हुए घोटालों की उच्चस्तरीय जांच भी शामिल है। हालांकि उनके रहते इनमें से एक भी जांच पूरी नहीं हो पाई।
बेसिक शिक्षा विभाग में एक के बाद एक कई घोटालों का पर्दाफाश हुआ। इनको लेकर बीएसए चंदना राम इकबाल यादव काफी समय से जांचों के शिकंजे में घिरी हुई थीं। पहले इन मामलों की जांच सीडीओ सत्येंद्र कुमार ने कराई। बाद में कमिश्नर ने भी आरोपों को गंभीरता से लेते हुए मंडलीय अधिकारियों की टीमें बनाकर नए सिरे से इन मामलों की जांच शुरू करा दी। हद से ज्यादा तुनकमिजाजी को लेकर भी बीएसए पर उंगलियां उठीं। शिक्षक नेता राजेंद्र गंगवार सहित तीन शिक्षकों के विरोध जताने पर चंदना राम ने उन्हें सस्पेंड कर दिया था। शिक्षक इसके खिलाफ बीएसए दफ्तर के बाहर कई दिनों से धरना और भूख हड़ताल कर रहे थे।
शिक्षकों ने खत्म की भूख हड़ताल
चंदना राम के खिलाफ उतरे शिक्षक शुक्रवार से भूख हड़ताल पर थे। प्रभारी बीएसए ऐश्वर्या लक्ष्मी ने उन्हें कई बार मनाने की कोशिश की लेकिन वे नहीं माने। सोमवार को दिन में बीएसए चंदना राम के ट्रांसफर की सूचना आई तो भूख हड़ताल पर बैठे शिक्षकों के तेवर नरम हो गए। प्रभारी बीएसए ऐश्वर्या लक्ष्मी के धरना स्थल पर पहुंचने पर शिक्षकों ने आंदोलन को खत्म कर दिया।
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चंदना राम का कार्यकाल और घोटालों का सिक्सर
1- स्वेटर खरीद घोटाला- करीब तीन हजार परिषदीय स्कूलों के 3.13 लाख बच्चों को स्वेटर बांटने के लिए दो किस्तों में करीब 6.26 करोड़ का बजट जारी हुआ था। स्वेटर बांटने में जमकर फर्जीवाड़ा हुआ और 70 फीसदी बच्चों को स्वेटर बांटे ही नहीं। जबकि विभागीय अधिकारियों ने सौ फीसदी वितरण दिखाकर पूरा पैसा ठिकाने लगा दिया।
2- जूता-मोजा खरीद घोटाला- प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूल के बच्चों के लिए जूते-मोजे भेजे गए थे। जबकि स्कूलों में 50 फीसदी से ज्यादा जूते बंटे ही नहीं और वे स्कूलों में पड़े बर्बाद होते रहे। शासन ने इन्हें वापस मांगा लेकिन फिर भी ध्यान नहीं दिया गया।
3- बस्ता खरीद घोटाला- सर्व शिक्षा अभियान में सवा तीन लाख बच्चों के लिए बस्ता खरीदे गए लेकिन इनकी क्वालिटी बेहद घटिया थी, इसलिए में वे गारंटी पीरियड में भी फट गए।
4- कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में गद्दा खरीद घोटाला- कस्तूरबा स्कूलों में गद्दा खरीद में भी फर्जीवाड़ा हुआ। कागज पर गद्दा खरीद दिखाकर पैसा हड़प कर लिया गया।
5- फर्नीचर खरीद घोटाला- चयनित 140 स्कूलों में बच्चों के लिए बेंच-कुर्सी खरीद कर देनी थी। सीडीओ ने इसमें फर्जीवाड़ा रोकने के लिए जिला स्तर पर टेंडर कराने की कोशिश की लेकिन बीएसए ने स्कूलों के खातों में सारा पैसा भेज दिया।
6- अंग्रेजी स्कूलों में शिक्षक चयन में गड़बड़ी- अंग्रेजी स्कूलों में टीचर्स की गलत तरीके से काउंसलिंग करा दी गई। इसके अलावा स्कूलों का चयन भी मनमाने तरीके से कर दिया गया।
