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यूजीसी सख्त, शोध में साहित्यिक चोरी पर अब मिलेगी कड़ी सजा

Mon, 06 Aug 2018 01:46 AM IST
Updated Mon, 06 Aug 2018 01:46 AM IST
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यूजीसी सख्त, शोध में साहित्यिक चोरी पर अब मिलेगी कड़ी सजा
बरेली। पीएचडी में फर्जीवाड़ा करने और कराने वालों पर अब सख्ती की जाएगी। यूजीसी ने (उच्च शिक्षण संस्थानों में अकादमिक सत्यनिष्ठा एवं साहित्यिक चोरी रोकथाम को प्रोत्साहन) विनियम 2018 जारी किया है जिसके तहत पीएचडी थीसिस में साठ फीसदी तक साहित्यिक चोरी पकड़े जाने पर शोधार्थी का पंजीकरण निरस्त कर दिया जाएगा। इतनी ही साहित्यिक चोरी अगर किसी शिक्षक के रिसर्च पेपर में पकड़ी गई तो वह दो साल तक पीएचडी का पर्यवेक्षक नहीं बन पाएगा। रिसर्च पेपर में फर्जीवाड़ा करने वाले शिक्षकों की सीधे सेवाएं समाप्त की जाएंगी। साहित्यिक चोरी क्या है और उच्च शिक्षण संस्थानों में इसे रोकने के लिए क्या दंड दिया जा सकता है, गजट में यह भी विस्तार से स्पष्ट किया गया है। इस गजट के दायरे में उच्च शिक्षण संस्थानों के छात्र, संकायों के शोधकर्ता और कर्मचारी आएंगे। शोध कार्यों में लगातार हो रहे फर्जीवाड़ों को रोकने के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों की व्यापक जिम्मेदारी भी तय की गई है।
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विश्वविद्यालय और कॉलेजों में बनेंगी डीएआईपी
शोध कार्यों में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए उच्च शिक्षा संस्थानों में एक विभागीय शैक्षिक सत्यनिष्ठा नाम सूची (डीएआईपी) तैयार होगी। सम-कुलपति या संकाय अध्यक्ष या वरिष्ठ शिक्षाविद् इसका अध्यक्ष होगा और तीन सदस्य होंगे। कॉलेजों में डीएआईपी में विभागाध्यक्ष अध्यक्ष, विभाग का वरिष्ठ शिक्षक सदस्य होगा, एक अन्य सदस्य होगा। डीएआईपी पर मूल्यांकन करने, रिपोर्ट देने और कार्रवाई की सिफारिश करने की जिम्मेदारी होगी।
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पीएचडी थीसिस और डिजर्टेशन में समानता मिलने पर ये होगी कार्रवाई
-10 फीसदी तक समानताएं : कोई दंड नहीं
-10-40 फीसदी तक समानताएं : ऐसे छात्रों को अधिकतम छह माह की विनिर्धारित अवधि के भीतर संशोधित आलेख जमा करने के निर्देश।
-40-60 फीसदी तक समानताएं : ऐसे छात्रों को अधिकतम एक वर्ष के लिए संशोधित आलेखक जमा करने के निर्देश।
-60 फीसदी से अधिक समानताएं : ऐसे छात्रों का पीएचडी पंजीकरण रद्द होगा।
-बार बार साहित्य चोरी करने पर कारगर दंड दिया जाएगा।

शैक्षिक और शोध प्रकाशकों पर साहित्यिक चोरी के लिए कार्रवाई
-10 फीसदी तक समानताएं : कोई दंड नहीं
-10-40 फीसदी तक समानताएं : ऐसे छात्रों को पांडुलिपि वापस लेने को कहा जाए।
-40-60 फीसदी तक समानताएं : रिसर्च पेपर वापस लेने, वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने और अगर शिक्षक हैं तो उनको दो वर्ष तक पीएचडी या एमफिल का गाइड बनने की अनुमति न दी जाए।
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-60 फीसदी से अधिक समानताएं : लगातार दो वर्ष तक वेतन वृद्धि रोकने, तीन वर्षों के लिए गाइड बनने से वंचित कर दिया जाए।
-बार-बार साहित्यिक चोरी करने पर सेवा समाप्ति सहित अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

एक मामले में पहले से चल रही है जांच
एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय में हाल ही में साहित्यिक चोरी का एक मामला पकड़ा गया था। विश्वविद्यालय की एक शिक्षिका ने लखनऊ की एक यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर का रिसर्च अपने नाम से प्रकाशित करा लिया। राजभवन तक यह मामला पहुंचने के बाद अब कुलपति उसकी जांच करा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक इस तरह के और भी कई मामले विश्वविद्यालय में हैं, लेकिन अनदेखी के कारण उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है।

एंटी प्लेगरिज्म सॉफ्टवेयर पकड़ेगा चोरी
विश्वविद्यालय शोध में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए एंटी प्लेगरिज्म सॉफ्टवेयर लेने जा रहा है। जितने भी शोध होंगे उनकी सॉफ्टकॉपी इस साफ्टवेयर पर अपलोड की जाएगी। थीसिस में कितना साहित्य बाहर से लिया गया वह पकड़ में आ जाएगा।


शोध प्रकाशन और पीएचडी थीसिस में साहित्यिक चोरी रोकने के लिए यूजीसी पहले ही कदम उठा रहा है। अब गजट भी जारी हो गया है। शोध में किसी तरह का साहित्यिक चोरी न हो इसलिए ठोस इंतजाम कर रहे हैं। -प्रो. अनिल शुक्ल, कुलपति
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