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बरेली-सीतापुर फोरलेन लाइव- मंत्री जी! सिस्ट चेत जाता तो आपका बेटा न जाता
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बरेली। करीब 18 सौ करोड़ रुपये फूंककर बनाया गया बरेली-सीतापुर फोरलेन बेहद खतरनाक हो चला है। इस निर्माण के इस कदर ‘करप्शन’ हुआ है कि कई जगहों पर दरकते और टूटते हाईवे पर खूनी प्वाइंट बन गए हैं। कुछ दिन पहले अमर उजाला ने इस खतरनाक फोरलेन पर हादसों की आशंका जताते हुए इसके बदतर हालात से प्रशासन को रूबरू कराया था, लेकिन अफसरशाही पर इसका कोई फर्क नहीं पड़ा। उस वक्त अगर प्रशासन चेत जाता तो आज उत्तराखंड के मंत्री का बेटा असमय ही दुनिया से नहीं जाता।
इस हाईवे का ठेका लेने वाली इरा इंफ्रा स्ट्रक्चर कंपनी के बीच में ही काम छोड़ने के बाद पिछले साल ही यह हाईवे तहस-नहस होना शुरू हो गया था। मरम्मत के नाम पर साढ़े सात करोड़ बहाए गए, लेकिन उस रकम से जिम्मेदारों ने अपनी ही ‘मरम्मत’ कर ली। अब ये हालात हो गए हैं कि रात में जरा भी निगाह चूकते हादसा हो जाता है। कई प्वाइंट तो दुर्घटना के लिहाज से बेहद संवेदनशील हो गए हैं। फिर भी यहां रोड सेफ्टी का कोई काम नहीं दिख रहा। सर्वाधिक खतरा फरीदपुर फ्लाईओवर पर है। कई जगह फ्लाईओवर के किनारे टूटकर गिर चुके हैं। सड़क भी कई फुट नीचे धंस जाने से गाड़ियों के आपस में टकराने और पलटने का खतरा बना हुआ है। इसके बावजूद फ्लाईओवर पर न कोई रेडियम सिग्नल है न क्षतिग्रस्त हिस्से से गुजरने वाले लोगों को अलर्ट करने के लिए कोई बोर्ड या क्रश बैरियर। बारिश का पूरा सीजन ही बाकी है और जर्जर हाईवे को दुरुस्त करने का कोई काम अब तक नहीं दिखाई दे रहा। ऐसे में स्थितियां और कितनी खतरनाक होंगी, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है।
डेंजर प्वाइंट नंबर-एक
गौसगंज के पास गहरा होता जा रहा गड्ढा बना जानलेवा
गौसगंज से पहले फरीदपुर हाईवे का कुछ हिस्सा बना ही नहीं है। इसलिए यहां पर रूट का डायवर्जन कर सड़क के एक साइड की लेन पर ही दोनों तरफ का ट्रैफिक काफी समय से गुजारा जा रहा है। रूट डायवर्जन के पास मोड़ पर गहरा गड्ढा हो गया है। सामने मिट्टी के ढेर लगे हुए हैं। ऐसे में वाहन इस गड्ढे में अचानक उछलकर अनियंत्रित होने से उनका दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा बना हुआ है। डायवर्जन से आगाह करने के लिए रेडियम बोर्ड अभी भी नहीं लगाए गए हैं। रोड के किनारे कुछ रेडियम पोल लगाए गए थे जो जर्जर हो चुके हैं।
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डेंजर प्वाइंट नंबर-दो
अधूरे टोल प्लाजा पर आए दिन पलटते हैं वाहन
रिलायंस पेट्रोल पंप के पास एनएचएआई ने टोल प्लाजा बनाने की तैयारी की थी। बाद में हाईवे का निर्माण कार्य ही ठप हो गया तो टोल प्लाजा का स्ट्रक्चर भी आधा-अधूरा छोड़ दिया गया। अब यहां बीच में गहरे गड्ढे हो गए हैं। इस डेंजर प्वाइंट से वाहन चालकों की जान बचाने के लिए कोई काम नहीं किया गया है। वैसे भी यहां काफी संकरी रोड है। यहां आए दिन वाहनों के पलटने से कई लोगों की मौत हो चुकी है।
डेंजर प्वाइंट नंबर-तीन
कभी भी ढह सकता है फरीदपुर फ्लाईओवर
