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फरीदपुर जमीन घोटाले की जांच आगे नहीं बढ़ पाई

Mon, 03 Jun 2019 01:31 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 03 Jun 2019 01:31 AM IST
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फरीदपुर जमीन घोटाले की जांच आगे नहीं बढ़ पाई
बरेली। फरीदपुर तहसील के फतेहगंज पूर्वी में सैकड़ों बीघा जमीन की खतौनियों में जालसाजी कर उनकी मिल्कियत बदलकर कब्जा कर लेने का मामला अभी तक दबा हुआ है। इस मामले में भी तीन सरकारी कर्मचारियों के नाम सामने आए थे। इनमें एक महिला बाबू अभी भी नवाबगंज तहसील में कार्यरत है जबकि दो कर्मचारी रिटायर हो चुके हैं। प्रशासन के अफसर इनमें से किसी पर कार्रवाई नहीं कर पाया।
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फतेहगंज पूर्वी में हुए इस जमीन घोटाले में करीब सात साल पहले आठ लोगों पर एफआईआर दर्ज हुई थी। जांच हुई तो इस घोटाले में कलक्ट्रेट के रिकॉर्ड रूम में तैनात कई कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई। एफआईआर होने के बाद जमीन जिन लोगों ने अपने नाम कराई थी, उनमें से तो कुछ को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया लेकिन उनके साथ जमीन हड़पने की साजिश में शामिल सरकारी कर्मचारियों की ओर प्रशासनिक अधिकारियों ने पलटकर नहीं देखा। जांच में साफ हुआ था कि कलक्ट्रेट के रिकॉर्ड रूम में रखे खतौनी अभिलेख के 1380 फसली वर्ष में राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों की मदद से गंभीर छेड़छाड़ की गई थी। इसी के बाद भूमाफिया ने सैकड़ों बीघा जमीन को अपने नाम करा लिया था। वर्ष 2011-12 में मामले की जांच के आधार पर फरीदपुर में संबंधित लेखपाल और कानूनगो सहित आठ लोगों को दोषी मानते हुए उन पर केस भी दर्ज हुआ था। खतौनियों को खुर्दबुर्द करने के मामले में राजस्व विभाग के तीन बाबू शैली जौहरी, ऊषा जैन और विनोद सक्सेना फंसे थे। इसमें एक महिला कर्मचारी अभी भी कार्यरत है और दो सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
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