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वन विभाग के कर्मचारियों में भी कब्र बिज्जू की दहशत
Updated Wed, 12 Sep 2018 12:16 AM IST
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कब्र खोदकर लाश खाने वाले बिज्जुओं की दहशत वन विभाग के कर्मचारियों में भी है। रात में बिज्जुओं को घरों की दीवारों और छतों पर चढ़ते देखकर कर्मचारी सहम जाते हैं। इसके बावजूद वन विभाग के अधिकारी कब्र बिज्जुओं के आतंक से लोगों को निजात दिलाने के लिए कोई पहल करते नहीं दिख रहे हैं। गौंटिया कब्रिस्तान के पास स्थित वन विभाग, वन निगम, विकास भवन, काष्ठकला केंद्र में रात में बिज्जुओं का आतंक रहता है। चौकीदार के मुताबिक, बिज्जुुओं के सामने आने पर शांत खड़े रहकर उनके गुजरने का इंतजार करने के अलावा और कोई चारा नहीं होता। कब्रिस्तान की बाउंड्री पर चढ़कर कब्र बिज्जू रात में कार्यालय तक पहुंच जाते हैं। वन विभाग की कॉलोनी में तो रातभर इनकी धमाचौकड़ी रहती है।
गौंटिया कब्रिस्तान में कब्र बिज्जुओं की भरमार
कब्र बिज्जू नदियों के किनारे और कब्रिस्तानों में ही मांद बनाकर रहते हैं। गौंटिया कब्रिस्तान में इनकी बड़ी तादाद है। वन विभाग के अधिकारियों को इसकी जानकारी है लेकिन इन्हें पकड़कर शहर से बाहर छोड़ने के सवाल पर वे खामोश हैं।
लोगों की बात : फोटो
रात में दुकान बंद करते समय अक्सर कब्र बिज्जू दिखते हैं। यहां दर्जनों की तादाद में बिज्जू रहते हैं। उनके डर से जल्दी दुकान बंद करनी पड़ती है।
- अलाउद्दीन, दुकानदार
हर दिन यहां बिज्जू निकलते हैं। कुछ दिन पहले बिज्जू के तीन बच्चों को कुत्तों ने मार डाला था। वन निगम कार्यालय के आसपास भी इनका डेरा है।
- महेंद्र पाल, एई, वन निगम
रात में घर की छत पर बिज्जू आ जाते हैं। घनी झाड़ियां होने की वजह से शाम को बच्चों को घर से बाहर नहीं निकलने देते। अक्सर बिज्जू हमलावर हो जाते हैं। - वीर सिंह, चौकीदार, काष्ठकला परिसर
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बिज्जू तब तक हमला नहीं करता, जब तक उसे खुद खतरा महसूस न हो। जहां मैं रहता हूं वहां भी बिज्जू रहते हैं। कार्यालय में भी देखे जाते हैं। यह खतरनाक नहीं हैं।- भरत लाल, डीएफओ
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गौंटिया कब्रिस्तान में कब्र बिज्जुओं की भरमार
कब्र बिज्जू नदियों के किनारे और कब्रिस्तानों में ही मांद बनाकर रहते हैं। गौंटिया कब्रिस्तान में इनकी बड़ी तादाद है। वन विभाग के अधिकारियों को इसकी जानकारी है लेकिन इन्हें पकड़कर शहर से बाहर छोड़ने के सवाल पर वे खामोश हैं।
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लोगों की बात : फोटो
रात में दुकान बंद करते समय अक्सर कब्र बिज्जू दिखते हैं। यहां दर्जनों की तादाद में बिज्जू रहते हैं। उनके डर से जल्दी दुकान बंद करनी पड़ती है।
- अलाउद्दीन, दुकानदार
हर दिन यहां बिज्जू निकलते हैं। कुछ दिन पहले बिज्जू के तीन बच्चों को कुत्तों ने मार डाला था। वन निगम कार्यालय के आसपास भी इनका डेरा है।
- महेंद्र पाल, एई, वन निगम
रात में घर की छत पर बिज्जू आ जाते हैं। घनी झाड़ियां होने की वजह से शाम को बच्चों को घर से बाहर नहीं निकलने देते। अक्सर बिज्जू हमलावर हो जाते हैं। - वीर सिंह, चौकीदार, काष्ठकला परिसर
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बिज्जू तब तक हमला नहीं करता, जब तक उसे खुद खतरा महसूस न हो। जहां मैं रहता हूं वहां भी बिज्जू रहते हैं। कार्यालय में भी देखे जाते हैं। यह खतरनाक नहीं हैं।- भरत लाल, डीएफओ