{"_id":"5941619f4f1c1b9a6b8b45a2","slug":"191497457055-bareilly-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"माहे रमजान में बरसती है अल्लाह की तजल्ली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
माहे रमजान में बरसती है अल्लाह की तजल्ली
Updated Wed, 14 Jun 2017 09:53 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली।
हदीस मुबारक में है कि रमजान अल्लाह ताला का महीना है, जिससे पता चलता है कि इस मुबारक महीने से रब्बे जुल जलाल का खुसूसी ताल्लुक है। जिसकी वजह से यह मुबारक महीना दूसरे महीनों से मुम्ताज और जुदा है। इस माह के खुसूसी ताल्लुक से मुराद है कि अल्लाह ताला की तजल्ली-ए-खास इस मुबारक माह में इस दर्जा नाजिल होती है मानो मूसलाधार बारिश हो रही हो।
हदीस मुबारक में है कि रमजान ऐसा महीना है कि इसके अव्वल हिस्से में हक ताला की रहमत बरसती है, जिसकी वजह से गुनाहों के जुल्मत और मासिअत की कशाफतों से निकलना मयस्सर होता है। इस मुबारक माह का दरमियानी हिस्सा गुनाहों की मगफिरत का सबब है और इस माह से आखिरी हिस्से में दोजख की आग से आजादी हासिल होती है।
रसूल अल्लाह का इरशाद है कि जब रमजान की पहली रात होती है तो शैतान को बंद कर दिया जाता है। साथ ही सरकज जिन्नों को भी बंद कर दिया जाता है। दोजख के दरवाजे बंद कर दिए जाते है और बहिस्त के दरवाजे खोल दिए जाते हैं। एक आवाज उठती है ‘ऐ नेकी के तालिब आगे बढ़ कि नेकी का वक्त है और ऐ बदी के चाहने वाले बदी से रुक जाओ और नफ्स को गुनाहों से बाज रखो, क्यों कि यह वक्त गुनाहों से तौबा करने का और उनको छोड़ने का है’।
विज्ञापन
रमजान के इस मुबारक माह की तमाम फजीलतों को देखते हुए मुसलमान को इस महीने में इबादत का खास एहतमाम करना चाहिए और कोई लम्हा जाया नहीं होने देना चाहिए।
- अलहाज अनवर मियां हुजूर, सज्जादानशीन, आस्तान-ए-आलिया मोहम्मदिया कादरिया।
विज्ञापन
हदीस मुबारक में है कि रमजान अल्लाह ताला का महीना है, जिससे पता चलता है कि इस मुबारक महीने से रब्बे जुल जलाल का खुसूसी ताल्लुक है। जिसकी वजह से यह मुबारक महीना दूसरे महीनों से मुम्ताज और जुदा है। इस माह के खुसूसी ताल्लुक से मुराद है कि अल्लाह ताला की तजल्ली-ए-खास इस मुबारक माह में इस दर्जा नाजिल होती है मानो मूसलाधार बारिश हो रही हो।
हदीस मुबारक में है कि रमजान ऐसा महीना है कि इसके अव्वल हिस्से में हक ताला की रहमत बरसती है, जिसकी वजह से गुनाहों के जुल्मत और मासिअत की कशाफतों से निकलना मयस्सर होता है। इस मुबारक माह का दरमियानी हिस्सा गुनाहों की मगफिरत का सबब है और इस माह से आखिरी हिस्से में दोजख की आग से आजादी हासिल होती है।
विज्ञापन
रसूल अल्लाह का इरशाद है कि जब रमजान की पहली रात होती है तो शैतान को बंद कर दिया जाता है। साथ ही सरकज जिन्नों को भी बंद कर दिया जाता है। दोजख के दरवाजे बंद कर दिए जाते है और बहिस्त के दरवाजे खोल दिए जाते हैं। एक आवाज उठती है ‘ऐ नेकी के तालिब आगे बढ़ कि नेकी का वक्त है और ऐ बदी के चाहने वाले बदी से रुक जाओ और नफ्स को गुनाहों से बाज रखो, क्यों कि यह वक्त गुनाहों से तौबा करने का और उनको छोड़ने का है’।
विज्ञापन
रमजान के इस मुबारक माह की तमाम फजीलतों को देखते हुए मुसलमान को इस महीने में इबादत का खास एहतमाम करना चाहिए और कोई लम्हा जाया नहीं होने देना चाहिए।
- अलहाज अनवर मियां हुजूर, सज्जादानशीन, आस्तान-ए-आलिया मोहम्मदिया कादरिया।