{"_id":"5ac1b2b84f1c1bc3618b4e33","slug":"191522643640-bareilly-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"इलाज में लापरवाही से क्षुब्ध मरीज ने मांगी इच्छा मृत्यु","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इलाज में लापरवाही से क्षुब्ध मरीज ने मांगी इच्छा मृत्यु
Updated Mon, 02 Apr 2018 10:46 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली।
चार दिन से जिला अस्पताल में भर्ती मरीज ठीक से इलाज न होने से इस कदर आहत है कि वह इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगने लगा है। उसकी हालत देखकर अन्य मरीज और तीमारदार भी द्रवित हो गए। मरीज का कहना था कि तीन दिन से उसने खाना तक नहीं खाया है।
बिथरी चैनपुर निवासी दुर्गेश 29 मार्च को जिला अस्पताल में भर्ती हुआ था। उसके पेट में इन्फेक्शन है। चार दिन पहले दुर्गेश ओपीडी में आया तो डॉ. अजय मोहन ने पेट का अल्ट्रासाउंड कराया और गंभीर हालत को देखते हुए इमरजेंसी में भर्ती करा दिया। दुर्गेश का कहना है कि चार दिन से उसने खाना नहीं खाया है। डॉक्टर भी देखने नहीं आते हैं। यहां रहने से तो अच्छा है कि उसे इच्छा मृत्यु की इजाजत दे दी जाए। यह कहकर वह रोने लगा। उसकी हालत देखकर अन्य मरीज और तीमारदार भी पसीज गए। उन्हें दुर्गेश पर दया आने लगी, लेकिन सिस्टम की वजह से वह कुछ कह नहीं सके। इस संबंध में डॉ. अजय मोहन से बात करनी चाही लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।
विज्ञापन
चार दिन से जिला अस्पताल में भर्ती मरीज ठीक से इलाज न होने से इस कदर आहत है कि वह इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगने लगा है। उसकी हालत देखकर अन्य मरीज और तीमारदार भी द्रवित हो गए। मरीज का कहना था कि तीन दिन से उसने खाना तक नहीं खाया है।
बिथरी चैनपुर निवासी दुर्गेश 29 मार्च को जिला अस्पताल में भर्ती हुआ था। उसके पेट में इन्फेक्शन है। चार दिन पहले दुर्गेश ओपीडी में आया तो डॉ. अजय मोहन ने पेट का अल्ट्रासाउंड कराया और गंभीर हालत को देखते हुए इमरजेंसी में भर्ती करा दिया। दुर्गेश का कहना है कि चार दिन से उसने खाना नहीं खाया है। डॉक्टर भी देखने नहीं आते हैं। यहां रहने से तो अच्छा है कि उसे इच्छा मृत्यु की इजाजत दे दी जाए। यह कहकर वह रोने लगा। उसकी हालत देखकर अन्य मरीज और तीमारदार भी पसीज गए। उन्हें दुर्गेश पर दया आने लगी, लेकिन सिस्टम की वजह से वह कुछ कह नहीं सके। इस संबंध में डॉ. अजय मोहन से बात करनी चाही लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।
विज्ञापन