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छात्रों ने खर्च कर ली छात्रवृत्ति, अब कॉलेजों ने रोके फॉर्म
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बरेली। सरकार से शुल्क प्रतिपूर्ति को लेकर छात्राें ने कॉलेजों की फीस ही नहीं जमा की। अब जब कॉलेजों ने उनके परीक्षा फॉर्म अग्रसारित करने से ही रोक दिए तो छात्रों की परेशानी बढ़ी। अब वह विश्वविद्यालय के चक्कर काट रहे हैं और फॉर्म जमा कराने की मांग रहे हैं। सोमवार को ही दर्जनों छात्र इस प्रकार की समस्या लेकर परीक्षा नियंत्रक के पास पहुंचे।
दरअसल, एससी व एसटी वर्ग के छात्रों के प्रवेश शून्य फीस पर होते हैं। शासन उनके खातों में सीधे फीस भेजता है, जो छात्रों को कॉलेजों में जमा करनी होती है। परीक्षा शुल्क भी उसी फीस में शामिल होता है। आरोप है कि इस बार छात्रों ने परीक्षा शुल्क दबा लिया है। फीस भी नहीं जमा की। अब कॉलेज उनसे फीस वसूलना चाहते हैं। फीस निकलवाने के लिए कॉलेजों ने उनके परीक्षा फॉर्म अग्रसारित करने से रोक दिए। बिजनौर, मुरादाबाद, संभल में ऐसे छात्रों की संख्या अधिक है। छात्रों का कहना है कि जितनी छात्रवृत्ति आई कॉलेज उससे ज्यादा फीस मांग रहे हैं। कुछ कॉलेजों ने तो उनकी बैंक पासबुक ही अपने कब्जे में ले रखी है और खुद ही पैसा निकाल लिया, जबकि कॉलेजों ने पैसा निकाला और फीस नहीं जमा की। अब फॉर्म जमा करने के वक्त फीस मांगी जा रही है। परीक्षा नियंत्रक संजीव कुमार ने का कहना है कि छात्र कॉलेजों की फीस दें। अगर कॉलेज शुल्क प्रतिपूर्ति से ज्यादा फीस मांग रहे हैं तो उसकी शिकायत करें। छात्रों को फीस तो जमा ही करनी होगी।
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दरअसल, एससी व एसटी वर्ग के छात्रों के प्रवेश शून्य फीस पर होते हैं। शासन उनके खातों में सीधे फीस भेजता है, जो छात्रों को कॉलेजों में जमा करनी होती है। परीक्षा शुल्क भी उसी फीस में शामिल होता है। आरोप है कि इस बार छात्रों ने परीक्षा शुल्क दबा लिया है। फीस भी नहीं जमा की। अब कॉलेज उनसे फीस वसूलना चाहते हैं। फीस निकलवाने के लिए कॉलेजों ने उनके परीक्षा फॉर्म अग्रसारित करने से रोक दिए। बिजनौर, मुरादाबाद, संभल में ऐसे छात्रों की संख्या अधिक है। छात्रों का कहना है कि जितनी छात्रवृत्ति आई कॉलेज उससे ज्यादा फीस मांग रहे हैं। कुछ कॉलेजों ने तो उनकी बैंक पासबुक ही अपने कब्जे में ले रखी है और खुद ही पैसा निकाल लिया, जबकि कॉलेजों ने पैसा निकाला और फीस नहीं जमा की। अब फॉर्म जमा करने के वक्त फीस मांगी जा रही है। परीक्षा नियंत्रक संजीव कुमार ने का कहना है कि छात्र कॉलेजों की फीस दें। अगर कॉलेज शुल्क प्रतिपूर्ति से ज्यादा फीस मांग रहे हैं तो उसकी शिकायत करें। छात्रों को फीस तो जमा ही करनी होगी।
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