{"_id":"5d06a16d8ebc3e431f38b52c","slug":"15607156173-bareilly-news189","type":"story","status":"publish","title_hn":"आईएमए की हड़ताल का व्यापक असर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आईएमए की हड़ताल का व्यापक असर
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
बरेली। कोलकाता मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों सेमारपीट के विरोध में आईएमए के आह्वान पर सोमवार को जिले के सभी प्राइवेट डॉक्टर हड़ताल पर रहे। जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन कर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का पुतला फूंकने के बाद डॉक्टरों ने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा और डॉक्टरों को भयमुक्त माहौल उपलब्ध कराने और इस तरह की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई के लिए प्रभावी कानून बनाने की मांग की। डॉक्टरों की हड़ताल के दौरान निजी अस्पतालों में पहुंचे हजारों मरीजों को मायूस होकर लौटना पड़ा।
प्राइवेट डॉक्टरों की हड़ताल सोमवार को सुबह छह बजे शुरू हुई। डॉक्टर अपने अस्पतालों में नहीं पहुंचे। इन अस्पतालों में आए तमाम मरीजों को जिला अस्पताल जाना पड़ा तो ज्यादातर हड़ताल का पता लगने पर मायूस होकर गए। डॉक्टरों ने इस बीच सुबह दस बजे आईएमए परिसर में प्रदर्शन किया। कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. अनीता अजय ने कोलकाता में हुई घटना का जिक्र करते हुए कहा कि डॉक्टरों के साथ मारपीट की घटना निंदनीय है। अगर हड़ताल के बाद भी सरकार नहीं जागी तो चिकित्सकों को अपने आंदोलन को और अधिक व्यापक बनाने को मजबूर होना पड़ेगा। इसके बाद आईएमए से चौकी चौराहा तक मार्च निकालकर बंगाल सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन किया गया। बाद में आईएमए परिसर में ममता बनर्जी का पुतला भी जलाया गया। पुतला जलाते हुए कार्यकारी अध्यक्ष के दुपट्टे में आग लग गई जिसे पास में मौजूद लोगों ने बुझा दिया।
डॉक्टर बोले- हम ‘भगवान’ नहीं
प्रदर्शन के दौरान विधायक डॉ. अरुण कुमार ने कहा कि चिकित्सकों की मांग जायज है और वह उसे केंद्र और राज्य सरकारों तक पहुंचाएंगे। डॉ. सुदीप सरन ने कहा कि डॉक्टर ‘जादूगर’ नहीं है जो छड़ी घुमाकर गंभीर मरीज को सही कर दे। डॉ. रविश अग्रवाल ने कहा कि शत-प्रतिशत मरीजों को ठीक करना डॉक्टर के बस में नहीं है। अगर ऐसा होता तो डॉक्टर अपने घरवालो को कभी मरने न देता। प्रदर्शन में डॉ. अजय भारती, डॉ. रवि मेहरा, डॉ. अनूप आर्य, डॉ. रवि खन्ना, डॉ. अंशु अग्रवाल, डॉ. भारती सरन, डॉ. राघवेंद्र शर्मा, डॉ. विमल भारद्वाज, डॉ. मृदुला शर्मा और अन्य डॉक्टर शामिल रहे।
विज्ञापन
पुतला फूंकते डॉक्टरों की गाड़ी उठा ले गई पुलिस
प्रदर्शन के लिए आईएमए पहुंचे डॉक्टरों ने अपनी कारों को सड़कों पर खड़ा कर दिया। जिससे आईएमए के सामने रोड पर इससे जाम लगने लगा तो इसकी सूचना पर पहुंची ट्रैफिक पुलिस उनकी कारों को उठाने में जुट गई। दूसरी ओर डॉक्टर आईएमए परिसर में ममता बनर्जी का पुतला दहन कर रहे थे। सूचना मिलते ही प्रदर्शन छोड़कर डॉक्टर वाहनों को हटाने के लिए पहुंच गए।
‘रैपिड एक्शन फोर्स’ ने की निगरानी
कहीं किसी अस्पताल में ओपीडी तो तो नहीं चल रही, इसकी निगरानी के लिए डॉक्टरों ने ‘रैपिड एक्शन फोर्स’ बनाई थीं, इसकी टीमें सिविल लाइंस, स्टेडियम रोड, मिनी बाईपास और नैनीताल रोड, पीलीभीत बाईपास, सौ फुटा रोड, डीडीपुरम, राजेंद्र नगर, चौपुला और किला के अस्पतालों की निगरानी करती रहीं।