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बेसिक शिक्षा विभाग में एक के बाद एक कई घोटालों का पर्दाफाश हुआ। इनको लेकर बीएसए चंदना राम इकबाल यादव काफी समय से जांचों के शिकंजे में घिरी हुई थीं। पहले इन मामलों की जांच सीडीओ सत्येंद्र कुमार ने कराई। बाद में कमिश्नर ने भी आरोपों को गंभीरता से लेते हुए मंडलीय अधिकारियों की टीमें बनाकर नए सिरे से इन मामलों की जांच शुरू करा दी। हद से ज्यादा तुनकमिजाजी को लेकर भी बीएसए पर उंगलियां उठीं। शिक्षक नेता राजेंद्र गंगवार सहित तीन शिक्षकों के विरोध जताने पर चंदना राम ने उन्हें सस्पेंड कर दिया था। शिक्षक इसके खिलाफ बीएसए दफ्तर के बाहर कई दिनों से धरना और भूख हड़ताल कर रहे थे।
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शिक्षकों ने खत्म की भूख हड़ताल
चंदना राम के खिलाफ उतरे शिक्षक शुक्रवार से भूख हड़ताल पर थे। प्रभारी बीएसए ऐश्वर्या लक्ष्मी ने उन्हें कई बार मनाने की कोशिश की लेकिन वे नहीं माने। सोमवार को दिन में बीएसए चंदना राम के ट्रांसफर की सूचना आई तो भूख हड़ताल पर बैठे शिक्षकों के तेवर नरम हो गए। प्रभारी बीएसए ऐश्वर्या लक्ष्मी के धरना स्थल पर पहुंचने पर शिक्षकों ने आंदोलन को खत्म कर दिया।
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चंदना राम का कार्यकाल और घोटालों का सिक्सर
1- स्वेटर खरीद घोटाला- करीब तीन हजार परिषदीय स्कूलों के 3.13 लाख बच्चों को स्वेटर बांटने के लिए दो किस्तों में करीब 6.26 करोड़ का बजट जारी हुआ था। स्वेटर बांटने में जमकर फर्जीवाड़ा हुआ और 70 फीसदी बच्चों को स्वेटर बांटे ही नहीं। जबकि विभागीय अधिकारियों ने सौ फीसदी वितरण दिखाकर पूरा पैसा ठिकाने लगा दिया।
2- जूता-मोजा खरीद घोटाला- प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूल के बच्चों के लिए जूते-मोजे भेजे गए थे। जबकि स्कूलों में 50 फीसदी से ज्यादा जूते बंटे ही नहीं और वे स्कूलों में पड़े बर्बाद होते रहे। शासन ने इन्हें वापस मांगा लेकिन फिर भी ध्यान नहीं दिया गया।
3- बस्ता खरीद घोटाला- सर्व शिक्षा अभियान में सवा तीन लाख बच्चों के लिए बस्ता खरीदे गए लेकिन इनकी क्वालिटी बेहद घटिया थी, इसलिए में वे गारंटी पीरियड में भी फट गए।
4- कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में गद्दा खरीद घोटाला- कस्तूरबा स्कूलों में गद्दा खरीद में भी फर्जीवाड़ा हुआ। कागज पर गद्दा खरीद दिखाकर पैसा हड़प कर लिया गया।
5- फर्नीचर खरीद घोटाला- चयनित 140 स्कूलों में बच्चों के लिए बेंच-कुर्सी खरीद कर देनी थी। सीडीओ ने इसमें फर्जीवाड़ा रोकने के लिए जिला स्तर पर टेंडर कराने की कोशिश की लेकिन बीएसए ने स्कूलों के खातों में सारा पैसा भेज दिया।
6- अंग्रेजी स्कूलों में शिक्षक चयन में गड़बड़ी- अंग्रेजी स्कूलों में टीचर्स की गलत तरीके से काउंसलिंग करा दी गई। इसके अलावा स्कूलों का चयन भी मनमाने तरीके से कर दिया गया।