सबसे बड़ा खतरा फरीदपुर बाईपास के फ्लाईओवर पर है। यहां मिट्टी के बहने, हाईवे के दरकने और धंसने का सिलसिला जारी है। फ्लाईओवर की एप्रोच रोड पर खतरनाक गड्ढों का आकार लगातार बढ़ता जा रहा है। जरा सी नजर चूकते ही इसमें वाहनों का गिरने का खतरा है। एनएचएआई ने खतरा भांपते हुए फ्लाईओवर पर आवागमन बंद कर दिया था, लेकिन सख्ती न होने से बेरोकटोक सैकड़ों क्ंिवटल वजनी ट्रक सहित दूसरे वाहन दिनरात दौड़ लगा रहे हैं।
डेंजर प्वाइंट नंबर-चार
सर्विस लेन पर उड़ती धूल से भी हादसे का डर
एनएचएआई ने फरीदपुर फ्लाईओवर पर एक साइड में ही सर्विस लेन बनाई है। रोड के दूसरे साइड में सर्विस लेन न बनी होने से भी वाहनों को मजबूरी में खस्ताहाल फ्लाईओवर के ऊपर से गुजरना पड़ रहा है। इसमें दिक्कत यह है कि सर्विस लेन के पास मिट्टी बड़े ढेर लगे हैं। वाहनों से गुजरने से वहां धूल का गुबार बन रहा है। इससे एक्सीडेंट का खतरा बना रहता है।
डेंजर प्वाइंट नंबर-पांच
नहीं बंद किए गए ‘मौत के कट’
रजऊ परसपुर से फरीदपुर के बीच हाईवे पर छह से आठ फुट चौड़े डिवाइडर बनाए गए थे। इन पर पेड़ लगाए जाने थे। ताकि रात में सामने से आ रहे वाहनों की हेडलाइट ड्राइवर की आंखों पर न पड़े । लेकिन डिवाइडर पर अब तक पेड़ नहीं लगाए गए हैं। जगह-जगह सीमेंट की बाउंड्री टूट गई है। गांववालों ने सहूलियत के हिसाब से डिवाइडर तोड़कर वहां कट बना दिए हैं। ऐसे में रास्ता क्रास करते हुए हादसे का खतरा बना रहता है। फरीदपुर बाईपास से पहले शहर में जाने के लिए भी कट पर कोई सुरक्षा नहीं है।
अभी सीतापुर की तरफ काम शुरू, बरेली का नंबर बाद में
इस हाईवे की रिपेयरिंग के लिए एनएचएआई अधिकारियों ने करीब छह करोड़ का टेंडर दे दिए हैं। हालांकि इससे छिटपुट ही काम हो सकेंगे। पूरा प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए अभी कम से कम 1200 करोड़ रुपये की जरूरत है। अफसरों का कहना है कि एक कंपनी ने सीतापुर की ओर मरम्मत का काम शुरू कर दिया है। दो-तीन दिन में बरेली की तरफ भी काम शुरू कराने का दावा किया जा रहा है। हालांकि हाईवे की हालत बरेली की साइड में काफी खराब है।
फिर ओवरब्रिज पर डाल दी रेतीली मिट्टी
फरीदपुर। ओवरब्रिज पर लाखों की मिट्टी बरसात में डाल दी गई। बारिश होने पर इस मिट्टी का बह जाना तय है। यानि हालात फिर जस के तस हो जाएंगे। फरीदपुर बाईपास से लेकर द्वारिकेश चीनी मिल तक तीन ओवरब्रिज हैं। बाईपास पर ओवरब्रिज को दोनो तरफ से गत वर्ष बरसात के बाद बंद कर दिया गया था। उसके बाद गुरुद्वारे के सामने बने ओवरव्रिज का कुछ हिस्सा भरभरा कर गिर गया था। जिस कारण शाहजहांपुर की तरफ से आने वालों को सर्विस लेन से निकाला जाने लगा। लेकिन कुछ दिन बाद ओवरब्रिज से वाहन गुजरने लगे। तीसरा ओवरब्रिज द्वारिकेश चीनी मिल पर बना हुआ है। गत वर्ष बरसात में कुछ दिन बंद रख कर चालू कर दिया गया। पिछले साल अगस्त में एनएचएआई के अधिकारियों ने रिपोर्ट दर्ज करवा दी, जिससे इरा कंपनी ने काम पूरी तरह से बंद कर दिया। इसके बाद एनएचएआई ने मिटटी डाल कर सड़के और ओवरब्रिज सही करने की कोशिश की। करोड़ों रुपये खर्च कर दिये, लेकिन हालात सही नहीं हुए। यात्रियों की जिंदगी की परवाह किए बगैर ओवरब्रिज शुरू कर दिए। पहली बरसात में अधिकारियों ने फिर ओवरब्रिज पर मिटटी का काम शुरू कर दिया है। यह रेतीली मिटटी है और अगर मिटटी को रोकने का कोई ठोस इंतजाम नहीं किया गया तो मिटटी वह बरसात के पानी के साथ बह जाएगी और हाईवे ओवरब्रिज यूं ही लोगों की जान लेते रहेंगे।
