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इंटर के बाद शिक्षक बनने का रास्ता साफ, अगले सत्र से होंगे एडमिशन
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बरेली। इंटर के बाद शिक्षक बनने का रास्ता साफ हो गया है। एनसीटीई (नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजूकेशन) ने उत्तर प्रदेश में चार वर्षीय एकीकृत अध्यापक शिक्षा कार्यक्रम (आईटीईपी) चलाने को मंजूरी दे दी है। रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने सकुर्लर जारी करके कहा है कि इच्छुक महाविद्यालय 31 जुलाई तक एनसीईटी की वेबसाइट पर आवेदन कर सकते हैं।
इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद तमाम छात्र-छात्राएं स्नातक की पढ़ाई करने में लग जाते हैं तो कुछ नौकरी हासिल करने के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की ओर रुख कर लेते हैं। जो शिक्षक बनना चाहते हैं, वे स्नातक के बाद डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजूकेशन (डीएलएड) अथवा बीएड में प्रवेश लेकर पढ़ाई करते हैं। लेकिन एनसीटीई ने अब 12वीं के बाद ही सीधे शिक्षक बनने का रास्ता खोल दिया है। इसके लिए एनसीटीई चार वर्षीय एकीकृत अध्यापक शिक्षा कार्यक्रम संचालित करेगा।
अभी मान्यता, अगले सत्र से एडमिशन
रुहेलखंड विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. सुनीता पांडेय की ओर से जारी सर्कुलर में कहा गया है कि जो कॉलेज यह कोर्स चलाना चाहते हैं, उन्हें 31 जुलाई तक एनसीटीई की वेबसाइट पर आवेदन करना होगा। वहीं, रुहेलखंड विश्वविद्यालय में बीएड के विभागाध्यक्ष प्रो. बीआर कुकरेती ने बताया कि इस साल कॉलेजों की मान्यता संबंधी प्रक्रिया होगी और अगले सत्र से एडमिशन शुरू हो जाएंगे।
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समय की होगी बचत
आईटीईपी शुरू होने से बीएड और डीएलएड पर संकट के बादल छाने वाले हैं। यह दोनों कोर्स दो साल के हैं और स्नातक के बाद होते हैं। ऐसे में शिक्षक बनने के लिए 12वीं के बाद छात्र-छात्राओं को पांच साल लगते हैं। मगर आईटीईपी कोर्स चार का है और 12वीं के बाद होगा। ऐसे में छात्र-छात्राओं का एक साल का समय भी बचेगा।
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इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद तमाम छात्र-छात्राएं स्नातक की पढ़ाई करने में लग जाते हैं तो कुछ नौकरी हासिल करने के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की ओर रुख कर लेते हैं। जो शिक्षक बनना चाहते हैं, वे स्नातक के बाद डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजूकेशन (डीएलएड) अथवा बीएड में प्रवेश लेकर पढ़ाई करते हैं। लेकिन एनसीटीई ने अब 12वीं के बाद ही सीधे शिक्षक बनने का रास्ता खोल दिया है। इसके लिए एनसीटीई चार वर्षीय एकीकृत अध्यापक शिक्षा कार्यक्रम संचालित करेगा।
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अभी मान्यता, अगले सत्र से एडमिशन
रुहेलखंड विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. सुनीता पांडेय की ओर से जारी सर्कुलर में कहा गया है कि जो कॉलेज यह कोर्स चलाना चाहते हैं, उन्हें 31 जुलाई तक एनसीटीई की वेबसाइट पर आवेदन करना होगा। वहीं, रुहेलखंड विश्वविद्यालय में बीएड के विभागाध्यक्ष प्रो. बीआर कुकरेती ने बताया कि इस साल कॉलेजों की मान्यता संबंधी प्रक्रिया होगी और अगले सत्र से एडमिशन शुरू हो जाएंगे।
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आईटीईपी शुरू होने से बीएड और डीएलएड पर संकट के बादल छाने वाले हैं। यह दोनों कोर्स दो साल के हैं और स्नातक के बाद होते हैं। ऐसे में शिक्षक बनने के लिए 12वीं के बाद छात्र-छात्राओं को पांच साल लगते हैं। मगर आईटीईपी कोर्स चार का है और 12वीं के बाद होगा। ऐसे में छात्र-छात्राओं का एक साल का समय भी बचेगा।