{"_id":"5bfc580bbdec22419f5c1e53","slug":"181543264267-bareilly-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"14 करोड़ की जमीन ढूंढने में टीम हारी, अब किसानों से खरीद की तैयारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
14 करोड़ की जमीन ढूंढने में टीम हारी, अब किसानों से खरीद की तैयारी
Updated Tue, 27 Nov 2018 02:01 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। लाल फाटक ओवरब्रिज के लिए ली गई जमीन के बदले कैंट बोर्ड को उतनी ही कीमत की जमीन देने का मामला तय करना जिला प्रशासन के लिए आसानी से मुमकिन होता नहीं दिख रहा है। कैंट के नजदीक इलाकों में सरकारी जमीनों के रिकार्ड चेक करने के बाद भी प्रशासन के अफसरों को फिलहाल किसी जमीन पर कैंट बोर्ड के रजामंद होने की गुंजाइश नहीं लग रही है। सोमवार को इस मामले में मंथन के बाद प्रशासन के अधिकारियों ने कहा कि अगर जमीन के अधिग्रहण में यह दिक्कत बरकरार रही तो उनके लिए इसके अलावा कोई विकल्प शेष नहीं रहेगा कि काश्तकारों की उनकी भूमि खरीदकर कैंट बोर्ड को दी जाए। हालांकि यह खर्च सेतु निगम के अफसरों को झेलना होगा और इससे प्रोजेक्ट की लागत भी करीब 15 करोड़ तक बढ़ जाएगी।
सेतु निगम को ओवरब्रिज का निर्माण पूरा कराने के लिए कैंट एरिया की भी 6320 वर्गमीटर जमीन का अधिग्रहण करना है। अभी पीडब्ल्यूडी की जमीन पर निर्माण चल रहा है। जिला प्रशासन इस जमीन के बदले नौ हजार वर्गमीटर से ज्यादा भूमि बभिया में देना चिह्नित किया था लेकिन सेना ने उसे लेने से इंकार कर दिया। कैंट बोर्ड का कहना है कि ओवरब्रिज के लिए उसकी जिस भूमि का अधिग्रहण होना है, उसकी कीमत करीब 14 करोड़ है। कैंट एरिया के नजदीक उसे इतनी ही कीमत की जमीन चाहिए। डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह ने पेचीदा हो चुके इस मसले को निस्तारित करने के लिए एसडीएम सदर एमपी सिंह को नोडल बनाया है। सोमवार को एसडीएम सदर ने सेतु निगम के उप परियोजना प्रबंधक नवाब सिंह, तहसीलदार आनंद कुमार तिवारी सहित कई अफसरों के साथ तहसील में मंथन किया लेकिन फिर भी कोई सटीक निष्कर्ष नहीं निकल पाया। तहसीलदार ने सरकारी जमीन के जो नक्शे दिखाए हैं, उसमें ऐसी कोई सरकारी जमीन नहीं मिल पाई जिसकी वैल्यू कैंट बोर्ड के सर्किल रेट से मेल खाए और उसकी उपलब्धता कैंट के नजदीक हो। लिहाजा इस विकल्प पर भी विचार शुरू कर दिया गया कि कैंट बोर्ड की मांग पूरी करने के लिए काश्तकारों की जमीन की खरीदी जाए। इसका पूरा खर्च सेतु निगम को उठाना है। एसडीएम ने सेतु निगम के स्थानीय अधिकारियों को निर्देशित भी कर दिया है कि वे भूमि खरीद की अनुमति अपने उच्चाधिकारियों से मांग लें।
कैंट बोर्ड ने भेजा लेटर...छावनी के पास ही चाहिए जमीन
लाल फाटक ओवरब्रिज के लिए कैंट बोर्ड के अफसरों ने जिला प्रशासन को यह लेटर भेज दिया है कि उन्हें छावनी के पास ही जमीन चाहिए। तहसील प्रशासन के पास भी इसकी लिखित सूचना पहुंच चुकी है। जाहिर है कि बोर्ड के अफसर जमीन अधिग्रहण के मामले में पूरी तरह सख्त है। अब प्रशासन और सेतु निगम को इसका हल तलाश करना है।
विज्ञापन
तय ही नहीं अफसर आखिर चाहते क्या हैं
