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बादलों ने लगाया पहरा तो कम हुआ घातक पराबैंगनी किरणों का खतरा
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बरेली। प्रदूषण और अक्सर तापमान के हैरान कर देने वाले उतार-चढ़ाव के बीच एक खबर कुछ राहत महसूस कराने वाली भी है। करीब दस साल तक हाई रिस्क लेवल पर रहने के बाद अल्ट्रा वॉयलट रेडियेशन इस बार मॉडरेट इंडेक्स पर दर्ज हुआ है। मौसम विज्ञानी भी इसे महत्वपूर्ण बदलाव मान रहे हैं, हालांकि उनका यह भी कहना है कि अल्ट्रा वॉयलेट रेडियेशन अब भी घातक स्तर पर है, लिहाजा इससे बचाव जरूरी है।
मौसम विज्ञानियों के मुताबिक यूवी रेडियेशन को कम करने में सबसे ज्यादा भूमिका नमी के बढ़े हुए स्तर की है। इसके साथ ऊंचाई पर बादल छाये रहने और हवा के लगातार अपना रुख बदलते रहने का असर भी यूवी रेडियेशन पर पड़ा है। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के डायरेक्टर डॉ. जेपी गुप्ता के मुताबिक पिछले सालों में आसमान साफ रहने की वजह से ही सूरज की तेज धूप जमीन तक सीधे पहुंच रही थी। इस वजह से यूवी रेडियेशन का लेवल इंडेक्स पर सात से 10 के बीच बना रहा जो हाई रिस्क कैटेगरी में आता है। पिछले साल पूरी गर्मी के दौरान पिछले साल यूवी इंडेक्स 9 प्लस था जो एक्सट्रीम कैटगरी है। डॉ. गुप्ता ने बताया कि इस बार यह लेवल तीन से छह के बीच है जो मॉडरेट लेवल पर है। हालांकि यूवी रेडियेशन के मॉडरेट लेवल पर आने पर भी सामान्य सुरक्षा जरूरी है। ऑनलाइन वेदर एजेंसियों के साथ द वेदर चैनल, मीटियोवेस्टा, वेदर ऑनलाइन, एक्यू वेदर का भी दावा कर रहे हैं कि जून के बाद भी यूवी इंडेक्स सामान्य ही बना रहेगा।
डॉ. गुप्ता ने बताया कि इस साल पिछले दो महीने से बरेली का औसत तापमान 37 से 41 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा है जबकि पिछले कई सालों से इसी अवधि में तापमान 40 से 46 डिग्री सेल्सियस के बीच रिकॉर्ड किया जा रहा था। तापमान पिछले सालों से कम होने के बावजूद लोगों को नमी की वजह से ही ज्यादा गर्मी का एहसास हो रहा है।
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यूवी इंडेक्स लेवल
इंडेक्स कैटगरी स्टेज
0-2 लो कोई खतरा नहीं
3-5 मॉडरेट सामान्य सुरक्षा जरूरी
6-7 हाई दोपहर 12 से 3 बजे के बीच धूप से बचें
8-10 एक्सट्रीम हाई रिस्क, सुबह 8 से शाम 5 बजे तक धूप से बचें
नोट: यूवी इंडेक्स सतह पर पहुंचने वाले यूवी रेडिएशन का स्तर बताता है।
यह होता है रेडिएशन का असर
- सनबर्न, स्किन कैंसर, आंख और रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है।
- चोट लगने पर होने वाले घाव जल्दी नहीं भरते, इंफेक्शन तेजी से फैलता है।
- बच्चे और बुजुर्गों आसानी से रेडिशन की चपेट में आ जाते हैं।
- चिड़चिड़ापन, भ्रम, गुस्सा, मानसिक तनाव और व्यवहार आक्रामक हो जाता है।
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मौसम विज्ञानियों के मुताबिक यूवी रेडियेशन को कम करने में सबसे ज्यादा भूमिका नमी के बढ़े हुए स्तर की है। इसके साथ ऊंचाई पर बादल छाये रहने और हवा के लगातार अपना रुख बदलते रहने का असर भी यूवी रेडियेशन पर पड़ा है। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के डायरेक्टर डॉ. जेपी गुप्ता के मुताबिक पिछले सालों में आसमान साफ रहने की वजह से ही सूरज की तेज धूप जमीन तक सीधे पहुंच रही थी। इस वजह से यूवी रेडियेशन का लेवल इंडेक्स पर सात से 10 के बीच बना रहा जो हाई रिस्क कैटेगरी में आता है। पिछले साल पूरी गर्मी के दौरान पिछले साल यूवी इंडेक्स 9 प्लस था जो एक्सट्रीम कैटगरी है। डॉ. गुप्ता ने बताया कि इस बार यह लेवल तीन से छह के बीच है जो मॉडरेट लेवल पर है। हालांकि यूवी रेडियेशन के मॉडरेट लेवल पर आने पर भी सामान्य सुरक्षा जरूरी है। ऑनलाइन वेदर एजेंसियों के साथ द वेदर चैनल, मीटियोवेस्टा, वेदर ऑनलाइन, एक्यू वेदर का भी दावा कर रहे हैं कि जून के बाद भी यूवी इंडेक्स सामान्य ही बना रहेगा।
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डॉ. गुप्ता ने बताया कि इस साल पिछले दो महीने से बरेली का औसत तापमान 37 से 41 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा है जबकि पिछले कई सालों से इसी अवधि में तापमान 40 से 46 डिग्री सेल्सियस के बीच रिकॉर्ड किया जा रहा था। तापमान पिछले सालों से कम होने के बावजूद लोगों को नमी की वजह से ही ज्यादा गर्मी का एहसास हो रहा है।
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यूवी इंडेक्स लेवल
इंडेक्स कैटगरी स्टेज
0-2 लो कोई खतरा नहीं
3-5 मॉडरेट सामान्य सुरक्षा जरूरी
6-7 हाई दोपहर 12 से 3 बजे के बीच धूप से बचें
8-10 एक्सट्रीम हाई रिस्क, सुबह 8 से शाम 5 बजे तक धूप से बचें
नोट: यूवी इंडेक्स सतह पर पहुंचने वाले यूवी रेडिएशन का स्तर बताता है।
यह होता है रेडिएशन का असर
- सनबर्न, स्किन कैंसर, आंख और रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है।
- चोट लगने पर होने वाले घाव जल्दी नहीं भरते, इंफेक्शन तेजी से फैलता है।
- बच्चे और बुजुर्गों आसानी से रेडिशन की चपेट में आ जाते हैं।
- चिड़चिड़ापन, भ्रम, गुस्सा, मानसिक तनाव और व्यवहार आक्रामक हो जाता है।