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बरेली कॉलेज प्रकरणः जल्द कंट्रोलर के हवाले हो सकता है बरेली कॉलेज
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बरेली। बरेली कॉलेज मैनेजमेंट चुनाव पर उठे विवाद पर अफसर ताव दिखाकर भले ही शांत हो गए हों, लेकिन विश्वविद्यालय ने कार्रवाई शुरू कर दी है। पर्यवेक्षक की रिपोर्ट सारे दस्तावेजों के साथ शासन को भेज दी गई है। इसमें मैनेजमेंट कमेटी भंग करने और रिसीवर बैठाने की संस्तुति की गई है। माना जा रहा है कि बरेली कॉलेज जल्द कंट्रोलर के हवाले हो सकता है। क्योंकि प्रशासनिक अफसर अब चुनाव कराने के मूड में नहीं दिख रहे। वहीं मैनेजमेंट के लोग भी चाह रहे हैं कि चुनाव टले।
बरेली कॉलेज मैनेजमेंट कमेटी का चुनाव फरवरी में होना था। दस माह से चुनाव लंबित है, उसके बावजूद मैनेजमेंट कमेटी अपना काम कर रही, जबकि चुनाव कराकर नई कमेटी गठित होनी चाहिए थी। बोर्ड के अध्यक्ष कमिश्नर और मैनेजमेंट कमेटी के अध्यक्ष डीएम ने भी कॉलेज के चुनाव को तवज्जो नहीं दी। अगर अफसरों को फिक्र होती तो चुनाव हो गए थे और न इतना विवाद बढ़ता। अब चुनाव होने हैं तो विश्वविद्यालय द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक ने अनुमोदन के रिकॉर्ड न मिलने पर बोर्ड के 14 सदस्य अवैध घोषित कर दिए हैं। मैनेजमेंट में खलबली मची हुई है। प्रबंधन लगातार कह रहा है कि वह चुनाव के पक्ष में है, लेकिन कमिश्नर ने बैठक का वक्त नहीं दिया। उन्होंने चुनाव न होने का सारा ठीकरा कमिश्नर पर फोड़ा। अब विश्वविद्यालय ने पूरे मामले की रिपोर्ट शासन को भेजी है। इसमें पर्यवेक्षक की रिपोर्ट जिसमें मैनेजमेंट भंग करने और रिसीवर बैठाने की संस्तुति की गई है। इसमें बायलॉज से जुड़े सारे रिकॉर्ड, भूतपूर्व कुलपति प्रोफेसर जाहिद हुसैन जैदी की रिपोर्ट के साथ कॉलेज से जुड़े तमाम रिकॉर्ड लगाकर रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। सूत्रों की माने तो जल्द ही कॉलेज में रिसीवर बैठ सकता है, क्योंकि अभी चुनाव होना मुश्किल लग रहा है। वहीं बोर्ड के सदस्यों ने कमिश्नर से वक्त मांगा था। अभी तक उनकी बैठक नहीं हो सकी है। अगर बैठक में कोई हल नहीं निकलता है तो मैनेजमेंट कोर्ट का रुख करने की तैयारी में है।
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बरेली कॉलेज मैनेजमेंट कमेटी का चुनाव फरवरी में होना था। दस माह से चुनाव लंबित है, उसके बावजूद मैनेजमेंट कमेटी अपना काम कर रही, जबकि चुनाव कराकर नई कमेटी गठित होनी चाहिए थी। बोर्ड के अध्यक्ष कमिश्नर और मैनेजमेंट कमेटी के अध्यक्ष डीएम ने भी कॉलेज के चुनाव को तवज्जो नहीं दी। अगर अफसरों को फिक्र होती तो चुनाव हो गए थे और न इतना विवाद बढ़ता। अब चुनाव होने हैं तो विश्वविद्यालय द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक ने अनुमोदन के रिकॉर्ड न मिलने पर बोर्ड के 14 सदस्य अवैध घोषित कर दिए हैं। मैनेजमेंट में खलबली मची हुई है। प्रबंधन लगातार कह रहा है कि वह चुनाव के पक्ष में है, लेकिन कमिश्नर ने बैठक का वक्त नहीं दिया। उन्होंने चुनाव न होने का सारा ठीकरा कमिश्नर पर फोड़ा। अब विश्वविद्यालय ने पूरे मामले की रिपोर्ट शासन को भेजी है। इसमें पर्यवेक्षक की रिपोर्ट जिसमें मैनेजमेंट भंग करने और रिसीवर बैठाने की संस्तुति की गई है। इसमें बायलॉज से जुड़े सारे रिकॉर्ड, भूतपूर्व कुलपति प्रोफेसर जाहिद हुसैन जैदी की रिपोर्ट के साथ कॉलेज से जुड़े तमाम रिकॉर्ड लगाकर रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। सूत्रों की माने तो जल्द ही कॉलेज में रिसीवर बैठ सकता है, क्योंकि अभी चुनाव होना मुश्किल लग रहा है। वहीं बोर्ड के सदस्यों ने कमिश्नर से वक्त मांगा था। अभी तक उनकी बैठक नहीं हो सकी है। अगर बैठक में कोई हल नहीं निकलता है तो मैनेजमेंट कोर्ट का रुख करने की तैयारी में है।
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