‘हाईवे की मरम्मत का काम शीघ्र शुरू होगा। एक कंपनी को ठेका मिल चुका है। इस हफ्ते फरीदपुर के आसपास काम शुरू कराने की तैयारी है। यह अधूरा प्रोजेेक्ट कब तक शुरू होगा, इस पर अभी कुछ कहना मुश्किल है।’
-एनपी सिंह, परियोजना निदेशक, एनएचएआई
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इस हाईवे का ठेका लेने वाली इरा इंफ्रा स्ट्रक्चर कंपनी के बीच में ही काम छोड़ने के बाद पिछले साल ही यह हाईवे तहस-नहस होना शुरू हो गया था। मरम्मत के नाम पर साढ़े सात करोड़ बहाए गए, लेकिन उस रकम से जिम्मेदारों ने अपनी ही ‘मरम्मत’ कर ली। अब ये हालात हो गए हैं कि रात में जरा भी निगाह चूकते हादसा हो जाता है। कई प्वाइंट तो दुर्घटना के लिहाज से बेहद संवेदनशील हो गए हैं। फिर भी यहां रोड सेफ्टी का कोई काम नहीं दिख रहा। सर्वाधिक खतरा फरीदपुर फ्लाईओवर पर है। कई जगह फ्लाईओवर के किनारे टूटकर गिर चुके हैं। सड़क भी कई फुट नीचे धंस जाने से गाड़ियों के आपस में टकराने और पलटने का खतरा बना हुआ है। इसके बावजूद फ्लाईओवर पर न कोई रेडियम सिग्नल है न क्षतिग्रस्त हिस्से से गुजरने वाले लोगों को अलर्ट करने के लिए कोई बोर्ड या क्रश बैरियर। बारिश का पूरा सीजन ही बाकी है और जर्जर हाईवे को दुरुस्त करने का कोई काम अब तक नहीं दिखाई दे रहा। ऐसे में स्थितियां और कितनी खतरनाक होंगी, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है।
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गौसगंज के पास गहरा होता जा रहा गड्ढा बना जानलेवा
गौसगंज से पहले फरीदपुर हाईवे का कुछ हिस्सा बना ही नहीं है। इसलिए यहां पर रूट का डायवर्जन कर सड़क के एक साइड की लेन पर ही दोनों तरफ का ट्रैफिक काफी समय से गुजारा जा रहा है। रूट डायवर्जन के पास मोड़ पर गहरा गड्ढा हो गया है। सामने मिट्टी के ढेर लगे हुए हैं। ऐसे में वाहन इस गड्ढे में अचानक उछलकर अनियंत्रित होने से उनका दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा बना हुआ है। डायवर्जन से आगाह करने के लिए रेडियम बोर्ड अभी भी नहीं लगाए गए हैं। रोड के किनारे कुछ रेडियम पोल लगाए गए थे जो जर्जर हो चुके हैं।
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अधूरे टोल प्लाजा पर आए दिन पलटते हैं वाहन
रिलायंस पेट्रोल पंप के पास एनएचएआई ने टोल प्लाजा बनाने की तैयारी की थी। बाद में हाईवे का निर्माण कार्य ही ठप हो गया तो टोल प्लाजा का स्ट्रक्चर भी आधा-अधूरा छोड़ दिया गया। अब यहां बीच में गहरे गड्ढे हो गए हैं। इस डेंजर प्वाइंट से वाहन चालकों की जान बचाने के लिए कोई काम नहीं किया गया है। वैसे भी यहां काफी संकरी रोड है। यहां आए दिन वाहनों के पलटने से कई लोगों की मौत हो चुकी है।
डेंजर प्वाइंट नंबर-तीन
कभी भी ढह सकता है फरीदपुर फ्लाईओवर
सबसे बड़ा खतरा फरीदपुर बाईपास के फ्लाईओवर पर है। यहां मिट्टी के बहने, हाईवे के दरकने और धंसने का सिलसिला जारी है। फ्लाईओवर की एप्रोच रोड पर खतरनाक गड्ढों का आकार लगातार बढ़ता जा रहा है। जरा सी नजर चूकते ही इसमें वाहनों का गिरने का खतरा है। एनएचएआई ने खतरा भांपते हुए फ्लाईओवर पर आवागमन बंद कर दिया था, लेकिन सख्ती न होने से बेरोकटोक सैकड़ों क्ंिवटल वजनी ट्रक सहित दूसरे वाहन दिनरात दौड़ लगा रहे हैं।
