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बिजली सामान इधर उधर, तीन सदस्यीय टीम करेगी जांच
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100 करोड़ पॉवर कॉरपोरेशन में गोलमाल
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बरेली। पॉवर कॉरपोरेशन के स्टोर से सौ करोड़ से ज्यादा कीमत का सामान इधर से उधर कर देने वाले अफसरों का ऑडिट रिपोर्ट में हेराफेरी कराकर अपनी गर्दन बचाने की कोशिश नाकाम होती दिख रही है। अब इस घोटाले की जांच गुड्स मैनेजमेंट के चीफ इंजीनियर के नेतृत्व में गठित तीन सदस्यीय कमेटी करेगी। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। प्रबंध निदेशक ने सामान का सत्यापन करने वाली एजेंसी पर भी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। इस एजेंसी पर अफसरों की सांठगांठ से रिपोर्ट में गड़बड़ी करने का आरोप है।
शहर से देहात तक बिजली का नेटवर्क मजबूत कर 24 घंटे सप्लाई के मकसद से केंद्र ने यूपी सरकार को हजारों करोड़ रुपये की धनराशि दी थी, जिसमें पॉवर कॉरपोरेशन के अफसरों ने तमाम घोटाले कर डाले। तमाम सामान गायब कर दिया गया। शिकायतें होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जांच का आदेश दिया। इसके बाद पॉवर कॉरपोरेशन के उच्चाधिकारियों ने थर्ड पार्टी वेरिफिकेशन कराया, जिसमें बरेली जोन के तहत शाहजहांपुर जिले में करीब सौ करोड़ के घोटाले की पुष्टि हुई लेकिन बाद में इसमें भी खेल हो गया। चूंकि सामान का सत्यापन करने वाली थर्ड पार्टी भी निजी फर्म थी, लिहाजा अफसरों ने उससे सांठगांठ कर रिपोर्ट में गड़बड़ी करा ली। आखिर में इस फर्म ने अपनी रिपोर्ट ही देने से इनकार कर दिया। अमर उजाला ने हाल ही में इस गोलमाल का खुलासा किया था।
अमर उजाला की खबर पर हलचल शुरू हुई तो मामला मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक संजय गोयल तक पहुंचा। उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए उच्चस्तरीय जांच का आदेश दे दिया है। प्रबंध निदेशक के आदेश पर जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर उसे 15 दिन में अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया है। इस टीम गुड्स मैनेजमेंट के चीफ इंजीनियर संदीप सिंह के अलावा एक अधीक्षण अभियंता और एक लेखाधिकारी को शामिल किया गया है। एमडी ने कहा है कि घोटाले की पुष्टि होने के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी। जांच टीम जल्द ही शाहजहांपुर समेत उन सभी स्टोर में जांच करेगा जहां सामान की हेराफेरी होने का अंदेशा है।
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कॉलोनियां हो गईं जगमग
सूत्रों के मुताबिक बिजली विभाग से गायब हुए सामान से तमाम निजी कालोनियां जगमग हो गईं। जांच शुरू हुई तो बरेली, बदायूं, पीलीभीत आदि जिलों में इस मामले में फंस रहे अफसरों ने एजेंसी को मैनेज करने के लिए आपस में चंदा करके मामला निपटा दिया लेकिन शाहजहांपुर समेत कुछ जिलों में इस ‘समझौते’ पर पूरी तरह अमल नहीं हो पाया तो अनाधिकारिक तौर पर मामला खुल गया। यह भी बताया जा रहा है कि मुख्यालय पर तैनात एक निदेशक की ओर से दागी अफसरों को बचाने की लगातार कोशिशों के चलते इस मामले में कार्रवाई भी टल गई।
सरकार की प्राथमिकता वाली योजना में गड़बड़ी और पॉवर कॉरपोरेशन के स्टोर से सामान इधर-उधर होना गंभीर मामला है। मुख्य अभियंता के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम बनाई गई है। इसके साथ ही सत्यापन करने वाली एजेंसी पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट दो सप्ताह के अंदर मांगी गई है। - संजय गोयल, एमडी मध्यांचल विद्युत वितरण निगम
शहर से देहात तक बिजली का नेटवर्क मजबूत कर 24 घंटे सप्लाई के मकसद से केंद्र ने यूपी सरकार को हजारों करोड़ रुपये की धनराशि दी थी, जिसमें पॉवर कॉरपोरेशन के अफसरों ने तमाम घोटाले कर डाले। तमाम सामान गायब कर दिया गया। शिकायतें होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जांच का आदेश दिया। इसके बाद पॉवर कॉरपोरेशन के उच्चाधिकारियों ने थर्ड पार्टी वेरिफिकेशन कराया, जिसमें बरेली जोन के तहत शाहजहांपुर जिले में करीब सौ करोड़ के घोटाले की पुष्टि हुई लेकिन बाद में इसमें भी खेल हो गया। चूंकि सामान का सत्यापन करने वाली थर्ड पार्टी भी निजी फर्म थी, लिहाजा अफसरों ने उससे सांठगांठ कर रिपोर्ट में गड़बड़ी करा ली। आखिर में इस फर्म ने अपनी रिपोर्ट ही देने से इनकार कर दिया। अमर उजाला ने हाल ही में इस गोलमाल का खुलासा किया था।
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अमर उजाला की खबर पर हलचल शुरू हुई तो मामला मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक संजय गोयल तक पहुंचा। उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए उच्चस्तरीय जांच का आदेश दे दिया है। प्रबंध निदेशक के आदेश पर जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर उसे 15 दिन में अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया है। इस टीम गुड्स मैनेजमेंट के चीफ इंजीनियर संदीप सिंह के अलावा एक अधीक्षण अभियंता और एक लेखाधिकारी को शामिल किया गया है। एमडी ने कहा है कि घोटाले की पुष्टि होने के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी। जांच टीम जल्द ही शाहजहांपुर समेत उन सभी स्टोर में जांच करेगा जहां सामान की हेराफेरी होने का अंदेशा है।
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कॉलोनियां हो गईं जगमग
सूत्रों के मुताबिक बिजली विभाग से गायब हुए सामान से तमाम निजी कालोनियां जगमग हो गईं। जांच शुरू हुई तो बरेली, बदायूं, पीलीभीत आदि जिलों में इस मामले में फंस रहे अफसरों ने एजेंसी को मैनेज करने के लिए आपस में चंदा करके मामला निपटा दिया लेकिन शाहजहांपुर समेत कुछ जिलों में इस ‘समझौते’ पर पूरी तरह अमल नहीं हो पाया तो अनाधिकारिक तौर पर मामला खुल गया। यह भी बताया जा रहा है कि मुख्यालय पर तैनात एक निदेशक की ओर से दागी अफसरों को बचाने की लगातार कोशिशों के चलते इस मामले में कार्रवाई भी टल गई।
सरकार की प्राथमिकता वाली योजना में गड़बड़ी और पॉवर कॉरपोरेशन के स्टोर से सामान इधर-उधर होना गंभीर मामला है। मुख्य अभियंता के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम बनाई गई है। इसके साथ ही सत्यापन करने वाली एजेंसी पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट दो सप्ताह के अंदर मांगी गई है। - संजय गोयल, एमडी मध्यांचल विद्युत वितरण निगम