ओवरब्रिज के निर्माण में सेतु निगम, प्रशासन, पीडब्ल्यूडी और कैंट बोर्ड के अफसर शामिल हैं लेकिन भूमि अधिग्रहण पर अब तक अधिकारियों के बीच सहमति नहीं बन सकी है जबकि प्रोजेक्ट शुरू हुए दो साल का वक्त बीत चुका है। पहले बभिया में जमीन देखी गई। ऐन वक्त पर कैंट बोर्ड ने इसे दूर बताते हुए लेने से मना कर दिया। फिर सर्किल रेट को लेकर दिक्कत सामने आई। इसलिए तय यह हुुआ है कि इस मामले को लेकर जल्द ही डीएम के नेतृत्व में संबंधित उच्चाधिकारियों की भी मीटिंग हो जाए।
कैंट बोर्ड ने जिस कीमत की भूमि मांगी है, प्रथमदृष्टया उतनी सरकारी जमीन छावनी के पास नहीं चिह्नित हो सकी है। भूमि नहीं मिल सकी तो सेतु निगम को इसके लिए भी तैयार रहना होगा कि वह किसानों की उनकी निजी भूमि की भी खरीद करे। - एमपी सिंह, उपजिलाधिकारी सदर
विज्ञापन
सेतु निगम को ओवरब्रिज का निर्माण पूरा कराने के लिए कैंट एरिया की भी 6320 वर्गमीटर जमीन का अधिग्रहण करना है। अभी पीडब्ल्यूडी की जमीन पर निर्माण चल रहा है। जिला प्रशासन इस जमीन के बदले नौ हजार वर्गमीटर से ज्यादा भूमि बभिया में देना चिह्नित किया था लेकिन सेना ने उसे लेने से इंकार कर दिया। कैंट बोर्ड का कहना है कि ओवरब्रिज के लिए उसकी जिस भूमि का अधिग्रहण होना है, उसकी कीमत करीब 14 करोड़ है। कैंट एरिया के नजदीक उसे इतनी ही कीमत की जमीन चाहिए। डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह ने पेचीदा हो चुके इस मसले को निस्तारित करने के लिए एसडीएम सदर एमपी सिंह को नोडल बनाया है। सोमवार को एसडीएम सदर ने सेतु निगम के उप परियोजना प्रबंधक नवाब सिंह, तहसीलदार आनंद कुमार तिवारी सहित कई अफसरों के साथ तहसील में मंथन किया लेकिन फिर भी कोई सटीक निष्कर्ष नहीं निकल पाया। तहसीलदार ने सरकारी जमीन के जो नक्शे दिखाए हैं, उसमें ऐसी कोई सरकारी जमीन नहीं मिल पाई जिसकी वैल्यू कैंट बोर्ड के सर्किल रेट से मेल खाए और उसकी उपलब्धता कैंट के नजदीक हो। लिहाजा इस विकल्प पर भी विचार शुरू कर दिया गया कि कैंट बोर्ड की मांग पूरी करने के लिए काश्तकारों की जमीन की खरीदी जाए। इसका पूरा खर्च सेतु निगम को उठाना है। एसडीएम ने सेतु निगम के स्थानीय अधिकारियों को निर्देशित भी कर दिया है कि वे भूमि खरीद की अनुमति अपने उच्चाधिकारियों से मांग लें।
विज्ञापन
कैंट बोर्ड ने भेजा लेटर...छावनी के पास ही चाहिए जमीन
लाल फाटक ओवरब्रिज के लिए कैंट बोर्ड के अफसरों ने जिला प्रशासन को यह लेटर भेज दिया है कि उन्हें छावनी के पास ही जमीन चाहिए। तहसील प्रशासन के पास भी इसकी लिखित सूचना पहुंच चुकी है। जाहिर है कि बोर्ड के अफसर जमीन अधिग्रहण के मामले में पूरी तरह सख्त है। अब प्रशासन और सेतु निगम को इसका हल तलाश करना है।
विज्ञापन
तय ही नहीं अफसर आखिर चाहते क्या हैं
ओवरब्रिज के निर्माण में सेतु निगम, प्रशासन, पीडब्ल्यूडी और कैंट बोर्ड के अफसर शामिल हैं लेकिन भूमि अधिग्रहण पर अब तक अधिकारियों के बीच सहमति नहीं बन सकी है जबकि प्रोजेक्ट शुरू हुए दो साल का वक्त बीत चुका है। पहले बभिया में जमीन देखी गई। ऐन वक्त पर कैंट बोर्ड ने इसे दूर बताते हुए लेने से मना कर दिया। फिर सर्किल रेट को लेकर दिक्कत सामने आई। इसलिए तय यह हुुआ है कि इस मामले को लेकर जल्द ही डीएम के नेतृत्व में संबंधित उच्चाधिकारियों की भी मीटिंग हो जाए।
कैंट बोर्ड ने जिस कीमत की भूमि मांगी है, प्रथमदृष्टया उतनी सरकारी जमीन छावनी के पास नहीं चिह्नित हो सकी है। भूमि नहीं मिल सकी तो सेतु निगम को इसके लिए भी तैयार रहना होगा कि वह किसानों की उनकी निजी भूमि की भी खरीद करे। - एमपी सिंह, उपजिलाधिकारी सदर