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आधी आबादी भाग्य विधाता, फिर भी टिकट में कंजूसी
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बरेली। चुनाव आयोग के आंकड़े बताते हैं कि 2014 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं ने जितना मतदान किया, वह आजादी के बाद अब तक हुए चुनावों में सर्वाधिक था मगर फिर भी राजनीतिक दलों ने देश की सरकार चुनने में महिलाओं की बढ़ती भागेदारी को नजरंदाज कर दिया। बरेली मंडल में इसकी बानगी देखी जा सकती है, जहां की चार संसदीय सीटों पर पिछले चुनाव में चार महिलाओं को टिकट दिए गए थे लेकिन इस बार सिर्फ दो महिला प्रत्याशी चुनाव मैदान में दिखाई दे रही है। बरेली मंडल के चारों संसदीय क्षेत्रों में महिला मतदाताओं की संख्या करीब 47 प्रतिशत होने के बावजूद कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने एक भी सीट पर महिला को टिकट नहीं दिया है। भाजपा जरूर बदायूं से संघमित्रा मौर्य और बसपा ने आंवला से रुचिवीरा को मैदान में उतारा है, लेकिन इन दोनों प्रत्याशियों का चयन उनके महिला होने से ज्यादा इस आधार पर किया गया है कि एक दिग्गज नेता स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी हैं तो दूसरी रुचिवीरा बिजनौर के धनाढ्य राजघराने की सदस्य।
बरेली और आंवला संसदीय क्षेत्र के 32 लाख से ज्यादा मतदाताओं में से महिला मतदाताओं की संख्या करीब 45.50 फीसदी है। भाजपा ने दोनों सीटों पर 2014 के प्रत्याशी संतोष गंगवार और धर्मेंद्र कश्यप को टिकट दिया है। सपा ने 2014 में बरेली में आयशा इस्लाम और बसपा ने आंवला में सुनीता शाक्य को उतारा था। दोनों महिला प्रत्याशियों ने मोदी लहर के बावजूद अच्छे-खासे वोट बटोरे थे। आयशा इस्लाम फिर भी दोबारा टिकट नहीं पा सकीं। बसपा ने जरूर सुनीता शाक्य की जगह रुचिवीरा को टिकट दिया है। कांग्रेस के दोनों सीटों पर पुरुष उम्मीदवार हैं। शाहजहांपुर सीट पर भाजपा से पिछली बार कृष्णाराज चुनाव जीती थीं और केंद्र सरकार में मंत्री भी बनी थीं मगर इस बार भाजपा ने उनका टिकट काटकर अरुण सागर को मैदान में उतारा है। बसपा ने अमरचंद्र जौहर और कांग्रेस से ब्रह्मस्वरूप सागर को उतारा है। इस तरह शाहजहांपुर में किसी दल ने महिला उम्मीदवार को उपयुक्त नहीं माना।
पीलीभीत सीट पर 2014 में भाजपा से मेनका गांधी चुनाव जीतकर सांसद और केंद्र सरकार में मंत्री बनी थीं। इस बार मेनका गांधी सुल्तानपुर से चुनाव लड़ रही हैं। पीलीभीत सीट पर उनके बेटे वरुण गांधी किस्मत आजमा रहे हैं। कांग्रेस ने सीट अपना दल को दे दी है जिसने अब तक प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। बदायूं से भाजपा ने संघ मित्रा मौर्य को टिकट दिया है लेकिन सपा ने पुराने दिग्गज धर्मेंद्र यादव और कांग्रेस ने सलीम शेरवानी को उतारा है।
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इस तरह साफ है कि मंडल की पांच सीटों पर महिलाओं की आबादी 47 फीसदी से अधिक होने के बावजूद प्रमुख राजनीतिक दल भाजपा, सपा-बसपा गठबंधन और कांग्रेस ने मात्र दो महिला प्रत्याशियों पर दांव लगाया है जबकि 2014 में चारो प्रमुख दलों से चार लोकसभा प्रत्याशी मैदान में थीं, जिनमे ंदो महिला प्रत्याशी भारी वोटों से चुनाव जीतकर न केवल सांसद बल्कि मंत्री भी बनी थीं।
लोकसभा चुनाव- 2014
लोकसभा क्षेत्र महिला प्रत्याशी राजनीतिक दल
बरेली आयशा इस्लाम सपा
आंवला- सुनीता शाक्य बसपा
