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ग्लैंडर्स का खौफ- बिथरी-भोजीपुरा के घोड़े शक के घेरे में
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बरेली। जिले के दो घोड़ों में ग्लैंडर्स पाए जाने के बाद विकास खंड बिथरी चैनपुर व भोजीपुरा को संवेदनशील घोषित कर दिया गया है। पशुपालन विभाग ब्लाक क्षेत्र के लगभग सभी घोड़ों के ब्लड का सैंपल लेकर जांच के लिए हिसार भेजेगा। बिथरी चैनपुर ब्लाक ऐसा ब्लाक है, जहां लगातार दूसरी साल एक घोड़ा ग्लैंडर्स से पीड़ित मिला है।
जिले में ग्लैंडर्स पीड़ित पाए गए दो घोड़ों को मर्सी डेथ दिए जाने के बाद से पशुपालन विभाग और चौकन्ना हो गया है। पशु पालन विभाग ने दोनों ही ब्लाकों को संवेदनशील घोषित कर दिया है। शहामतगंज पशु चिकित्सालय के प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. रामलखन ने बताया कि दोनों ही विकास खंड क्षेत्र में मौजूद घोड़ों की गणना का काम पूरा हो गया है। संबंधित ब्लाक क्षेत्र में पड़ने वाले पशु चिकित्सालयों के प्रभारियों की अगुवाई में टीम गठित कर दी गई है। उन्होंने बताया कि कुछ घोड़ों के खून के नमूने पहले ही प्राप्त कर जांच को भेजे जा चुके है। शेष बचे सभी घोड़ों के खून के नमूने भी जल्द भेज दिए जाएंगे। पशु पालन विभाग का सबसे अधिक जोर बिथरी चैनपुर ब्लाक के घोड़ों पर है। वजह यह है कि पिछले साल भी जिले में मिले पांच ग्लैंडर्स पीड़ित घोड़ों में से एक घोड़ा बिथरी चैनपुर का था। पशुपालन विभाग के पास जब उस घोड़े की जांच रिपोर्ट आई उससे पहले घोड़ा मर चुका था। इस साल भी जिले के जिन दो विकास खंडों में ग्लैंडर्स पीड़ित घोड़े मिले हैं, उनमे से एक घोड़ा बिथरी चैनपुर ब्लाक के ही रिठौरा निवासी अनोखेलाल का था।
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जिले में ग्लैंडर्स पीड़ित पाए गए दो घोड़ों को मर्सी डेथ दिए जाने के बाद से पशुपालन विभाग और चौकन्ना हो गया है। पशु पालन विभाग ने दोनों ही ब्लाकों को संवेदनशील घोषित कर दिया है। शहामतगंज पशु चिकित्सालय के प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. रामलखन ने बताया कि दोनों ही विकास खंड क्षेत्र में मौजूद घोड़ों की गणना का काम पूरा हो गया है। संबंधित ब्लाक क्षेत्र में पड़ने वाले पशु चिकित्सालयों के प्रभारियों की अगुवाई में टीम गठित कर दी गई है। उन्होंने बताया कि कुछ घोड़ों के खून के नमूने पहले ही प्राप्त कर जांच को भेजे जा चुके है। शेष बचे सभी घोड़ों के खून के नमूने भी जल्द भेज दिए जाएंगे। पशु पालन विभाग का सबसे अधिक जोर बिथरी चैनपुर ब्लाक के घोड़ों पर है। वजह यह है कि पिछले साल भी जिले में मिले पांच ग्लैंडर्स पीड़ित घोड़ों में से एक घोड़ा बिथरी चैनपुर का था। पशुपालन विभाग के पास जब उस घोड़े की जांच रिपोर्ट आई उससे पहले घोड़ा मर चुका था। इस साल भी जिले के जिन दो विकास खंडों में ग्लैंडर्स पीड़ित घोड़े मिले हैं, उनमे से एक घोड़ा बिथरी चैनपुर ब्लाक के ही रिठौरा निवासी अनोखेलाल का था।
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