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जमीन घोटाले में डिप्टी कलक्टर ने एडीएम प्रशासन के नाम किए थे फर्जी दस्तखत

Tue, 11 Jun 2019 01:42 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 11 Jun 2019 01:42 AM IST
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जमीन घोटाले में डिप्टी कलक्टर ने एडीएम प्रशासन के नाम किए थे फर्जी दस्तखत
बरेली। जमीन के घोटालों में पूरा सिस्टम शामिल है। यह अलग बात कानूनगो-लेखपाल जैसे छोटे कर्मचारियों की गर्दनें नाप दी जाती हैं और बड़े अफसरों को सारे सबूतों का सफाया कर साफ बचा दिया जाता है। पीलीभीत बाईपास पर बिहारमान नगला में सराफ की करोड़ों की जमीन को जालसाजी कर हड़पने के मामले में भी ऐसा ही हुआ। तहसीलदार और लेखपाल के अलावा इस जालसाजी में तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर लक्ष्मीशंकर सिंह के शामिल होने के भी स्पष्ट प्रमाण मिले थे, लेकिन तत्कालीन डीएम ने उन्हें सिर्फ चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। पुलिस ने भी डिप्टी कलेक्टर को अपनी विवेचना में नहीं फंसने दिया।
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टीबरीनाथ कॉलोनी में रहने वाले सराफ राजकुमार अग्रवाल की 2012 में पीलीभीत बाईपास पर बिहारमान नगला में गाटा नंबर 625 पर करीब 1880 वर्ग गज जमीन थी। बकौल राजकुमार अग्रवाल, उनकी इस बेशकीमती जमीन पर कुछ माफिया की नजर पड़ी जिसके बाद बड़े सुनियोजित ढंग से इस पर कब्जा करने योजना तैयार की गई। इसी के तहत बहेड़ी के गांव गिरधरपुर निवासी सलीम ने राजकुमार अग्रवाल की आधी जमीन पर अपना स्वामित्व बताते हुए तत्कालीन एसडीएम सदर आरपी सिंह को तूदाबंदी कराने के लिए दरख्वास्त दे दी। एसडीएम ने इस पर आदेश दिया कि दोनों पक्षों को बुलाकर बातचीत की जाए, लेकिन तत्कालीन तहसीलदार गिरीश झा के इशारे पर लेखपाल अमर सिंह ने बगैर किसी उच्चाधिकारी के आदेश पर गाटा नंबर 625 से सटी गाटा नंबर 625 और 624 की जमीन की पैमाइश कर डाली। फिर अपनी रिपोर्ट में राजकुमार अग्रवाल की गाटा नंबर 625 की आधी जमीन को गाटा नंबर 624 का अंश बता दिया।
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राजकुमार अग्रवाल के बेटे अंकुर अग्रवाल के मुताबिक उनके पिता ने शिकायत की तो जांच शुरू हुई। तूदाबंदी सिर्फ कृषि भूमि पर की जाती है लेकिन नियमों को ताक पर रखकर आबादी के बीच उनकी जमीन की भी तूदाबंदी कर दी गई। जांच में सामने आया कि लेखपाल की इस गलत रिपोर्ट पर तत्कालीन डिप्टी कलक्टर लक्ष्मी शंकर सिंह ने 12 दिसंबर 2012 को बतौर कार्यवाहक एडीएम प्रशासन उन्हीं के लेटर पैड पर एसओ इज्जतनगर को आदेश जारी कर दिया कि सलीम को जमीन पर कब्जा दिलाकर राजकुमार अग्रवाल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाए। इस आदेश पर पुलिस ने सलीम को 940 वर्ग गज जमीन पर कब्जा दिला दिया। राजकुमार अग्रवाल की ओर से आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना पर तत्कालीन एडीएम प्रशासन एके उपाध्याय ने खुलासा किया कि उनकी अनुपस्थिति में डिप्टी कलक्टर ने अनाधिकारिक तौर पर यह आदेश जारी किया है। डिप्टी कलक्टर की जालसाजी से यह जाहिर था कि जमीन पर कब्जा कराने के पीछे मुख्य तौर पर उन्हीं का हाथ था लेकिन फिर भी तत्कालीन डीएम अभिषेक प्रकाश ने उन्हें सिर्फ चेतावनी देकर छोड़ दिया। हालांकि राजकुमार अग्रवाल ने डिप्टी कलक्टर लक्ष्मी शंकर सिंह के खिलाफ कार्रवाई के लिए राज्यपाल से शिकायत की है।
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पुलिस की जांच में भी साफ बचे डिप्टी कलक्टर
राजकुमार अग्रवाल की जमीन पर राजस्व रिकॉर्ड में जालसाजी कर अवैध कब्जा करा देने के इस मामले में डिप्टी कलक्टर लक्ष्मी शंकर सिंह की भूमिका स्पष्ट रूप से संदिग्ध थी, लेकिन 2017 में पुलिस ने अपनी जांच रिपोर्ट में लक्ष्मी शंकर के आदेश को तथ्यात्मक त्रुटि मानते हुए उन्हें विवेचना से बाहर कर दिया। अब राजकुमार अग्रवाल उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए यह प्रकरण सीधे राज्यपाल को भेजने जा रहे हैं। सलीम के खिलाफ जरूर पुलिस ने जांच के बाद चार्जशीट लगा दी थी।

पूर्व सपा विधायक की हिम्मत देखें- शहर की चर्चित हस्तियों तक को नहीं बख्शा
सूत्रों के मुताबिक सराफ राजकुमार अग्रवाल की जमीन पर अवैध कब्जा कराने का तानाबाना सपा के एक विधायक के इशारे पर बुना गया था। विधायक के ही दबाव में डिप्टी कलक्टर और तहसीलदार जैसे राजपत्रित अधिकारियों ने न सिर्फ जालसाजी की बल्कि जबरन जमीन पर अवैध कब्जा तक करा दिया। यह तब हुआ जब राजकुमार अग्रवाल बड़े सराफ ही नहीं बल्कि सराफा एसोसिएशन के पदाधिकारी भी थे। मगर सत्ता की हनक के आगे प्रशासन के अफसर इस खेल में कठपुतली बन गए।

बेलगाम है लेखपाल और राजस्व कर्मी
जमीन के फर्जीवाड़ा करने में लेखपाल और राजस्व कर्मी बेलगाम हो गए हैं। कायदे कानून की धज्जियां उड़ाते हुए मनमाने तरीके से जमीन घोटाले करके उन्हें दबा दिया जाता है। चूंकि ऐसे मामले किसी रसूखदार के इशारे पर होते हैं कि इसलिए इसके खिलाफ कोई बोलने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाता।

ऐसे हजारों जमीन घोटाले दफन हैं फाइलों में
फतेहगंज पूर्वी और नवाबगंज जमीन घोटाले तो जांच में सामने आ गए लेकिन जानकारों का कहना है कि कलक्ट्रेट से लेकर तहसीलों में जमीन घोटाले के हजारों मामले फाइलों में दफन हैं। शिकायत के बावजूद इनकी जांच नहीं होती।


राजस्व रिकॉर्ड में गड़बड़ी कर जमीन पर अवैध कब्जा कराने के इस प्रकरण में आरोपियों पर मुकदमा चलाने की कार्रवाई चल रही है। सोमवार को आरोपी गिरीश झा भी मुझसे मिले जो फिलहाल सीतापुर में तैनात हैं। उन्होंने आग्रह किया है कि जांच में उनका पक्ष भी सुना जाए। इसके लिए आदेश दे दिया गया है। -वीरेंद्र कुमार सिंह, जिलाधिकारी
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