कुछ अस्पताल में नहीं हुई हड़ताल
शहर के सेटेलाइट के पास एक अस्पताल में गुपचुप तरीके से ओपीडी जारी रही। सूत्रों के मुताबिक अस्पताल में सुबह ओपीडी चली। फिर डॉक्टर आईएमए की ओर से निकाले जा रहे मार्च में शामिल हुए। दोपहर करीब तीन बजे वे फिर अस्पताल लौटे। हालांकि, इसके लिए मरीजों से इमरजेंसी की फीस वसूली गई।
प्राइवेट डॉक्टरों की हड़ताल सोमवार को सुबह छह बजे शुरू हुई। डॉक्टर अपने अस्पतालों में नहीं पहुंचे। इन अस्पतालों में आए तमाम मरीजों को जिला अस्पताल जाना पड़ा तो ज्यादातर हड़ताल का पता लगने पर मायूस होकर गए। डॉक्टरों ने इस बीच सुबह दस बजे आईएमए परिसर में प्रदर्शन किया। कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. अनीता अजय ने कोलकाता में हुई घटना का जिक्र करते हुए कहा कि डॉक्टरों के साथ मारपीट की घटना निंदनीय है। अगर हड़ताल के बाद भी सरकार नहीं जागी तो चिकित्सकों को अपने आंदोलन को और अधिक व्यापक बनाने को मजबूर होना पड़ेगा। इसके बाद आईएमए से चौकी चौराहा तक मार्च निकालकर बंगाल सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन किया गया। बाद में आईएमए परिसर में ममता बनर्जी का पुतला भी जलाया गया। पुतला जलाते हुए कार्यकारी अध्यक्ष के दुपट्टे में आग लग गई जिसे पास में मौजूद लोगों ने बुझा दिया।
विज्ञापन
डॉक्टर बोले- हम ‘भगवान’ नहीं
प्रदर्शन के दौरान विधायक डॉ. अरुण कुमार ने कहा कि चिकित्सकों की मांग जायज है और वह उसे केंद्र और राज्य सरकारों तक पहुंचाएंगे। डॉ. सुदीप सरन ने कहा कि डॉक्टर ‘जादूगर’ नहीं है जो छड़ी घुमाकर गंभीर मरीज को सही कर दे। डॉ. रविश अग्रवाल ने कहा कि शत-प्रतिशत मरीजों को ठीक करना डॉक्टर के बस में नहीं है। अगर ऐसा होता तो डॉक्टर अपने घरवालो को कभी मरने न देता। प्रदर्शन में डॉ. अजय भारती, डॉ. रवि मेहरा, डॉ. अनूप आर्य, डॉ. रवि खन्ना, डॉ. अंशु अग्रवाल, डॉ. भारती सरन, डॉ. राघवेंद्र शर्मा, डॉ. विमल भारद्वाज, डॉ. मृदुला शर्मा और अन्य डॉक्टर शामिल रहे।
विज्ञापन
पुतला फूंकते डॉक्टरों की गाड़ी उठा ले गई पुलिस
प्रदर्शन के लिए आईएमए पहुंचे डॉक्टरों ने अपनी कारों को सड़कों पर खड़ा कर दिया। जिससे आईएमए के सामने रोड पर इससे जाम लगने लगा तो इसकी सूचना पर पहुंची ट्रैफिक पुलिस उनकी कारों को उठाने में जुट गई। दूसरी ओर डॉक्टर आईएमए परिसर में ममता बनर्जी का पुतला दहन कर रहे थे। सूचना मिलते ही प्रदर्शन छोड़कर डॉक्टर वाहनों को हटाने के लिए पहुंच गए।
‘रैपिड एक्शन फोर्स’ ने की निगरानी
कहीं किसी अस्पताल में ओपीडी तो तो नहीं चल रही, इसकी निगरानी के लिए डॉक्टरों ने ‘रैपिड एक्शन फोर्स’ बनाई थीं, इसकी टीमें सिविल लाइंस, स्टेडियम रोड, मिनी बाईपास और नैनीताल रोड, पीलीभीत बाईपास, सौ फुटा रोड, डीडीपुरम, राजेंद्र नगर, चौपुला और किला के अस्पतालों की निगरानी करती रहीं।
कुछ अस्पताल में नहीं हुई हड़ताल
शहर के सेटेलाइट के पास एक अस्पताल में गुपचुप तरीके से ओपीडी जारी रही। सूत्रों के मुताबिक अस्पताल में सुबह ओपीडी चली। फिर डॉक्टर आईएमए की ओर से निकाले जा रहे मार्च में शामिल हुए। दोपहर करीब तीन बजे वे फिर अस्पताल लौटे। हालांकि, इसके लिए मरीजों से इमरजेंसी की फीस वसूली गई।