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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   आवासीय एरिया में ‘बार’ लाइसेंस देने का विवाद गहराया

नियम ताक पर रख आवासीय क्षेत्र में दिया ‘बार एंड रेस्टोरेंट’ का लाइसेंस, दो विभागों में विवाद

Mon, 12 Nov 2018 01:46 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली Updated Mon, 12 Nov 2018 01:46 AM IST
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आवासीय एरिया में ‘बार’ लाइसेंस देने का विवाद गहराया
प्रतीकात्मक तस्वीर

आवासीय एरिया में ‘बार एंड रेस्टोरेंट’ का लाइसेंस देने में नियम-कानून ताक पर रखने का विवाद गहरा गया है। आबकारी विभाग ने नगर निगम, सीलिंग, बीडीए समेत अन्य विभागों की एनओसी के बिना ही ‘बार’ का लाइसेंस जारी करने पर गोलमोल जवाब दिए हैं। आबकारी अधिकारी ने ‘बार’ लाइसेंस देने में एनओसी की जरूरत से ही इंकार कर दिया। उधर, बीडीए ने भी आवासीय एरिया में बनी ‘बार’ बिल्डिंग की आठ लाख रुपये जमा कराकर इस शर्त पर कंपाउंडिंग कर दी कि बिल्डिंग का उपयोग सिर्फ रहने के लिए होगा। मगर, अब बिल्डिंग के बाहर ‘बार एंड रेस्टोरेंट’ खुलने का बोर्ड लग गया है। मामले की शिकायत कमिश्नर से की गई है।

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स्टेडियम रोड पर रेजीडेंसी कॉलोनी के सामने मॉडल टाउन कॉलोनी में कई दिनों से बहुमंजिला बिल्डिंग बन रही थी। बरेली विकास प्राधिकरण से बिल्डिंग का नक्शा पास नहीं था। अमर उजाला ने जब बिल्डिंग का नक्शा मंजूर कराए बगैर निर्माण कराने का समाचार प्रकाशित किया तो बीडीए ने बिल्डिंग चालान करने के बाद सील कर दी। भवन मालिक ने प्राधिकरण में आठ लाख रुपये जमा कराकर बिल्डिंग की आवासीय में कंपाउंडिंग करा ली और निर्माण दोबारा प्रारंभ कर दिया। उस समय बीडीए के चीफ टाउन प्लानर ने कहा कि आवासीय एरिया में बिल्डिंग की कंपाउंडिंग आवासीय की गई है, इसमें किसी तरह की व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने पर प्राधिकरण भवन को दोबारा सील करके नियमानुसार कार्रवाई करेगा।
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यह कहने के तीन दिन के अंदर बिल्डिंग के बाहर ‘बार एंड रेस्टोरेंट’ खुलने का बोर्ड लग गया। जिला आबकारी अधिकारी का कहना है कि जिसने भी मॉडल टाउन में ‘बार एंड रेस्टोरेंट’ खोला है, उसका विभाग से पुराना लाइसेंस है। ‘बार’ का लाइसेंस लेने के लिए किसी भी विभाग की एनओसी की जरूरत नहीं होती। लाइसेंस देने पर ‘बार’ समिति निर्णय करती है, न कि वह अकेले। उधर, बीडीए ने आबकारी विभाग द्वारा आवासीय एरिया में ‘बार एंड रेस्टोरेंट’ का लाइसेंस देने के तरीके पर सवाल उठाए हैं। बीडीए उपाध्यक्ष ने कहा- लाइसेंस देने से पहले आबकारी विभाग को प्राधिकरण से एनओसी लेनी चाहिए थी। आवासीय एरिया में किसी भी हालत में ‘बार’ नहीं चलाया जा सकता।
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बीडीए ने नक्शा मंजूर न होने की वजह से बिल्डिंग को सील किया था। भवन मालिक ने उसमें आठ लाख रुपये जमा कराकर बिल्उिंग की कंपाउंडिंग करा ली। अगर आवासीय बिल्डिंग में ‘बार एंड रेस्टोरेंट’ खुल रहा है तो प्राधिकरण उसमें नियमानुसार कार्रवाई करेगा। मगर आबकारी विभाग ने बिना एनओसी लिए कारोबारी को ‘बार’ लाइसेंस कैसे दे दिया। आखिर उनकी भी तो कुछ जिम्मेदारी है। - डॉ. सुरेंद्र कुमार पांडेय, उपाध्यक्ष बीडीए


कारोबारी का ‘बार’ का लाइसेंस पहले से था। इस तरह के लाइसेंस देने के समय किसी भी विभाग से एनओसी लेने का प्रावधान नहीं है। न ही पुराने लाइसेंस में नवीनीकरण करते समय हम लोकेशन निश्चित करते हैं। लाइसेंस का हर साल नवीनीकरण होना जरूरी है। लाइसेंस ‘बार’ समिति जारी करती है। - नारायण दुबे, जिला आबकारी अधिकारी

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