डेंजर प्वाइंट नंबर-चार
सर्विस लेन पर उड़ती धूल से भी हादसे का डर
एनएचएआई ने फरीदपुर फ्लाईओवर पर एक साइड में ही सर्विस लेन बनाई है। रोड के दूसरे साइड में सर्विस लेन न बनी होने से भी वाहनों को मजबूरी में खस्ताहाल फ्लाईओवर के ऊपर से गुजरना पड़ रहा है। इसमें दिक्कत यह है कि सर्विस लेन के पास मिट्टी बड़े ढेर लगे हैं। वाहनों से गुजरने से वहां धूल का गुबार बन रहा है। इससे एक्सीडेंट का खतरा बना रहता है।
डेंजर प्वाइंट नंबर-पांच
नहीं बंद किए गए ‘मौत के कट’
रजऊ परसपुर से फरीदपुर के बीच हाईवे पर छह से आठ फुट चौड़े डिवाइडर बनाए गए थे। इन पर पेड़ लगाए जाने थे। ताकि रात में सामने से आ रहे वाहनों की हेडलाइट ड्राइवर की आंखों पर न पड़े । लेकिन डिवाइडर पर अब तक पेड़ नहीं लगाए गए हैं। जगह-जगह सीमेंट की बाउंड्री टूट गई है। गांववालों ने सहूलियत के हिसाब से डिवाइडर तोड़कर वहां कट बना दिए हैं। ऐसे में रास्ता क्रास करते हुए हादसे का खतरा बना रहता है। फरीदपुर बाईपास से पहले शहर में जाने के लिए भी कट पर कोई सुरक्षा नहीं है।
अभी सीतापुर की तरफ काम शुरू, बरेली का नंबर बाद में
इस हाईवे की रिपेयरिंग के लिए एनएचएआई अधिकारियों ने करीब छह करोड़ का टेंडर दे दिए हैं। हालांकि इससे छिटपुट ही काम हो सकेंगे। पूरा प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए अभी कम से कम 1200 करोड़ रुपये की जरूरत है। अफसरों का कहना है कि एक कंपनी ने सीतापुर की ओर मरम्मत का काम शुरू कर दिया है। दो-तीन दिन में बरेली की तरफ भी काम शुरू कराने का दावा किया जा रहा है। हालांकि हाईवे की हालत बरेली की साइड में काफी खराब है।
फिर ओवरब्रिज पर डाल दी रेतीली मिट्टी
फरीदपुर। ओवरब्रिज पर लाखों की मिट्टी बरसात में डाल दी गई। बारिश होने पर इस मिट्टी का बह जाना तय है। यानि हालात फिर जस के तस हो जाएंगे। फरीदपुर बाईपास से लेकर द्वारिकेश चीनी मिल तक तीन ओवरब्रिज हैं। बाईपास पर ओवरब्रिज को दोनो तरफ से गत वर्ष बरसात के बाद बंद कर दिया गया था। उसके बाद गुरुद्वारे के सामने बने ओवरव्रिज का कुछ हिस्सा भरभरा कर गिर गया था। जिस कारण शाहजहांपुर की तरफ से आने वालों को सर्विस लेन से निकाला जाने लगा। लेकिन कुछ दिन बाद ओवरब्रिज से वाहन गुजरने लगे। तीसरा ओवरब्रिज द्वारिकेश चीनी मिल पर बना हुआ है। गत वर्ष बरसात में कुछ दिन बंद रख कर चालू कर दिया गया। पिछले साल अगस्त में एनएचएआई के अधिकारियों ने रिपोर्ट दर्ज करवा दी, जिससे इरा कंपनी ने काम पूरी तरह से बंद कर दिया। इसके बाद एनएचएआई ने मिटटी डाल कर सड़के और ओवरब्रिज सही करने की कोशिश की। करोड़ों रुपये खर्च कर दिये, लेकिन हालात सही नहीं हुए। यात्रियों की जिंदगी की परवाह किए बगैर ओवरब्रिज शुरू कर दिए। पहली बरसात में अधिकारियों ने फिर ओवरब्रिज पर मिटटी का काम शुरू कर दिया है। यह रेतीली मिटटी है और अगर मिटटी को रोकने का कोई ठोस इंतजाम नहीं किया गया तो मिटटी वह बरसात के पानी के साथ बह जाएगी और हाईवे ओवरब्रिज यूं ही लोगों की जान लेते रहेंगे।
‘हाईवे की मरम्मत का काम शीघ्र शुरू होगा। एक कंपनी को ठेका मिल चुका है। इस हफ्ते फरीदपुर के आसपास काम शुरू कराने की तैयारी है। यह अधूरा प्रोजेेक्ट कब तक शुरू होगा, इस पर अभी कुछ कहना मुश्किल है।’
-एनपी सिंह, परियोजना निदेशक, एनएचएआई