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Bareilly News: मनकक्ष में जांच के लिए आने वाले 20 फीसदी मरीज मिर्गी की चपेट में

Mon, 17 Nov 2025 02:30 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 17 Nov 2025 02:30 AM IST
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20% of patients who come to the clinic for examination suffer from epilepsy.
बरेली। सिर में गहरी चोट, दूषित खाद्य पदार्थ, अधपका भोजन या मिट्टी का सेवन नसों से जुड़ी बीमारी मिर्गी की बड़ी वजह है। मनोचिकित्सक के मुताबिक मनकक्ष में प्रतिमाह आने वाले मरीजों में 20 फीसदी मिर्गी की चपेट में मिल रहे हैं। रोग की पुष्टि के बाद नियमित इलाज से स्वस्थ भी होने का दावा है।
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जिला अस्पताल मनकक्ष के मनोचिकित्सक डॉ. आशीष कुमार के मुताबिक मिर्गी को लेकर लोगों में तमाम भ्रांतियां हैं। ऊपरी चक्कर समझकर लोग पहले जांच और इलाज नहीं कराते। जब तकलीफ बढ़ती है तो वे इलाज के लिए पहुंचते हैं। देरी से जटिलताएं बढ़ती हैं।
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बताया कि 10 वर्ष तक के बच्चों के भी मिर्गी के चपेट में आने के मामले बढ़े हैं। औसतन प्रतिमाह चार हजार मरीजों की ओपीडी होती है। अक्तूबर में 36 सौ, सितंबर में 42 सौ, अगस्त में 38 सौ मरीजों की ओपीडी रही। इसके सापेक्ष 20 फीसदी मिर्गी के नए मरीज मिले, इनका इलाज जारी है।
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बताया कि कुछ बच्चों में जन्मजात मिर्गी रहती है। इसके अलावा वे बच्चे जिनके दिमाग में ऑक्सीजन का प्रवाह प्रभावित हो, सिर में चोट लग जाए या फिर दिमाग में न्यूरोसाइटिस्टेरोसिस कीड़े का पहुंच जाना भी मिर्गी की वजह बनता है। हालांकि, दवा से इलाज मुमकिन है।

दवा से 90 फीसदी निजात मुमकिन, गांव के मरीज ज्यादा
मनोचिकित्सक के मुताबिक, मिर्गी का रोगी अगर नियमित दवा का सेवन करे तो मिर्गी के दौरे की आशंका नहीं होती। इलाज तीन से पांच वर्ष तक चलता है। 90 फीसदी मरीज स्वस्थ हो जाते हैं। बताया कि मिर्गी की चपेट में आने वालों में शहर के महज 15 फीसदी जबकि गांव के 85 फीसदी लोग होते हैं। इस रोग को छिपाने से स्थिति गंभीर होगी इसलिए इलाज शुरू कराना चाहिए ताकि रोग से मुक्त हो सकें।


मिर्गी के साथ चक्कर आए तो दिमागी ट्यूमर की आशंका
डॉ. आशीष के मुताबिक काउंसलिंग में कई मरीजों ने मिर्गी के साथ चक्कर की जानकारी दी। उनकी सीटी जांच कराई गई तो 80 फीसदी मरीजों में दिमागी ट्यूमर का पता चला। इसलिए अगर मिर्गी रोगी को दवा सेवन के बावजूद चक्कर आए तो जांच में देर न करें। अपील है कि अगर किसी को मिर्गी है या आसपास कोई चपेट में है तो झाड़फूंक न करें। टेलीमानस नंबर 14416 पर कॉल कर निशुल्क इलाज कराएं। ब्यूरो
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