पीलीभीत मेनका गांधी भाजपा
शाहजहांपुर कृष्णाराज भाजपा
लोकसभा चुनाव- 2019
लोकसभा क्षेत्र महिला प्रत्याशी राजनीतिक दल
बरेली कोई नहीं --
आंवला रुचिवीरा बसपा
शाहजहांपुर कोई नहीं --
पीलीभीत कोई नहीं --
बदायूं संघमित्रा मौर्य भाजपा
बरेली मंडल के पांचों संसदीय क्षेत्रों में महिला मतदाता
लोकसभा क्षेत्र महिला मतदाता प्रतिशत में
बरेली 805250 45.50
आंवला 780500 45.26
बदायूं 1026906 45.52
शाहजहांपुर 948032 45.00
पीलीभीत-- 775500 46.17
(नोट - इन आंकड़ों में चुनाव आयोग में शामिल किए गए नए मतदाताओं के नाम शामिल नहीं हैं।)
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बरेली और आंवला संसदीय क्षेत्र के 32 लाख से ज्यादा मतदाताओं में से महिला मतदाताओं की संख्या करीब 45.50 फीसदी है। भाजपा ने दोनों सीटों पर 2014 के प्रत्याशी संतोष गंगवार और धर्मेंद्र कश्यप को टिकट दिया है। सपा ने 2014 में बरेली में आयशा इस्लाम और बसपा ने आंवला में सुनीता शाक्य को उतारा था। दोनों महिला प्रत्याशियों ने मोदी लहर के बावजूद अच्छे-खासे वोट बटोरे थे। आयशा इस्लाम फिर भी दोबारा टिकट नहीं पा सकीं। बसपा ने जरूर सुनीता शाक्य की जगह रुचिवीरा को टिकट दिया है। कांग्रेस के दोनों सीटों पर पुरुष उम्मीदवार हैं। शाहजहांपुर सीट पर भाजपा से पिछली बार कृष्णाराज चुनाव जीती थीं और केंद्र सरकार में मंत्री भी बनी थीं मगर इस बार भाजपा ने उनका टिकट काटकर अरुण सागर को मैदान में उतारा है। बसपा ने अमरचंद्र जौहर और कांग्रेस से ब्रह्मस्वरूप सागर को उतारा है। इस तरह शाहजहांपुर में किसी दल ने महिला उम्मीदवार को उपयुक्त नहीं माना।
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पीलीभीत सीट पर 2014 में भाजपा से मेनका गांधी चुनाव जीतकर सांसद और केंद्र सरकार में मंत्री बनी थीं। इस बार मेनका गांधी सुल्तानपुर से चुनाव लड़ रही हैं। पीलीभीत सीट पर उनके बेटे वरुण गांधी किस्मत आजमा रहे हैं। कांग्रेस ने सीट अपना दल को दे दी है जिसने अब तक प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। बदायूं से भाजपा ने संघ मित्रा मौर्य को टिकट दिया है लेकिन सपा ने पुराने दिग्गज धर्मेंद्र यादव और कांग्रेस ने सलीम शेरवानी को उतारा है।
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इस तरह साफ है कि मंडल की पांच सीटों पर महिलाओं की आबादी 47 फीसदी से अधिक होने के बावजूद प्रमुख राजनीतिक दल भाजपा, सपा-बसपा गठबंधन और कांग्रेस ने मात्र दो महिला प्रत्याशियों पर दांव लगाया है जबकि 2014 में चारो प्रमुख दलों से चार लोकसभा प्रत्याशी मैदान में थीं, जिनमे ंदो महिला प्रत्याशी भारी वोटों से चुनाव जीतकर न केवल सांसद बल्कि मंत्री भी बनी थीं।
लोकसभा चुनाव- 2014
लोकसभा क्षेत्र महिला प्रत्याशी राजनीतिक दल
बरेली आयशा इस्लाम सपा
आंवला- सुनीता शाक्य बसपा
पीलीभीत मेनका गांधी भाजपा
शाहजहांपुर कृष्णाराज भाजपा
लोकसभा चुनाव- 2019
लोकसभा क्षेत्र महिला प्रत्याशी राजनीतिक दल
बरेली कोई नहीं --
आंवला रुचिवीरा बसपा
शाहजहांपुर कोई नहीं --
पीलीभीत कोई नहीं --
बदायूं संघमित्रा मौर्य भाजपा
बरेली मंडल के पांचों संसदीय क्षेत्रों में महिला मतदाता
लोकसभा क्षेत्र महिला मतदाता प्रतिशत में
बरेली 805250 45.50
आंवला 780500 45.26
बदायूं 1026906 45.52
शाहजहांपुर 948032 45.00
पीलीभीत-- 775500 46.17
(नोट - इन आंकड़ों में चुनाव आयोग में शामिल किए गए नए मतदाताओं के नाम शामिल नहीं हैं।)